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रमजान को लेकर मुस्लिमों ने तैयारी पूरी कीं
Updated Thu, 17 May 2018 01:00 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। माह-ए-पाक रमजान प्रारंभ हो गया है। बरकत और रहमत वाले इस माह के लिए मुस्लिम समाज की तैयारी शुरू हो गई है। रमजान की तैयारी पूरी हो चुकी हैं, लोगों ने चांद दिखा और एक दूसरे को रमजान माह की बधाई दी।
रमजान प्रारंभ होने के साथ मस्जिदों में तरावीह पढ़ाने के लिए हाफिज पहुंचने लगेंगे। वहां वजू खाने में पानी की पर्याप्त व्यवस्था सहित बिजली व पंखे, कूलर भी दुरुस्त कराए जा रहे हैं। घरों की साफ-सफाई का अभी से ही खास ख्याल रखा जा रहा है। रमजान प्रारंभ होने को लेकर आवश्यक खरीद-फरोख्त सहित अन्य कामों को अंजाम दिया जा रहा हैं। रमजान प्रारंभ होने को लेकर बच्चे युवा, बुजुर्गों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। रमजान के मौके पर बाजार में रौनक बढ़ी है। लोग रमजान की तैयारी को लेकर खरीदारी करते दिखे। बाजार में सहरी के लिए फैनी, सिवाईं, खजला और रस्क, खजूर आदि से दुकानें सज चुकी हैं।
मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीम बिजरौल के मोहतमिम मुफ़्ती अब्बास ने बताया कि माह रमजान में लोग अल्लाह से अपने गुनाह पर नदामत के आंसू बहाकर अल्लाह को राजी करते हैं। अल्लाह की तरफ से मुसलमानों पर सबसे बड़ा इनाम रमजान का महीना है जो रहमत और मगफिरत वाला महीना है। इस महीने की फजीलत बेशुमार हैं, सबसे बड़ी फजीलत यह है कि इस महीने में कुरान नाजिल किया और कुरान से बढ़कर दोनों जहां में कोई दूसरी नेमत नहीं हो सकती। अल्लाह ने मुसलमान रोजेदारों के रूहानी और जिस्मानी फायदे के लिए इस महीने को मखसूस फरमाया है। जहां रोजेदारों को रोजा रखने से जिस्मानी फायदा होता है, वहीं रूह भी पाकीजा हो जाती है। लोग गुनाह से बचते हैं। उन्होंने बताया कि इस माह मुबारक में गुनाह से तौबा करने वाला ऐसा है, जैसा कि उसने गुनाह किया ही नहीं। इस खास महीने में अल्लाह अपने रोजेदार बंदों की मगफिरत फरमा देता है। कारी शाबिर ने बताया कि इंसान गलती का पुतला होता है। अपनी गलती सुधारने का मौका भी रमजान के रोजे में मिलता है। गलती के लिए तौबा करने एवं अच्छाई के बदले बरकत पाने के लिए भी इस महीने की इबादत का महत्व है, इसीलिए इन दिनों जकात देने का खासा महत्व है।
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रमजान प्रारंभ होने के साथ मस्जिदों में तरावीह पढ़ाने के लिए हाफिज पहुंचने लगेंगे। वहां वजू खाने में पानी की पर्याप्त व्यवस्था सहित बिजली व पंखे, कूलर भी दुरुस्त कराए जा रहे हैं। घरों की साफ-सफाई का अभी से ही खास ख्याल रखा जा रहा है। रमजान प्रारंभ होने को लेकर आवश्यक खरीद-फरोख्त सहित अन्य कामों को अंजाम दिया जा रहा हैं। रमजान प्रारंभ होने को लेकर बच्चे युवा, बुजुर्गों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। रमजान के मौके पर बाजार में रौनक बढ़ी है। लोग रमजान की तैयारी को लेकर खरीदारी करते दिखे। बाजार में सहरी के लिए फैनी, सिवाईं, खजला और रस्क, खजूर आदि से दुकानें सज चुकी हैं।
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मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीम बिजरौल के मोहतमिम मुफ़्ती अब्बास ने बताया कि माह रमजान में लोग अल्लाह से अपने गुनाह पर नदामत के आंसू बहाकर अल्लाह को राजी करते हैं। अल्लाह की तरफ से मुसलमानों पर सबसे बड़ा इनाम रमजान का महीना है जो रहमत और मगफिरत वाला महीना है। इस महीने की फजीलत बेशुमार हैं, सबसे बड़ी फजीलत यह है कि इस महीने में कुरान नाजिल किया और कुरान से बढ़कर दोनों जहां में कोई दूसरी नेमत नहीं हो सकती। अल्लाह ने मुसलमान रोजेदारों के रूहानी और जिस्मानी फायदे के लिए इस महीने को मखसूस फरमाया है। जहां रोजेदारों को रोजा रखने से जिस्मानी फायदा होता है, वहीं रूह भी पाकीजा हो जाती है। लोग गुनाह से बचते हैं। उन्होंने बताया कि इस माह मुबारक में गुनाह से तौबा करने वाला ऐसा है, जैसा कि उसने गुनाह किया ही नहीं। इस खास महीने में अल्लाह अपने रोजेदार बंदों की मगफिरत फरमा देता है। कारी शाबिर ने बताया कि इंसान गलती का पुतला होता है। अपनी गलती सुधारने का मौका भी रमजान के रोजे में मिलता है। गलती के लिए तौबा करने एवं अच्छाई के बदले बरकत पाने के लिए भी इस महीने की इबादत का महत्व है, इसीलिए इन दिनों जकात देने का खासा महत्व है।
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