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स्थानांतरित नहीं हुईं चर्मशोधन इकाइयां
Updated Sat, 21 Jul 2018 12:24 AM IST
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स्थानांतरित नहीं हुईं चर्मशोधन इकाइयां
दोघट। भड़ल गांव में चल रही चर्मशोधन इकाइयों को स्थानांतरित कराने के लिए ग्रामीणों ने एनजीटी में याचिका दायर की है। ग्राम समाज ने गांव से बाहर भूमि भी आवंटित की हुई। इकाईयों के कारण लोगों में बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बहुत पहले ही ये इकाइयां स्थानांतरित की जानी थीं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
भड़ल गांव में 93 चरम शोधन इकाइयां हैं। इनसे निकलने वाली दुर्गंध से ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो रहा है। दूषित पानी ने तालाब ही नहीं भूजल को दूषित कर दिया है। ग्रामीणों में बीमारियां फैल रही हैं। इससे ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों के मुताबिक एक साल पहले तत्कालीन डीएम ने इकाइयों को गांव से बाहर स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए थे। लेकिन इन्हें आज तक भी स्थानांतरित नहीं किया गया। प्रधान देवेंद्र राणा ने गांव से 500 मीटर दूर ग्राम समाज की भूमि भी आवंटित कर दी थी। इसकी चारदीवारी और भराव भी कराया जा चुका है। लेकिन इकाईयों के संचालक इन्हें स्थानांतरित नहीं कर रहे हैं।
समाज सेवी जितेंद्र ने अब एनजीटी का दरवाजा खटखटाया है। उसने डीएम बागपत, एसडीएम बड़ौत को पार्टी बनाते हुए एनजीटी में याचिका दायर है। उधर, चर्म शोधन इकाई के संचालक रविंद्र ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा आवंटित की गई भूमि बहुत कम है। इसमें सिर्फ 19 इकाइयां ही स्थापित हो सकती हैं जबकि गांव में 93 इकाइयां संचालित हैं। अन्य इकाइयों को बंद करना पड़ेगा। इससे हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। प्रधान देवेंद्र राणा ने बताया कि मानक के अनुसार चर्मशोधन इकाइयों के लिए भूमि आवंटित की गई है। इसके बाद भी इन्हें स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की।
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दोघट। भड़ल गांव में चल रही चर्मशोधन इकाइयों को स्थानांतरित कराने के लिए ग्रामीणों ने एनजीटी में याचिका दायर की है। ग्राम समाज ने गांव से बाहर भूमि भी आवंटित की हुई। इकाईयों के कारण लोगों में बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बहुत पहले ही ये इकाइयां स्थानांतरित की जानी थीं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
भड़ल गांव में 93 चरम शोधन इकाइयां हैं। इनसे निकलने वाली दुर्गंध से ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो रहा है। दूषित पानी ने तालाब ही नहीं भूजल को दूषित कर दिया है। ग्रामीणों में बीमारियां फैल रही हैं। इससे ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों के मुताबिक एक साल पहले तत्कालीन डीएम ने इकाइयों को गांव से बाहर स्थानांतरित करने के आदेश जारी कर दिए थे। लेकिन इन्हें आज तक भी स्थानांतरित नहीं किया गया। प्रधान देवेंद्र राणा ने गांव से 500 मीटर दूर ग्राम समाज की भूमि भी आवंटित कर दी थी। इसकी चारदीवारी और भराव भी कराया जा चुका है। लेकिन इकाईयों के संचालक इन्हें स्थानांतरित नहीं कर रहे हैं।
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समाज सेवी जितेंद्र ने अब एनजीटी का दरवाजा खटखटाया है। उसने डीएम बागपत, एसडीएम बड़ौत को पार्टी बनाते हुए एनजीटी में याचिका दायर है। उधर, चर्म शोधन इकाई के संचालक रविंद्र ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा आवंटित की गई भूमि बहुत कम है। इसमें सिर्फ 19 इकाइयां ही स्थापित हो सकती हैं जबकि गांव में 93 इकाइयां संचालित हैं। अन्य इकाइयों को बंद करना पड़ेगा। इससे हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। प्रधान देवेंद्र राणा ने बताया कि मानक के अनुसार चर्मशोधन इकाइयों के लिए भूमि आवंटित की गई है। इसके बाद भी इन्हें स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की।
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