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जाटों को रोकने के लिए भाजपा का सियासी चक्रव्यूह
Updated Tue, 08 May 2018 01:20 AM IST
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बागपत। कैराना उपचुनाव में भाजपा किसी चूक के मूड में नहीं है। यही वजह है कि 19 विधायक और पांच सांसदों के नेतृत्व में भारी भरकम टीम मतदाताओं के बीच होगी। जाटों की रालोद वापसी रोकने के बागपत के अलावा आसपास के जिलों के जाट नेताओं की तैनाती की जा रही है। यही फार्मूला कश्यप समाज के वोट रोकने के लिए भरी तैयार किया गया है। कश्यप समाज के दोनों सांसद प्रचार में दिखेंगे।
कैराना और नूरपुर में भाजपा और महागठबंधन का मुकाबला है। जाटों को रालोद का मूल वोट बैंक माना जाता है। भाजपा को आशंका है कि कहीं इस बार जाटों की फिर से रालोद में वापसी न हो जाए, यही वजह है कि सियासी शह मात का खेल शुरू कर दिया गया है। बागपत के भाजपा विधायक योगेश धामा को गंगोह विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। छपरौली के विधायक सहेंद्र सिंह रमाला को छपरौली से सटे कैराना लोकसभा के गांवों में प्रचार की जिम्मेदारी मिली है। बड़ौत विधायक केपी मलिक को शामली क्षेत्र के गठवाला खाप के गांवों में प्रचार सौंपा गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर को भाजपा ने एलम मंडल की जिम्मेदारी दी है। कैराना लोकसभा में 19 मंडल हैं, जिनके प्रभारी 19 विधाय
कों को बनाया गया। पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान के अलावा राज्यसभा सांसद कांता कर्दम, विजयपाल तोमर, साकंसद नरेंद्र कश्यप और धर्मेंद्र कश्यप की ड्यूटी चुनाव में रहेगी। विशेषकर जाट नेताओं को कैराना क्षेत्र में प्रचार के लिए भेजा जा रहा है। इनमें कई पालिकाध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्ष भी शामिल है। ऐेसे में नेताओं ने अपने प्रभाव वाले गांव में संपर्क साधना शुरू किया है, कई नेता अपनी रिश्तेदारियों से फीड बैक ले रहे हैं।
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रालोद की साख, जाट-मुस्लिम समीकरण का इम्तिहान
बागपत। कैराना और नूरपुर में जाट-मुस्लिम समीकरण का भी इम्तिहान होगा। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से यह समीकरण बिखर गया था। गठबंधन ने कैराना में मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर साल 2019 की तैयारियां साफ कर दी है। देखने वाली बात यह होगी कि मुस्लिम प्रत्याशी के पक्ष में जाट वोट लामबंद होते हैं या नहीं। यहीं से दोबारा भविष्य की राजनीति शुरू होगी। रालोद के लिए भी अपने प्रत्याशी को जाट वोट दिलाना बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि रालोद ने भी बागपत और आसपास के जिलों के नेताओं की टीम कैराना में उतारने की तैयारी कर ली है।
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कैराना और नूरपुर में भाजपा और महागठबंधन का मुकाबला है। जाटों को रालोद का मूल वोट बैंक माना जाता है। भाजपा को आशंका है कि कहीं इस बार जाटों की फिर से रालोद में वापसी न हो जाए, यही वजह है कि सियासी शह मात का खेल शुरू कर दिया गया है। बागपत के भाजपा विधायक योगेश धामा को गंगोह विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। छपरौली के विधायक सहेंद्र सिंह रमाला को छपरौली से सटे कैराना लोकसभा के गांवों में प्रचार की जिम्मेदारी मिली है। बड़ौत विधायक केपी मलिक को शामली क्षेत्र के गठवाला खाप के गांवों में प्रचार सौंपा गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर को भाजपा ने एलम मंडल की जिम्मेदारी दी है। कैराना लोकसभा में 19 मंडल हैं, जिनके प्रभारी 19 विधाय
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रालोद की साख, जाट-मुस्लिम समीकरण का इम्तिहान
बागपत। कैराना और नूरपुर में जाट-मुस्लिम समीकरण का भी इम्तिहान होगा। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से यह समीकरण बिखर गया था। गठबंधन ने कैराना में मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर साल 2019 की तैयारियां साफ कर दी है। देखने वाली बात यह होगी कि मुस्लिम प्रत्याशी के पक्ष में जाट वोट लामबंद होते हैं या नहीं। यहीं से दोबारा भविष्य की राजनीति शुरू होगी। रालोद के लिए भी अपने प्रत्याशी को जाट वोट दिलाना बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि रालोद ने भी बागपत और आसपास के जिलों के नेताओं की टीम कैराना में उतारने की तैयारी कर ली है।
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