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विश्व गौरेया दिवस धूमधाम से मनाया
Updated Wed, 21 Mar 2018 01:12 AM IST
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विश्व गौरैया दिवस धूमधाम से मनाया
बड़ौत (बागपत)।
ईदरीशपुर गांव स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को वन विभाग के अंतर्गत विश्व गौरैया दिवस धूमधाम से मनाया गया। वन अफसरों ने बच्चों को गौरैया दिवस क्यों मनाया जाता है आदि जानकारियां दी। साथ बच्चों को गौरैया के संरक्षण की शपथ दिलाई।
आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ वन क्षेत्राधिकारी राजपाल सिंह, वन दरोगा आंसु चौधरी व वन रक्षक संजय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वन क्षेत्राधिकारी राजपाल सिंह ने कहा कि आधुनिक मकान, बढ़ता प्रदूषण, जीवनशैली में आए बदलाव के कारण गौैरैया लुप्त हो रही है। अब गौरैया के अस्तित्व पर छाए संकट के बादलों ने इसकी संख्या काफी कम कर दी है। इस संकट की घड़ी में नन्हीं गौरैया को अपने अंगने में बुलाने के लिए हम लोगों को मिलकर कई काम करने होंगे। वन दरोगा आंसु चौधरी ने कहा कि गौरैया की आवाज अब चंद घरों मेें ही सिमट कर रह गई है। एक समय था जब उनकी आवाज सुबह और शाम को आंगन में सुनाई पड़ती थी। लेकिन आज परिवेश में आए बदलाव के कारण वह शहर व गांव से दूर होती जा रही है। वन रक्षक संजय ने स्कूली बच्चों को बताया कि हमारे अपने बीच में फुदकने वाली प्यारी से चिड़िया जिसको अंग्रेजी में स्पेरो तथा हिंदी में गौरैया के नाम से पहचाना जाता है। बताया कि इसकी कुल लंबाई 14 से 16 सेंटीमीटर की होती है और वजन 25 से 32 ग्राम होता है। उन्होंने बच्चों से लगातार कम हो रही गौरैया के संरक्षण पर बल दिया। संचालन वन कर्मी मनोज व विकास ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में साक्षी, दीपिका, अरुणा, भारती, सुनीता, संगीता, अनिल, सुरेंद्र, इमरान, बिट्टू, जावेद शामिल रहे।
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बड़ौत (बागपत)।
ईदरीशपुर गांव स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को वन विभाग के अंतर्गत विश्व गौरैया दिवस धूमधाम से मनाया गया। वन अफसरों ने बच्चों को गौरैया दिवस क्यों मनाया जाता है आदि जानकारियां दी। साथ बच्चों को गौरैया के संरक्षण की शपथ दिलाई।
आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ वन क्षेत्राधिकारी राजपाल सिंह, वन दरोगा आंसु चौधरी व वन रक्षक संजय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वन क्षेत्राधिकारी राजपाल सिंह ने कहा कि आधुनिक मकान, बढ़ता प्रदूषण, जीवनशैली में आए बदलाव के कारण गौैरैया लुप्त हो रही है। अब गौरैया के अस्तित्व पर छाए संकट के बादलों ने इसकी संख्या काफी कम कर दी है। इस संकट की घड़ी में नन्हीं गौरैया को अपने अंगने में बुलाने के लिए हम लोगों को मिलकर कई काम करने होंगे। वन दरोगा आंसु चौधरी ने कहा कि गौरैया की आवाज अब चंद घरों मेें ही सिमट कर रह गई है। एक समय था जब उनकी आवाज सुबह और शाम को आंगन में सुनाई पड़ती थी। लेकिन आज परिवेश में आए बदलाव के कारण वह शहर व गांव से दूर होती जा रही है। वन रक्षक संजय ने स्कूली बच्चों को बताया कि हमारे अपने बीच में फुदकने वाली प्यारी से चिड़िया जिसको अंग्रेजी में स्पेरो तथा हिंदी में गौरैया के नाम से पहचाना जाता है। बताया कि इसकी कुल लंबाई 14 से 16 सेंटीमीटर की होती है और वजन 25 से 32 ग्राम होता है। उन्होंने बच्चों से लगातार कम हो रही गौरैया के संरक्षण पर बल दिया। संचालन वन कर्मी मनोज व विकास ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में साक्षी, दीपिका, अरुणा, भारती, सुनीता, संगीता, अनिल, सुरेंद्र, इमरान, बिट्टू, जावेद शामिल रहे।
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