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पुलिस पर हमले में दो को पांच-पांच साल की सजा
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बागपत।
दोघट थाना क्षेत्र में तीन साल पहले पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने के मामले में दो अभियुक्तों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई। जबकि साक्ष्य न मिलने के कारण एक अभियुक्त को दोष मुक्त कर दिया। एडीजे फास्ट ट्रैक द्वितीय आबिद समीम की कोर्ट में फैसला सुनाया।
एडीजीसी (अपराध) अनुज ढाका ने बताया कि दोघट थाना क्षेत्र में 25 नवंबर 2015 को सूजती-दोघट मार्ग पर तत्कालीन एसआई धर्मेंद्र सिंह संधू, कांस्टेबल नीरज, नरेंद्र, सुनील के साथ गश्त कर रहे थे। चौराहे के पास तीन बदमाशों ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की। पुलिस ने जमीन पर लेटकर जान बचाई । पुलिस ने विकास पुत्र ओमबीर निवासी गांगनौली को तमंचे सहित पकड़ा। जबकि उसके साथी राजीव पुत्र महक सिंह व प्रवीण पुत्र सत्यवीर निवासी गांगनौली 12 बोर की बंदूक छोड़कर भाग निकले थे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ धारा 307 व 34 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया । तीनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
यह मामला एडीजे फास्ट ट्रैक द्वितीय आबिद समीम की कोर्ट में चल रहा था। सोमवार को मामले में सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की तरफ से पांच गवाह पेश किए । अभियुक्त विकास और राजीव पर दोष सिद्ध हुआ। जबकि प्रवीण को साक्ष्य न मिलने पर दोष मुक्त किया। दोनों अभियुक्तों को पांच-पांच साल की कारावास व 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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दोघट थाना क्षेत्र में तीन साल पहले पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने के मामले में दो अभियुक्तों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई। जबकि साक्ष्य न मिलने के कारण एक अभियुक्त को दोष मुक्त कर दिया। एडीजे फास्ट ट्रैक द्वितीय आबिद समीम की कोर्ट में फैसला सुनाया।
एडीजीसी (अपराध) अनुज ढाका ने बताया कि दोघट थाना क्षेत्र में 25 नवंबर 2015 को सूजती-दोघट मार्ग पर तत्कालीन एसआई धर्मेंद्र सिंह संधू, कांस्टेबल नीरज, नरेंद्र, सुनील के साथ गश्त कर रहे थे। चौराहे के पास तीन बदमाशों ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की। पुलिस ने जमीन पर लेटकर जान बचाई । पुलिस ने विकास पुत्र ओमबीर निवासी गांगनौली को तमंचे सहित पकड़ा। जबकि उसके साथी राजीव पुत्र महक सिंह व प्रवीण पुत्र सत्यवीर निवासी गांगनौली 12 बोर की बंदूक छोड़कर भाग निकले थे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ धारा 307 व 34 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया । तीनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
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यह मामला एडीजे फास्ट ट्रैक द्वितीय आबिद समीम की कोर्ट में चल रहा था। सोमवार को मामले में सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की तरफ से पांच गवाह पेश किए । अभियुक्त विकास और राजीव पर दोष सिद्ध हुआ। जबकि प्रवीण को साक्ष्य न मिलने पर दोष मुक्त किया। दोनों अभियुक्तों को पांच-पांच साल की कारावास व 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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