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कैसे होगा इलाज, दवाओं का होने लगा टोटा 16-59-42
Updated Mon, 13 Nov 2017 12:46 AM IST
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बागपत। अनुबंध पूरा होने के बाद दवा कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग को दवाओं की सप्लाई बंद कर दी है। हालत यह है कि बागपत के सरकारी अस्पतालों में दवा की कमी हो गई है। अस्पतालों में कई दवाएं खत्म भी हो गई है। चिकित्सक जुगाड़ करके मरीजों का उपचार कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर, उच्चाधिकारियों को दवा के लिए लगातार रिमाइंडर भेज रहे हैं, लेकिन समस्या का हल होता नजर नहीं आ रहा है।
मौसम बदलने से एक तरफ बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। जुकाम, खासी और बुखार के मरीजों की अस्पतालों में भीड़ लगी है। डेंगू का भी काफी प्रकोप है। डेढ़ दर्जन मरीजों की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में एक हजार से अधिक मरीजों का प्रतिदिन उपचार हो रहा है। ऐसी स्थिति सीएचसी, पीएचसी की है। वहीं दूसरी ओर दवा का टोटा हो गया है। जिला अस्पताल में दो अगस्त से डेंगू की जांच की किट खत्म हो रही है। अन्य बीमारी के जांच के उपकरण खत्म है। इसी तरह औषधि कक्ष में दवाओं की कमी हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते है कि बच्चों को दी जाने वाली खांसी की सिरप खत्म हो गया है। इसी तरह दर्द और अन्य बीमारी की दवा खत्म हो गई है। चिकित्सक जुगाड़ करके मरीजों का इलाज कर रहे हैं। यह सब दवाएं कंपनी और सरकार के बीच होने वाले अनुबंध के चक्कर में हो रहा है। सूत्रों के अनुसार सरकार और दवा कंपनी के बीच एक साल का अनुबंध होता है। पहले सपा सरकार में अनुबंध हुआ था। जो अब खत्म हो गया है। दवा कंपनी ने अनुबंध पूरा होने के बाद दवाई सप्लाई करनी बंद कर दी। इसी कारण अस्पतालों के स्टोर में दवा की कमी हो रही है।
सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा का कहना है कि दवा कंपनी के अनुबंध के कारण सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी हो रही है, लेकिन कोई दवा खत्म नहीं हुई है। अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज का इलाज किया जा रहा है।
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पांच दिन के बजाए तीन
दिन की मिल रही दवा
बागपत। चिकित्सकों का कहना है कि अस्पतालों में दवाओं की कमी होने के कारण फिलहाल मरीजों को तीन दिन की दवा दी जा रही है। इससे पहले मरीजों को पांच दिन की दवा दी जाती थी।
उपचार की सुविधा न होने पर
मरीज किए जाते हैं रेफर
बागपत। डेंगू की जांच किट न होने के कारण मरीजों की जांच नहीं हो पाती है। इसलिए चिकित्सक उनको हायर हॉस्पिटल के लिए रेफर कर देते हैं। इसके अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी डॉक्टर रेफर करते है।
अतिरिक्त बजट से खरीद लेते है दवाई
बागपत। सीएमओ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को दवाओं के लिए कुछ अलग से बजट मिलता है। जो दवा खत्म हो जाती है। उस बजट से उन दवाओं को तुरंत खरीद लिया जाता है। अस्पताल में पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था रहती है।
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मौसम बदलने से एक तरफ बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। जुकाम, खासी और बुखार के मरीजों की अस्पतालों में भीड़ लगी है। डेंगू का भी काफी प्रकोप है। डेढ़ दर्जन मरीजों की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में एक हजार से अधिक मरीजों का प्रतिदिन उपचार हो रहा है। ऐसी स्थिति सीएचसी, पीएचसी की है। वहीं दूसरी ओर दवा का टोटा हो गया है। जिला अस्पताल में दो अगस्त से डेंगू की जांच की किट खत्म हो रही है। अन्य बीमारी के जांच के उपकरण खत्म है। इसी तरह औषधि कक्ष में दवाओं की कमी हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते है कि बच्चों को दी जाने वाली खांसी की सिरप खत्म हो गया है। इसी तरह दर्द और अन्य बीमारी की दवा खत्म हो गई है। चिकित्सक जुगाड़ करके मरीजों का इलाज कर रहे हैं। यह सब दवाएं कंपनी और सरकार के बीच होने वाले अनुबंध के चक्कर में हो रहा है। सूत्रों के अनुसार सरकार और दवा कंपनी के बीच एक साल का अनुबंध होता है। पहले सपा सरकार में अनुबंध हुआ था। जो अब खत्म हो गया है। दवा कंपनी ने अनुबंध पूरा होने के बाद दवाई सप्लाई करनी बंद कर दी। इसी कारण अस्पतालों के स्टोर में दवा की कमी हो रही है।
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सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा का कहना है कि दवा कंपनी के अनुबंध के कारण सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी हो रही है, लेकिन कोई दवा खत्म नहीं हुई है। अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज का इलाज किया जा रहा है।
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पांच दिन के बजाए तीन
दिन की मिल रही दवा
बागपत। चिकित्सकों का कहना है कि अस्पतालों में दवाओं की कमी होने के कारण फिलहाल मरीजों को तीन दिन की दवा दी जा रही है। इससे पहले मरीजों को पांच दिन की दवा दी जाती थी।
उपचार की सुविधा न होने पर
मरीज किए जाते हैं रेफर
बागपत। डेंगू की जांच किट न होने के कारण मरीजों की जांच नहीं हो पाती है। इसलिए चिकित्सक उनको हायर हॉस्पिटल के लिए रेफर कर देते हैं। इसके अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी डॉक्टर रेफर करते है।
अतिरिक्त बजट से खरीद लेते है दवाई
बागपत। सीएमओ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को दवाओं के लिए कुछ अलग से बजट मिलता है। जो दवा खत्म हो जाती है। उस बजट से उन दवाओं को तुरंत खरीद लिया जाता है। अस्पताल में पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था रहती है।