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जीएसटी : नए ढंग से बिलिंग नहीं कर पा रहे कारोबारी

Sat, 08 Jul 2017 01:19 AM IST
Updated Sat, 08 Jul 2017 01:19 AM IST
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जीएसटी : नए ढंग से बिलिंग नहीं कर पा रहे कारोबारी
जीएसटी : नए ढंग से बिलिंग नहीं कर पा रहे कारोबारी
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- न तो पंजीयन की प्रक्रिया पूरी और न ही सही जानकारी

बागपत। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर भले ही जागरूकता शिविर लगाए गए हों। लेकिन अभी तक अधिकतर कारोबारियों के जीएसटी में पंजीयन न होने और अन्य तकनीकी अड़चनों के कारण कागज, कपड़ा, परचून, कास्मेटिक से लेकर अन्य सामानों की खरीद फरोख्त में व्यापारियों को दिक्कतें आ रही हैं। व्यापारी अभी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि किसी माल को खरीदने या बेचने के लिए नए फारमेट में बिलिंग कैसे करें।
कुछ दुकानों पर कागजों के पुराने रिम रखे हैं, लेकिन अधिकतर बड़े ग्राहक खरीद के साथ बिल मांग रहे हैं। लेकिन दुकानदार फिलहाल बिल देने के लिए तैयार नहीं है। इससे कागजों की बिक्री प्रभावित हो गई है। सिर्फ इक्का-दुक्का ग्राहक ही अब कागज खरीद रहे हैं। दुकानदार संजय कुमार का कहना है कि बड़ी संख्या में रिम खरीदने की चाह रखने वाले ग्राहक बिल मांगते हैं, लेकिन उनके पास जीएसटी का भी नंबर नहीं है। इसके लिए जल्द ही नंबर मिल जाएगा। फिलहाल दुकानदारी प्रभावित हो रही है। कपड़ा और कास्मेटिक व्यापारी भी यही कह रहे हैं कि पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने और नियमों के ठीक से समझ में आने के बाद ही सही लेनदेन हो पाएगा।
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उधर, जीएसटी में सर्विस टैक्स में तीन फीसदी बढ़ोतरी से बैंक उपभोक्ताओं पर उसे लागू करने के लिए कुछ बैंक गाइडलाइंस का इंतजार कर रहे हैं। जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक ईश्वर सिंह ने बताया कि सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी हुई है या नहीं इसका मंडल ऑफिस से कोई सर्कुलर नहीं मिला है। जो भी आदेश होगा उसके आधार पर उपभोक्ताओं से सर्विस टैक्स लिया जाएगा।
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एचडीएफसी बैंक प्रबंधक धर्मेश नरवाल ने बताया कि अभी ऑन रिकार्ड कुछ नहीं मिला है। माह के आखिरी सप्ताह में इस तरह का आदेश आने की पूरी संभावना है। सर्विस टैक्स में कुछ न कुछ बढेगा जरूर।

केनरा बैंक के प्रबंधक अरूण कुमार ने बताया कि सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी तो हुई है। अभी तक इस तरह का कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलते ही ग्राहकों पर यह नियम लागू कर दिया जाएगा। सिंडिकेट बैंक के प्रबंधक ओम नारायण सिंह ने बताया कि बैंक की सभी सुविधाओं पर तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हेड क्र्वाटर स्तर से ही उनके सभी सॉफ्टवेयर अपडेट हो गए है। आरटीजीएस हो या एनईएफटी सभी पर सर्विस टैक्स बढ़ेगा।
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