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वामन देव की कथा सुन श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध
Updated Wed, 02 Aug 2017 01:06 AM IST
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वामन देव की कथा सुन श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध
बागपत। श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बाल साध्वी राधा देवी ने से वामन भगवान का चरित्र वर्णन किया। इसके बाद प्रसाद बांटा।
मंगलवार को जानकी दास मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा को सुनाते हुए कथावाचक राधा देवी ने कहा राजा बली जो राक्षस कुल में जन्मे थे, भगवान के परम भक्त थे। भक्ति से खुश होकर भिक्षा मांगने के लिए आए। शुक्राचार्य जो राक्षसों के गुरु थे, उन्होंने राजा बलि को बहुत मना किया, वामन भगवान एक साधारण ब्राह्मण नहीं हैं यह तो साक्षात विष्णु ही वामन रूप में छल करके आए है। राजा बलि को पता चला तो विष्णु भगवान वामन रूप में मेरे द्वार पर भिक्षा लेने के लिए आए हैं, वह गदगद हो गए। यह उनका सौभाग्य है आज तो मैं अपने गुरु की आज्ञा का भी पालन नहीं करूंगा। आज मैं भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए अपने गुरु शुक्राचार्य का त्याग करता हूं और वामन भगवान की सेवा कर अपने जीवन को धन्य करता हूं। राजा बलि ने वामन भगवान को प्रसन्न करने के लिए तीन पग में अपना सब कुछ दान कर दिया। समर्पित भक्तों के लिए भगवान अपने सब नियम तोड़ देते हैं। भजनों को सुनाया। इसमें भूपेंद्र शर्मा, संजय गौतम, दुर्गेश कौशिक, राज नारायण पांडे, राज कुमार शास्त्री, प्रेमदास महाराज, लालदास महाराज, चेतनदास महाराज मौजूद रहे।
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बागपत। श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बाल साध्वी राधा देवी ने से वामन भगवान का चरित्र वर्णन किया। इसके बाद प्रसाद बांटा।
मंगलवार को जानकी दास मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा को सुनाते हुए कथावाचक राधा देवी ने कहा राजा बली जो राक्षस कुल में जन्मे थे, भगवान के परम भक्त थे। भक्ति से खुश होकर भिक्षा मांगने के लिए आए। शुक्राचार्य जो राक्षसों के गुरु थे, उन्होंने राजा बलि को बहुत मना किया, वामन भगवान एक साधारण ब्राह्मण नहीं हैं यह तो साक्षात विष्णु ही वामन रूप में छल करके आए है। राजा बलि को पता चला तो विष्णु भगवान वामन रूप में मेरे द्वार पर भिक्षा लेने के लिए आए हैं, वह गदगद हो गए। यह उनका सौभाग्य है आज तो मैं अपने गुरु की आज्ञा का भी पालन नहीं करूंगा। आज मैं भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए अपने गुरु शुक्राचार्य का त्याग करता हूं और वामन भगवान की सेवा कर अपने जीवन को धन्य करता हूं। राजा बलि ने वामन भगवान को प्रसन्न करने के लिए तीन पग में अपना सब कुछ दान कर दिया। समर्पित भक्तों के लिए भगवान अपने सब नियम तोड़ देते हैं। भजनों को सुनाया। इसमें भूपेंद्र शर्मा, संजय गौतम, दुर्गेश कौशिक, राज नारायण पांडे, राज कुमार शास्त्री, प्रेमदास महाराज, लालदास महाराज, चेतनदास महाराज मौजूद रहे।