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निरपुड़ा और हिसावदा में मार गिराए थे तेंदुए
Updated Fri, 08 Dec 2017 01:06 AM IST
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बागपत। बारहसिंगा के शिकार से एक बार फिर जंगली जीवों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। निरपुड़ा में तेंदुए के शावक को लाठियों से पीटकर शिकारियों ने मौत के घाट उतार दिया था। हिसावदा में तो तेंदुए को बाइक पर लेकर युवक घूमे थे। सख्त कार्रवाई के अभाव में शिकारी खुलकर खेलते हैं। हालांकि पिछले करीब दो साल में हिरण के शिकार का यह पहला मामला है।
जंगली जानवरों के शिकार की बात करें तो दोघट क्षेत्र के निरपुड़ा गांव में पिछले वर्ष तेंदुए के शावक को शिकारियों ने मार गिराया था। लेकिन किसानों के शोर मचाए जाने पर शिकारी भाग खड़े हुए। वन विभाग की टीम ने मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन अभी तक शिकारी नहीं पकड़े जा सके हैं। इस मामले को तस्करी से जोड़कर देखा जा रहा था। किसानों ने वन विभाग को जानकारी दी थी। हिसावदा गांव में तेंदुए को मारकर गांव में बाइक पर घुमाने का मामला सामने आ चुका है। बिनौली क्षेत्र में बारहसिंगा कई बार घायलावस्था में मिल चुके हैं। वन विभाग की लचर कार्रवाई के चलते शिकारियों पर अब तक शिकंजा नहीं कसा जा सका है। बड़ौत में बिजरौल रोड पर एक चीतल हिरन मृत अवस्था में मिला था। बागपत रेंज के अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि बारहसिंगा के शिकार का पहला मामला है। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है।
भारत और नेपाल में मिलते हैं बारहसिंगा
बागपत। वेस्ट यूपी में बारहसिंगों की संख्या बढ़ रही है। बागपत रेंज के अधिकारी राजेश कुमार कहते हैं कि अकेले बागपत में ही इनकी संख्या करीब 572 के पार हैं। गन्ने की फसल की कटाई के कारण इन दिनों बारहसिंगा खेतों से बाहर भाग रहे हैं। कई बार कुत्ते दौड़कर इन्हें घायल कर देते हैं। गूंगाहेड़ी में ग्रामीणों ने किसी तरह बारहसिंगा को बचाया था। बागपत में ही 572 बारहसिंगा हैं, जिनकी जान को खतरा पैदा हो गया है। वन विभाग को आशंका है कि कहीं शिकारी तो जंगल में नहीं घूम रहे हैं।
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इनसेट
18 घंटे पहले किया शिकार
बागपत। पशु चिकित्सक सुबोध पंवार का कहना है कि बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे पोस्टमार्टम किया गया। इससे करीब 18 घंटे पहले बारहसिंगा का शिकार किया गया है। यानि करीब शाम के छह बजे के करीब बारहसिंगा को गोली मारी गई है। वन विभाग इस समय खेत में मौजूद रहने वाले किसानों से पूछताछ में जुटी है।
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जंगली जानवरों के शिकार की बात करें तो दोघट क्षेत्र के निरपुड़ा गांव में पिछले वर्ष तेंदुए के शावक को शिकारियों ने मार गिराया था। लेकिन किसानों के शोर मचाए जाने पर शिकारी भाग खड़े हुए। वन विभाग की टीम ने मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन अभी तक शिकारी नहीं पकड़े जा सके हैं। इस मामले को तस्करी से जोड़कर देखा जा रहा था। किसानों ने वन विभाग को जानकारी दी थी। हिसावदा गांव में तेंदुए को मारकर गांव में बाइक पर घुमाने का मामला सामने आ चुका है। बिनौली क्षेत्र में बारहसिंगा कई बार घायलावस्था में मिल चुके हैं। वन विभाग की लचर कार्रवाई के चलते शिकारियों पर अब तक शिकंजा नहीं कसा जा सका है। बड़ौत में बिजरौल रोड पर एक चीतल हिरन मृत अवस्था में मिला था। बागपत रेंज के अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि बारहसिंगा के शिकार का पहला मामला है। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है।
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भारत और नेपाल में मिलते हैं बारहसिंगा
बागपत। वेस्ट यूपी में बारहसिंगों की संख्या बढ़ रही है। बागपत रेंज के अधिकारी राजेश कुमार कहते हैं कि अकेले बागपत में ही इनकी संख्या करीब 572 के पार हैं। गन्ने की फसल की कटाई के कारण इन दिनों बारहसिंगा खेतों से बाहर भाग रहे हैं। कई बार कुत्ते दौड़कर इन्हें घायल कर देते हैं। गूंगाहेड़ी में ग्रामीणों ने किसी तरह बारहसिंगा को बचाया था। बागपत में ही 572 बारहसिंगा हैं, जिनकी जान को खतरा पैदा हो गया है। वन विभाग को आशंका है कि कहीं शिकारी तो जंगल में नहीं घूम रहे हैं।
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18 घंटे पहले किया शिकार
बागपत। पशु चिकित्सक सुबोध पंवार का कहना है कि बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे पोस्टमार्टम किया गया। इससे करीब 18 घंटे पहले बारहसिंगा का शिकार किया गया है। यानि करीब शाम के छह बजे के करीब बारहसिंगा को गोली मारी गई है। वन विभाग इस समय खेत में मौजूद रहने वाले किसानों से पूछताछ में जुटी है।