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मंत्रोच्चारण के साथ 366 अर्घ्य चढ़ाए
Updated Sat, 19 May 2018 12:26 AM IST
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मंत्रोच्चारण के साथ 366 अर्घ्य चढ़ाए
बिनौली। बरनावा के ज्ञान सागर गुरुकुल परिसर में चल रहे सुव्रतोनाथ महामंडल विधान के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के साथ 366 अर्घ्य चढ़ाए। कार्यक्रम में जैन संत एलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज ने दिगंबर जैन दर्शन को मानव कल्याण का दर्शन बताया।
विधानाचार्य बह्मचारी संतोष भैय्या के निर्देशन में सुबह नित्य नियम पूजन और भगवान के अभिषेक के उपरांत विधान की पूजा शुरू हुई। इस दौरान पूर्व पुष्करार्द्ध भूतकालीन तीर्थंकर, वर्तमान तीर्थंकर, भावी तीर्थंकर, विदेह क्षेत्र, नवदेवता, विधुन माली मेरु, पुष्कर वृक्ष शालमाली वृक्ष जिनालय, भरत क्षेत्र भूतकालीन, पश्चिम पर्वत, भरत क्षेत्र वर्तमान तीर्थंकर, भविष्यकालीन तीर्थंकर, पश्चिमी दीप भूतकालीन सहित 15 पूजा प्रक्रियाएं संपन्न हुईं। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से मंत्रोच्चारण के साथ 366 अर्घ्य चढ़ाए।
इस अवसर पर जैन संत प्रभावना भूषण महाराज ने कहा कि जैन दर्शन से ही मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। सत्य अहिंसा और संयम को जीवन में धारण करने वाले मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। भक्ति संध्या में भक्ति से ओतप्रोत भजनों की गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने श्रृंखला प्रस्तुत की। ब्रह्मचारी अतुल भैय्या ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में राजभूषण जैन, बालेश जैन, अंकुर जैन, विशाल जैन, ममता जैन, राकेश जैन, उज्ज्वल जैन, श्रवण जैन, गौतमचंद जैन, संकल्प जैन, विकास जैन, मनोज जैन, लोकेश जैन, वीरेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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बिनौली। बरनावा के ज्ञान सागर गुरुकुल परिसर में चल रहे सुव्रतोनाथ महामंडल विधान के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के साथ 366 अर्घ्य चढ़ाए। कार्यक्रम में जैन संत एलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज ने दिगंबर जैन दर्शन को मानव कल्याण का दर्शन बताया।
विधानाचार्य बह्मचारी संतोष भैय्या के निर्देशन में सुबह नित्य नियम पूजन और भगवान के अभिषेक के उपरांत विधान की पूजा शुरू हुई। इस दौरान पूर्व पुष्करार्द्ध भूतकालीन तीर्थंकर, वर्तमान तीर्थंकर, भावी तीर्थंकर, विदेह क्षेत्र, नवदेवता, विधुन माली मेरु, पुष्कर वृक्ष शालमाली वृक्ष जिनालय, भरत क्षेत्र भूतकालीन, पश्चिम पर्वत, भरत क्षेत्र वर्तमान तीर्थंकर, भविष्यकालीन तीर्थंकर, पश्चिमी दीप भूतकालीन सहित 15 पूजा प्रक्रियाएं संपन्न हुईं। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से मंत्रोच्चारण के साथ 366 अर्घ्य चढ़ाए।
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इस अवसर पर जैन संत प्रभावना भूषण महाराज ने कहा कि जैन दर्शन से ही मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। सत्य अहिंसा और संयम को जीवन में धारण करने वाले मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। भक्ति संध्या में भक्ति से ओतप्रोत भजनों की गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने श्रृंखला प्रस्तुत की। ब्रह्मचारी अतुल भैय्या ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में राजभूषण जैन, बालेश जैन, अंकुर जैन, विशाल जैन, ममता जैन, राकेश जैन, उज्ज्वल जैन, श्रवण जैन, गौतमचंद जैन, संकल्प जैन, विकास जैन, मनोज जैन, लोकेश जैन, वीरेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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