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सुविधाएं नहीं तो बागपत में कैसे बढ़ेगा निवेश?
Updated Wed, 21 Feb 2018 01:32 AM IST
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बागपत। इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से सूबे में भले ही उद्यमियों के निवेश के दरवाजे खोले जा रहे हो, लेकिन बागपत में निवेश कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सड़कों की बदहाली, कच्चे माल की उपलब्धता, कानून व्यवस्था और यूपीएसआईडीसी क्षेत्र से रेल मार्ग की दूरी के चलते जिला मुख्यालय पर उद्योग विकसित नहीं हो सके हैं। यूपी स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड ने उद्योग के विकास के लिए करीब दो सौ प्लॉट उद्यमियों के लिए अधिग्रहीत किए। जिला बनने के करीब 21 साल बाद अब तक इस एरिया में केवल 35 प्लाट में ही फैक्ट्री संचालित हैं। करीब तीस निर्माणाधीन हैं। अधिकतर प्लाट ऐसे हैं, जिनमें उद्यमियों ने खरीद लिए, लेकिन यहां पर बेहतर वातावरण के अभाव में काम शुरू नहीं किया। जो काम शुरू किए हैं, वह भी सीमित हैं।
बागपत का संचालन ट्रानिका सिटी से
बागपत। यूपी स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के लिए जिला मुख्यालय पर एरिया घोषित किया । अधिकारियों के लिए भवन का निर्माण भी हुआ, लेकिन अभी भी प्रोजेक्ट मैनेजर और अन्य अधिकारी गाजियाबाद के ट्रानिका सिटी से ही बागपत की योजनाओं का संचालन कर रहे हैं।
माहौल तो दीजिए, तभी बढ़ेगा निवेश
बागपत। यूपी स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जयपाल सिंह कहते हैं कि माहौल नहीं मिला। जो उद्योग लगाए, उनकी स्थिति सुविधाएं नहीं मिलने के कारण बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। कांटा इंजीनियरिंग फैक्ट्री के मालिक मईनुद्दीन कहते हैं कि सड़कें खराब हैं। ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं मिली। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे की स्थिति सबको पता है। रेल मार्ग की दूरी ज्यादा है, इसलिए कच्चा माल लाने और माल बनाने के बाद खपत करना भी महंगा साबित होता है। लोहा उद्यमी मुकेश जैन ने कहा सुविधाएं बढ़ानी होती, तभी यहां पर निवेश संभव है।
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ऐसा है यूपीएसआईडीसी का हाल
बागपत। करीब डेढ़ दशक पहले यूपीएसआईडीसी बागपत के लिए 267.60 एकड जमीन अधिग्रहीत की। इसमें 268 प्लॉट काटे, इनमें से अब तक 221 आवंटित हो चुके हैं। छह प्लाट विवादित है। 41 प्लाट आवंटन के लिए उपलब्ध हैं।
नियम बदले, अच्छे दिनों की उम्मीद बंधी
बागपत। यूपीएसआईडीसी के जेई धीरज मिश्रा बताते हैं कि कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। पहले प्लॉट लेकर उद्यमी यहां पर प्रोडक्शन शुरू नहीं कर रहे थे, लेकिन नया नियम है कि अब प्लॉट लेने के एक साल के अंदर ही प्रोडक्शन शुरू करना होगा। नहीं तो प्लॉट रद कर दिया जाएगा। यही वजह है कि अब काम तेजी से शुरू होने की उम्मीद है।
कितना बदलेंगे हैंडलूम के दिन
बागपत। एक जिला एक उत्पाद में जिले के हैंडलूम को चुना गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि इस योजना से प्रदेश में करीब 20 लाख रोजगार उपलब्ध होंगे। देखने वाली बात यह होगी कि जिले में कितना लाभ होगा। निरपुड़ा जिले में हैंडलूम का केंद्र रहा है। यहां पर कंबल बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर होता था, लेकिन घाटे का सौदा साबित होने पर अधिकतर घरों में हाथ से संचालित होने वाली इकाई यानि खड्डियां बंद हो गई। कंबल बनाने वाले लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा। किसी ने मजदूरी शुरू की तो किसी ने रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। एक जिला एक उत्पाद में हैंडलूम के चयन से फिर से उम्मीद जगी है। हथकरघा सुपरवाइजर बनारसी प्रसाद ने कहा वर्तमान में करीब दो सौ लोग हैंडलूम से जुड़े हैं। इकाइयों को नये सिरे से उठाने के लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी। नया वित्तीय वर्ष में रोजगार मिलेगा।
यहां है हैंडलूम की इकाइयां
बागपत। निरपुड़ा, अमीनगर सराय, अग्रवाल मंडी टटीरी समेत अन्य क्षेत्रों में हैंडलूम इकाइयां है, लेकिन सबसे अधिक इकाई निरपुड़ा में है। अब इन इकाइयों पर पायदान, लोई और बाण बनाए जा रहे हैं। हाथ के बने इन उत्पादों को हरियाणा के पानीपत में बेचा जाता है, या फिर बनाने वाले ही गांव दर गांव इन्हें बेचने के लिए जाते हैं।
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बागपत का संचालन ट्रानिका सिटी से
बागपत। यूपी स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के लिए जिला मुख्यालय पर एरिया घोषित किया । अधिकारियों के लिए भवन का निर्माण भी हुआ, लेकिन अभी भी प्रोजेक्ट मैनेजर और अन्य अधिकारी गाजियाबाद के ट्रानिका सिटी से ही बागपत की योजनाओं का संचालन कर रहे हैं।
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माहौल तो दीजिए, तभी बढ़ेगा निवेश
बागपत। यूपी स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जयपाल सिंह कहते हैं कि माहौल नहीं मिला। जो उद्योग लगाए, उनकी स्थिति सुविधाएं नहीं मिलने के कारण बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। कांटा इंजीनियरिंग फैक्ट्री के मालिक मईनुद्दीन कहते हैं कि सड़कें खराब हैं। ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं मिली। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे की स्थिति सबको पता है। रेल मार्ग की दूरी ज्यादा है, इसलिए कच्चा माल लाने और माल बनाने के बाद खपत करना भी महंगा साबित होता है। लोहा उद्यमी मुकेश जैन ने कहा सुविधाएं बढ़ानी होती, तभी यहां पर निवेश संभव है।
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ऐसा है यूपीएसआईडीसी का हाल
बागपत। करीब डेढ़ दशक पहले यूपीएसआईडीसी बागपत के लिए 267.60 एकड जमीन अधिग्रहीत की। इसमें 268 प्लॉट काटे, इनमें से अब तक 221 आवंटित हो चुके हैं। छह प्लाट विवादित है। 41 प्लाट आवंटन के लिए उपलब्ध हैं।
नियम बदले, अच्छे दिनों की उम्मीद बंधी
बागपत। यूपीएसआईडीसी के जेई धीरज मिश्रा बताते हैं कि कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। पहले प्लॉट लेकर उद्यमी यहां पर प्रोडक्शन शुरू नहीं कर रहे थे, लेकिन नया नियम है कि अब प्लॉट लेने के एक साल के अंदर ही प्रोडक्शन शुरू करना होगा। नहीं तो प्लॉट रद कर दिया जाएगा। यही वजह है कि अब काम तेजी से शुरू होने की उम्मीद है।
कितना बदलेंगे हैंडलूम के दिन
बागपत। एक जिला एक उत्पाद में जिले के हैंडलूम को चुना गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि इस योजना से प्रदेश में करीब 20 लाख रोजगार उपलब्ध होंगे। देखने वाली बात यह होगी कि जिले में कितना लाभ होगा। निरपुड़ा जिले में हैंडलूम का केंद्र रहा है। यहां पर कंबल बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर होता था, लेकिन घाटे का सौदा साबित होने पर अधिकतर घरों में हाथ से संचालित होने वाली इकाई यानि खड्डियां बंद हो गई। कंबल बनाने वाले लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा। किसी ने मजदूरी शुरू की तो किसी ने रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। एक जिला एक उत्पाद में हैंडलूम के चयन से फिर से उम्मीद जगी है। हथकरघा सुपरवाइजर बनारसी प्रसाद ने कहा वर्तमान में करीब दो सौ लोग हैंडलूम से जुड़े हैं। इकाइयों को नये सिरे से उठाने के लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी। नया वित्तीय वर्ष में रोजगार मिलेगा।
यहां है हैंडलूम की इकाइयां
बागपत। निरपुड़ा, अमीनगर सराय, अग्रवाल मंडी टटीरी समेत अन्य क्षेत्रों में हैंडलूम इकाइयां है, लेकिन सबसे अधिक इकाई निरपुड़ा में है। अब इन इकाइयों पर पायदान, लोई और बाण बनाए जा रहे हैं। हाथ के बने इन उत्पादों को हरियाणा के पानीपत में बेचा जाता है, या फिर बनाने वाले ही गांव दर गांव इन्हें बेचने के लिए जाते हैं।