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जिले में ढाई माह में 645 क्षय रोगी मिले
Updated Sat, 24 Mar 2018 12:47 AM IST
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जिले में ढाई माह में 645 क्षय रोगी मिले
बागपत। जिले में टीबी (क्षय रोग) के मरीजों की संख्या बढ़ी है। पिछले ढाई माह में ही स्वास्थ्य विभाग ने 372 मरीजों का पंजीकरण कर उपचार शुरू किया है। यही नहीं 273 ऐसे मरीज भी हैं जो प्राइवेट डॉक्टरों के यहां पंजीकृत किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बड़ौत और जिला जेल को हाई रिस्क एरिया घोषित करते हुए सर्वे अभियान चलाया। इसमें करीब 35 मरीज टीबी के मिले थे। जिले में 2018 के जनवरी, फरवरी और 15 मार्च तक ही 373 मरीजों का चयन करते हुए विभाग की साइट पर पंजीकृत किए गए हैं। इनका उपचार शुरू कर दिया गया है। प्राइवेट चिकित्सकों के यहां इसी समय में 273 मरीजों ने अपना पंजीकरण कराया। इनका उपचार प्राइवेट डॉक्टर कर रहे हैं। सभी मरीजों का रिकॉर्ड डॉक्टर के क्लीनिक और फार्मेसिस्ट की दुकानों पर मेंटेन किया जा रहा है।
बता दें कि वर्ष 2017 में टीबी के मरीजों की संख्या 2066 थी। इनमें प्राइवेट डॉक्टरों के यहां 134 मरीज पंजीकृत हुए थे। स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे टीबी के मरीजों के आंकड़े जुटना शुरू कर दिया है जो जिले के बाहर अपना उपचार करा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश ने बताया कि टीबी के मरीजों का उपचार प्राथमिकता से किया जा रहा है। जिले को टीबी मुक्त करने की शासन की प्राथमिकता है। मरीजों की पहचान करने के लिए ऐसी व्यवस्था की गई जो मरीजों को टीबी की पुष्टि होने पर उस पर शुरूआत में 1500 रुपये खर्च किया जाएगा। एक हजार रुपये उन पर जो मरीज को लेकर आएगा और 500 रुपये में खाने-पीने में खर्च किया जाएगा। इसके लिए अप्रैल माह में बजट जारी होने की संभावना है।
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ये हैं टीबी रोग के लक्षण
- लगातार तीन सप्ताह तक खांसी आना और लगातार जारी रहना।
- खांसी के साथ खून का आना।
- छाती में दर्द और सांस का फूलना।
- लगातार वजन कम होना और ज्यादा थकान महसूस होना
- शाम को बुखार आना और ठंड लगना
- रात में पसीना आना
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तीन श्रेणियों में होता है टीबी मरीजों का उपचार
- जिला समन्वयक मनीष पांडेय ने बताया कि टीबी के मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन श्रेणियां निर्धारित की हैं। प्रथम श्रेणी में टीबी के शुरूआती लक्षण देखने के बाद तीन से छह माह का उपचार दिया जाता है। दूसरी श्रेणी में छह से 12 माह तक उपचार किया जाता है। तीसरी श्रेणी अधिक गंभीर होती है। यह एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस) की श्रेणी है। इसके मरीजों का उपचार 24 से 27 माह तक चलता है। इन मरीजों का उपचार अब जिला स्तर पर ही होगा। अब जिला स्तर पर डीआरबी (ड्रग रेसिस्टेंस टीबी) सेंटर खुलेगा। एमडीआर मरीजों को परेशानी नहीं होगी।
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प्राइवेट चिकित्सक ने रिपोर्ट नहीं दी तो होगी कार्रवाई
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश ने बताया कि प्राइवेट क्लीनिकों के डॉक्टरों ने टीबी के मरीजों की रिपोर्ट देने में आनाकानी की तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 269 और 270 के तहत कार्रवाई होगी और जुर्माने का लगेगा।
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प्रक्रिया पूरी करने के बाद होता है उपचार
टीबी के मरीजों का प्राइवेट चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक भी अपने स्तर से पंजीकरण करते हैं। मरीज के सभी दस्तावेज अपने पास रखते हैं। सभी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मरीजों को दवा दी जाती है। यह ही प्रक्रिया चिकित्सकों को करनी होती है।
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बागपत। जिले में टीबी (क्षय रोग) के मरीजों की संख्या बढ़ी है। पिछले ढाई माह में ही स्वास्थ्य विभाग ने 372 मरीजों का पंजीकरण कर उपचार शुरू किया है। यही नहीं 273 ऐसे मरीज भी हैं जो प्राइवेट डॉक्टरों के यहां पंजीकृत किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बड़ौत और जिला जेल को हाई रिस्क एरिया घोषित करते हुए सर्वे अभियान चलाया। इसमें करीब 35 मरीज टीबी के मिले थे। जिले में 2018 के जनवरी, फरवरी और 15 मार्च तक ही 373 मरीजों का चयन करते हुए विभाग की साइट पर पंजीकृत किए गए हैं। इनका उपचार शुरू कर दिया गया है। प्राइवेट चिकित्सकों के यहां इसी समय में 273 मरीजों ने अपना पंजीकरण कराया। इनका उपचार प्राइवेट डॉक्टर कर रहे हैं। सभी मरीजों का रिकॉर्ड डॉक्टर के क्लीनिक और फार्मेसिस्ट की दुकानों पर मेंटेन किया जा रहा है।
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बता दें कि वर्ष 2017 में टीबी के मरीजों की संख्या 2066 थी। इनमें प्राइवेट डॉक्टरों के यहां 134 मरीज पंजीकृत हुए थे। स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे टीबी के मरीजों के आंकड़े जुटना शुरू कर दिया है जो जिले के बाहर अपना उपचार करा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश ने बताया कि टीबी के मरीजों का उपचार प्राथमिकता से किया जा रहा है। जिले को टीबी मुक्त करने की शासन की प्राथमिकता है। मरीजों की पहचान करने के लिए ऐसी व्यवस्था की गई जो मरीजों को टीबी की पुष्टि होने पर उस पर शुरूआत में 1500 रुपये खर्च किया जाएगा। एक हजार रुपये उन पर जो मरीज को लेकर आएगा और 500 रुपये में खाने-पीने में खर्च किया जाएगा। इसके लिए अप्रैल माह में बजट जारी होने की संभावना है।
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ये हैं टीबी रोग के लक्षण
- लगातार तीन सप्ताह तक खांसी आना और लगातार जारी रहना।
- खांसी के साथ खून का आना।
- छाती में दर्द और सांस का फूलना।
- लगातार वजन कम होना और ज्यादा थकान महसूस होना
- शाम को बुखार आना और ठंड लगना
- रात में पसीना आना
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तीन श्रेणियों में होता है टीबी मरीजों का उपचार
- जिला समन्वयक मनीष पांडेय ने बताया कि टीबी के मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन श्रेणियां निर्धारित की हैं। प्रथम श्रेणी में टीबी के शुरूआती लक्षण देखने के बाद तीन से छह माह का उपचार दिया जाता है। दूसरी श्रेणी में छह से 12 माह तक उपचार किया जाता है। तीसरी श्रेणी अधिक गंभीर होती है। यह एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस) की श्रेणी है। इसके मरीजों का उपचार 24 से 27 माह तक चलता है। इन मरीजों का उपचार अब जिला स्तर पर ही होगा। अब जिला स्तर पर डीआरबी (ड्रग रेसिस्टेंस टीबी) सेंटर खुलेगा। एमडीआर मरीजों को परेशानी नहीं होगी।
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प्राइवेट चिकित्सक ने रिपोर्ट नहीं दी तो होगी कार्रवाई
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश ने बताया कि प्राइवेट क्लीनिकों के डॉक्टरों ने टीबी के मरीजों की रिपोर्ट देने में आनाकानी की तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 269 और 270 के तहत कार्रवाई होगी और जुर्माने का लगेगा।
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प्रक्रिया पूरी करने के बाद होता है उपचार
टीबी के मरीजों का प्राइवेट चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक भी अपने स्तर से पंजीकरण करते हैं। मरीज के सभी दस्तावेज अपने पास रखते हैं। सभी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मरीजों को दवा दी जाती है। यह ही प्रक्रिया चिकित्सकों को करनी होती है।