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युनूस बने हनुमान और शेरखान लक्ष्मण
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:31 AM IST
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अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। भगवान श्रीराम की लीला से भाईचारे का संदेश भी दिया जा रहा है। हिंदू और मुसलिम कलाकार मिलकर रामलीला को जीवंत किए हैं। कस्बे में दो सगे भाई इन दिनों आकर्षण का केंद्र बने हैं। मुस्लिम युवक यूनुस हनुमान का रोल निभा रहा है तो शेर खान लीला में लक्ष्मण की भूमिका में है। दोनों करीब एक दशक से रामलीला में अभिनय कर रहे हैं।
श्रीराम लीलाओं के मंच पर भाईचारे की मिसाल भी पेश की जा रही है। टटीरी में कई मुस्लिम परिवार के लोग रामलीला में विभिन्न लीलाओं का मंचन करते है। जिसमें सबसे मुख्य दो सगे भाई यूनुस और शेर खान है। बड़ा भाई जहां 15 साल से विभिन्न मंच पर रोल अदा कर रहे हैं। हनुमान की भूमिका में उन्हें उपलब्धि मिली। वहीं छोटा भाई शेर खान को भी श्रीराम लीला के मंच पर आने का मौका मिला। कमेटी की ओर से उसकी कला को देखकर लक्ष्मण का रोल लिया। उसकी अदाकारी को देखकर दर्शकों के साथ-साथ कमेटी भी गदगद है। दोनों भाई कहते हैं कि वह नियम और संयम से लीला में अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्हें अपने रोल पसंद है और उनका पूरा कस्बा ही भाईचारे का संदेश देता है। दिन में अपने घरेलू कार्य निपटाते हैं और रात में रामलीला के स्टेज पर पहुंच जाते हैं। शुरूआत में दोनों को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया। आलोचनाओं को दरकिनार कर निरंतर मंचन में पहुंच जाते है। रामलीला होते ही दोनों भाइयों के किरदार की चर्चा होनी शुरू हो जाती है।
दिन में रेस्टोरेंट चलाते हैं यूनुस
यूनुस ने बताया उसे बचपन से ही धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने की लालसा रही है। बीएससी करने के बाद उसने महाराणा प्रताप पब्लिक स्कूल में अध्यापक बनकर बच्चों को पढ़ाया। पिता के निधन के बाद अध्यापन कार्य को छोड़कर अपना छोटा सा रेस्टोरेंट को संभलना शुरू कर दिया। उसका भाई भी बीए करके दिल्ली में नौकरी करता है।
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श्रीराम लीलाओं के मंच पर भाईचारे की मिसाल भी पेश की जा रही है। टटीरी में कई मुस्लिम परिवार के लोग रामलीला में विभिन्न लीलाओं का मंचन करते है। जिसमें सबसे मुख्य दो सगे भाई यूनुस और शेर खान है। बड़ा भाई जहां 15 साल से विभिन्न मंच पर रोल अदा कर रहे हैं। हनुमान की भूमिका में उन्हें उपलब्धि मिली। वहीं छोटा भाई शेर खान को भी श्रीराम लीला के मंच पर आने का मौका मिला। कमेटी की ओर से उसकी कला को देखकर लक्ष्मण का रोल लिया। उसकी अदाकारी को देखकर दर्शकों के साथ-साथ कमेटी भी गदगद है। दोनों भाई कहते हैं कि वह नियम और संयम से लीला में अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्हें अपने रोल पसंद है और उनका पूरा कस्बा ही भाईचारे का संदेश देता है। दिन में अपने घरेलू कार्य निपटाते हैं और रात में रामलीला के स्टेज पर पहुंच जाते हैं। शुरूआत में दोनों को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया। आलोचनाओं को दरकिनार कर निरंतर मंचन में पहुंच जाते है। रामलीला होते ही दोनों भाइयों के किरदार की चर्चा होनी शुरू हो जाती है।
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दिन में रेस्टोरेंट चलाते हैं यूनुस
यूनुस ने बताया उसे बचपन से ही धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने की लालसा रही है। बीएससी करने के बाद उसने महाराणा प्रताप पब्लिक स्कूल में अध्यापक बनकर बच्चों को पढ़ाया। पिता के निधन के बाद अध्यापन कार्य को छोड़कर अपना छोटा सा रेस्टोरेंट को संभलना शुरू कर दिया। उसका भाई भी बीए करके दिल्ली में नौकरी करता है।
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