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जगद्गुरू शंकराचार्य आश्रम पक्का घाट के महंत का निधन, शहर में शोक
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बागपत। नगर के पक्का घाट मंदिर में स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम के महंत रामस्वरूप ब्रह्मचारी का का मंगलवार की सुबह ब्रेन हैमरेज से निधन हो गया। सूचना से शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम दर्शन के लिए शव यात्रा निकाली गई। इसके बाद यमुना पर दाह संस्कार मेरठ से पहुंचे दिव्यानंद जी महाराज ने किया।
नगर के पक्का घाट स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम है। यहां पर वर्ष 2000 में ब्रह्मचारी रामस्वरुप ने जिम्मेदारी संभाली थी। तभी से मंदिर बुलंदियों पर पहुंच गया था। उन्होंने यहां पर कई मंदिरों का निर्माण कराया। गोशाला का संचालन किया। मंदिर की आय बढ़ाने के लिए दुकानें बनवाईं। जमीन को कब्जा मुक्त कराया। उनके शिष्य विजय शुक्ला ने बताया कि ब्रह्मचारी जी मूल रूप से जालौन जिले के ईटोरा मवाई गांव के रहने वाले हैं। पिछले 11 माह से बीमार चल रहे थे। उनको शुगर हो गई थी। सोमवार को उनकी हालत ज्यादा खराब होने के बाद बड़ौत के आस्था अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन वहां उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। उपचार के दौरान मंगलवार को दम तोड़ दिया। ब्रह्मचारी के निधन की सूचना से शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। मंदिर में पहुंचने के लिए लोगों का ताता लग गया। अंतिम दर्शन के लिए पक्का घाट मंदिर से शव यात्रा निकाली। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए यात्रा यमुना स्थल पहुंची। यहां पर मेरठ से पहुंचे संत दिव्यानंद जी महाराज ने अंतिम संस्कार किया। इस दौरान भैया दास जी महाराज, कृष्ण स्वरूप ब्रह्मचारी, अजय चौहान, जितेंद्र प्रमुख, विक्की चौधरी, पूर्व चेयरमैन रोहताश गुप्ता, राजीव गुप्ता, महेश शर्मा, सुनील चौहान, भवी कश्यप, राजीव ठेकेदार, सतपाल उपाध्याय, राज पाल शर्मा, राधेश्याम शर्मा, संजय रूहेला, नंदलाल डोगरा, सतीश गुप्ता, पंडित मनोहर लाल शर्मा, लक्ष्मण फौजदार, हरबीरी, पूनम, सुनीता, गुड्डी, प्रमिला आदि रहे।
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नगर के पक्का घाट स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम है। यहां पर वर्ष 2000 में ब्रह्मचारी रामस्वरुप ने जिम्मेदारी संभाली थी। तभी से मंदिर बुलंदियों पर पहुंच गया था। उन्होंने यहां पर कई मंदिरों का निर्माण कराया। गोशाला का संचालन किया। मंदिर की आय बढ़ाने के लिए दुकानें बनवाईं। जमीन को कब्जा मुक्त कराया। उनके शिष्य विजय शुक्ला ने बताया कि ब्रह्मचारी जी मूल रूप से जालौन जिले के ईटोरा मवाई गांव के रहने वाले हैं। पिछले 11 माह से बीमार चल रहे थे। उनको शुगर हो गई थी। सोमवार को उनकी हालत ज्यादा खराब होने के बाद बड़ौत के आस्था अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन वहां उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। उपचार के दौरान मंगलवार को दम तोड़ दिया। ब्रह्मचारी के निधन की सूचना से शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। मंदिर में पहुंचने के लिए लोगों का ताता लग गया। अंतिम दर्शन के लिए पक्का घाट मंदिर से शव यात्रा निकाली। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए यात्रा यमुना स्थल पहुंची। यहां पर मेरठ से पहुंचे संत दिव्यानंद जी महाराज ने अंतिम संस्कार किया। इस दौरान भैया दास जी महाराज, कृष्ण स्वरूप ब्रह्मचारी, अजय चौहान, जितेंद्र प्रमुख, विक्की चौधरी, पूर्व चेयरमैन रोहताश गुप्ता, राजीव गुप्ता, महेश शर्मा, सुनील चौहान, भवी कश्यप, राजीव ठेकेदार, सतपाल उपाध्याय, राज पाल शर्मा, राधेश्याम शर्मा, संजय रूहेला, नंदलाल डोगरा, सतीश गुप्ता, पंडित मनोहर लाल शर्मा, लक्ष्मण फौजदार, हरबीरी, पूनम, सुनीता, गुड्डी, प्रमिला आदि रहे।
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