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आरक्षण के जहर ने देश को कर दिया बर्बाद, बांटा जाए चार श्रेणियों में
Updated Mon, 01 Jan 2018 01:21 AM IST
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बागपत। विश्वकर्मा एकता विकास सभा के डौला कार्यालय में सर्व समाज की बैठक हुई। इसमें मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को लोगों ने देश के लिए खतरा बताया। हर समाज का व्यक्ति पिछड़ता जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट मनीष विश्वकर्मा ने कहा कि मौजूद आरक्षण व्यवस्था देश के लिए खतरा बन गई है। जाति धर्म में देश बंट रहा है। जातिगत आरक्षण व्यवस्था के कारण हम पिछड़ रहे। देश की तरक्की के लिए इस जातिगत आरक्षण व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए। इसमें एक श्रेणी आर्थिक आधार, दूसरी दिव्यांग, तीसरी अनाथ और चौथी शहीदों के बच्चों है। संजय चौधरी ने कहा कि देश में चल रही आरक्षण व्यवस्था खतरनाक है देश का उद्धार तभी संभव है जब आरक्षण का लाभ पात्रता व योग्यता के आधार पर मिले। सुभाष राणा ने कहा कि आज आरक्षण के नाम पर आंदोलन हो रहे हैं। इस कारण काबिल लोग भी उनके पीछे जा रहे हैं और वे लोग आगे आ रहे हैं जो पूरी तरह कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे। जातिगत आरक्षण व्यवस्था के कारण जाती और धर्म आगे आ गए और काबलियत दम तोड़ गई। देश को आजादी दिलाने में सभी जाति धर्म के लोगों ने योगदान किया किंतु कुछ स्वार्थी नेताओं ने देश की सत्ता पर काबिज होते ही गरीब बेरोजगारों को अपना गुलाम बना लिया। इसमें विनोद विश्वकर्मा, प्रदीप विश्वकर्मा, दिनेश राणा, सौरभ कश्यप, राजन कुमार, बाबू, रमेश, विक्रम सिंह, कवल सिंह, संदीप पांचाल, जयसिंह, रमेश चंद, महेश, अनिल दिवाकर, मोहन, दीपक पांचाल, विक्रांत विश्वकर्मा, रोहित विश्वकर्मा, राजीव विश्वकर्मा, रामेंद्र सिंह आदि रहे।
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प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट मनीष विश्वकर्मा ने कहा कि मौजूद आरक्षण व्यवस्था देश के लिए खतरा बन गई है। जाति धर्म में देश बंट रहा है। जातिगत आरक्षण व्यवस्था के कारण हम पिछड़ रहे। देश की तरक्की के लिए इस जातिगत आरक्षण व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए। इसमें एक श्रेणी आर्थिक आधार, दूसरी दिव्यांग, तीसरी अनाथ और चौथी शहीदों के बच्चों है। संजय चौधरी ने कहा कि देश में चल रही आरक्षण व्यवस्था खतरनाक है देश का उद्धार तभी संभव है जब आरक्षण का लाभ पात्रता व योग्यता के आधार पर मिले। सुभाष राणा ने कहा कि आज आरक्षण के नाम पर आंदोलन हो रहे हैं। इस कारण काबिल लोग भी उनके पीछे जा रहे हैं और वे लोग आगे आ रहे हैं जो पूरी तरह कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे। जातिगत आरक्षण व्यवस्था के कारण जाती और धर्म आगे आ गए और काबलियत दम तोड़ गई। देश को आजादी दिलाने में सभी जाति धर्म के लोगों ने योगदान किया किंतु कुछ स्वार्थी नेताओं ने देश की सत्ता पर काबिज होते ही गरीब बेरोजगारों को अपना गुलाम बना लिया। इसमें विनोद विश्वकर्मा, प्रदीप विश्वकर्मा, दिनेश राणा, सौरभ कश्यप, राजन कुमार, बाबू, रमेश, विक्रम सिंह, कवल सिंह, संदीप पांचाल, जयसिंह, रमेश चंद, महेश, अनिल दिवाकर, मोहन, दीपक पांचाल, विक्रांत विश्वकर्मा, रोहित विश्वकर्मा, राजीव विश्वकर्मा, रामेंद्र सिंह आदि रहे।
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