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हरियाणा से आया ग्लैंडर्स, जिले में अलर्ट
Updated Thu, 17 May 2018 01:16 AM IST
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बागपत। जिले में ग्लैंडर्स बीमारी हरियाणा के सोनीपत से पहुंची। ईंट भट्ठे पर सोनीपत से पहुंचा व्यक्ति एक मजदूर को फ्री में घोड़ा देकर चला गया। यह घोड़ा बीमारी से पीड़ित निकला, इसके बाद अन्य घोड़ों में भी बीमारी फैल गई।
घोड़े और खच्चरों में ग्लैंडर्स रोग की पुष्टि होने के बाद डीएम ऋषिरेंद्र कुमार के आदेश पर जिले को कंट्रोल एरिया घोषित किया । हिसार से राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र से वैज्ञानिकों की टीम ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग एक एक घोड़े को मौत की नींद सुला दिया । पांच की रि-सैंपलिंग हुई। ग्लैंडर्स का रोग लोगों की लापरवाही से जिले में फैला है। चिकित्सा विभाग को जानकारी मिली की कि भट्ठो पर हरियाणा के सोनीपत का एक व्यक्ति मुफ्त में घोड़ा देकर चला गया । बाद में पता चला वह बीमार था, लेकिन लोगों को इस रोग की जानकारी नहीं थी। इसके बाद अन्य खच्चर और घोड़े भी इसकी चपेट में आ गए। 14 घोड़ों का नमूने लिए गए, इसमें छह को पुष्टि हो गई, लेकिन पांच को आश्व पालकों के विरोध के चलते और उनकी दोबारा जांच की मांग को लेकर पांच को छोड़ दिया। उनकी रिसैंपलिंग हुई। दो-तीन दिन बाद इसकी रिपोर्ट आ जाएगी। डिप्टी सीवीओ डॉ. लोकेश अग्रवाल ने बताया कि ग्लैंडर्स रोग खतरनाक है। रोग का वायरल दूसरे पशुओं को भी चपेट में ले सकता है। लोगों में एक बार यह बीमारी हो गई तो घातक सिद्ध हो जाएगी। इसके लिए सुरक्षा बहुत जरूरी है।
जिले में 3500 घोड़े हैं पंजीकृत
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि जिले में 3500 घोड़े और खच्चर पंजीकृत है। ग्लैंडर्स फारसी रोग को देखकर जिले के सभी ब्लॉकों से 102 अश्व के नमूने लिए जा चुके हैं। इसकी जांच के लिए लैब भेजा है।
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मवेशियों को लेकर भट्ठे पर मजदूरी करने आते हैं लोग
डिप्टी सीवीओ डॉ. लोकेश अग्रवाल ने बताया कि जिले में बहुत कम मात्रा में अश्व का पालन करते हैं। आसपास के जिले से मजदूरी के लिए लोग भट्ठे पर आते हैं। अपने साथ-साथ अपने मवेशियों को भी लाते हैं। उन्हें थोड़ी बहुत बीमारी होने पर खुद ही इलाज करवा लेते हैं। इस रोग की उन्हें कोई जांच नहीं कर पाते हैं। इस कारण ग्लैंडर्स का रोग अन्य अश्वों की अन्य प्रजातियों में फैल जाता है।
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घोड़े और खच्चरों में ग्लैंडर्स रोग की पुष्टि होने के बाद डीएम ऋषिरेंद्र कुमार के आदेश पर जिले को कंट्रोल एरिया घोषित किया । हिसार से राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र से वैज्ञानिकों की टीम ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग एक एक घोड़े को मौत की नींद सुला दिया । पांच की रि-सैंपलिंग हुई। ग्लैंडर्स का रोग लोगों की लापरवाही से जिले में फैला है। चिकित्सा विभाग को जानकारी मिली की कि भट्ठो पर हरियाणा के सोनीपत का एक व्यक्ति मुफ्त में घोड़ा देकर चला गया । बाद में पता चला वह बीमार था, लेकिन लोगों को इस रोग की जानकारी नहीं थी। इसके बाद अन्य खच्चर और घोड़े भी इसकी चपेट में आ गए। 14 घोड़ों का नमूने लिए गए, इसमें छह को पुष्टि हो गई, लेकिन पांच को आश्व पालकों के विरोध के चलते और उनकी दोबारा जांच की मांग को लेकर पांच को छोड़ दिया। उनकी रिसैंपलिंग हुई। दो-तीन दिन बाद इसकी रिपोर्ट आ जाएगी। डिप्टी सीवीओ डॉ. लोकेश अग्रवाल ने बताया कि ग्लैंडर्स रोग खतरनाक है। रोग का वायरल दूसरे पशुओं को भी चपेट में ले सकता है। लोगों में एक बार यह बीमारी हो गई तो घातक सिद्ध हो जाएगी। इसके लिए सुरक्षा बहुत जरूरी है।
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जिले में 3500 घोड़े हैं पंजीकृत
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि जिले में 3500 घोड़े और खच्चर पंजीकृत है। ग्लैंडर्स फारसी रोग को देखकर जिले के सभी ब्लॉकों से 102 अश्व के नमूने लिए जा चुके हैं। इसकी जांच के लिए लैब भेजा है।
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मवेशियों को लेकर भट्ठे पर मजदूरी करने आते हैं लोग
डिप्टी सीवीओ डॉ. लोकेश अग्रवाल ने बताया कि जिले में बहुत कम मात्रा में अश्व का पालन करते हैं। आसपास के जिले से मजदूरी के लिए लोग भट्ठे पर आते हैं। अपने साथ-साथ अपने मवेशियों को भी लाते हैं। उन्हें थोड़ी बहुत बीमारी होने पर खुद ही इलाज करवा लेते हैं। इस रोग की उन्हें कोई जांच नहीं कर पाते हैं। इस कारण ग्लैंडर्स का रोग अन्य अश्वों की अन्य प्रजातियों में फैल जाता है।