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अनुज सरोहा ने बजाया फिनलैंड तक बागपत का डंका
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बागपत। ककौर कलां गांव के होनहार युवा डॉ. अनुज कुमार सरोहा ने फिनलैंड तक बागपत का डंका बजा दिया है। वर्तमान समय में डॉ. अनुज नेचुरल रिसार्स इंस्टीट्यूट फिनलैंड में सीनियर साइंटिस्ट हैं। केमिकल इंजीनियरिंग से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। इंस्टीट्यूट का दुनियाभर में नाम है।
ककौर कलां गांव के किसान प्रकाशवीर के बेटे अनुज सरोहा की कामयाबी युवाओं के लिए प्रेरणा है। पिछले चार साल से स्लोवानिया, जर्मनी, अमेरिका में कार्य कर चुके अनुज वर्तमान समय में नेचुरल रिसॉर्स इंस्टीट्यूट फिनलैंड में कार्यरत है। उनका शोध जैविक उत्पादों के विषय में है। देश और विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके शोध प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2008 से 2014 तक उन्हें शोध कार्यों के लिए आठ अवार्ड अलग-अलग देशों में दिए गए। बायो मलेशिया 2010 के स्वर्ण पदक से उन्हें क्वालालम्पुर में नवाजा गया था। साथ ही अमरीका में भी सम्मानित किया गया है।
गांव के प्राथमिक स्कूल में की पढ़ाई
बागपत। अनुज सरोहा ने शुरूआती शिक्षा गांव के प्राथमिक स्कूल में ही हासिल की। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा सोनीपत में हासिल की।
निरंतर अभ्यास से मिलती है सफलता : सरोहा
बागपत। ककौर कलां पहुंचे अनुज सरोहा का कहना है कि निरंतर अभ्यास और लगातार मेहनत करने से ही सफलता मिलती है। युवा लक्ष्य निर्धारित कर उसे हासिल करने के लिए मेहनत करें तो कामयाबी जरूर मिलेगी।
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बायो प्लास्टिक और फाइबर बनाने पर शोध
बागपत। डॉ. अनुज सरोहा का कहना है कि लकड़ी से जो केमिकल बनते हैं, उनसे अब प्लास्टिक और बायो फाइबर बनाने पर वह शोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह इन दिनों जैव प्लास्टिक, बहुलक नैनो कंपोजिट जैसे जैव कंपोजिट के विकास पर कार्य कर रहे हैं।
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ककौर कलां गांव के किसान प्रकाशवीर के बेटे अनुज सरोहा की कामयाबी युवाओं के लिए प्रेरणा है। पिछले चार साल से स्लोवानिया, जर्मनी, अमेरिका में कार्य कर चुके अनुज वर्तमान समय में नेचुरल रिसॉर्स इंस्टीट्यूट फिनलैंड में कार्यरत है। उनका शोध जैविक उत्पादों के विषय में है। देश और विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके शोध प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2008 से 2014 तक उन्हें शोध कार्यों के लिए आठ अवार्ड अलग-अलग देशों में दिए गए। बायो मलेशिया 2010 के स्वर्ण पदक से उन्हें क्वालालम्पुर में नवाजा गया था। साथ ही अमरीका में भी सम्मानित किया गया है।
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गांव के प्राथमिक स्कूल में की पढ़ाई
बागपत। अनुज सरोहा ने शुरूआती शिक्षा गांव के प्राथमिक स्कूल में ही हासिल की। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा सोनीपत में हासिल की।
निरंतर अभ्यास से मिलती है सफलता : सरोहा
बागपत। ककौर कलां पहुंचे अनुज सरोहा का कहना है कि निरंतर अभ्यास और लगातार मेहनत करने से ही सफलता मिलती है। युवा लक्ष्य निर्धारित कर उसे हासिल करने के लिए मेहनत करें तो कामयाबी जरूर मिलेगी।
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बायो प्लास्टिक और फाइबर बनाने पर शोध
बागपत। डॉ. अनुज सरोहा का कहना है कि लकड़ी से जो केमिकल बनते हैं, उनसे अब प्लास्टिक और बायो फाइबर बनाने पर वह शोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह इन दिनों जैव प्लास्टिक, बहुलक नैनो कंपोजिट जैसे जैव कंपोजिट के विकास पर कार्य कर रहे हैं।