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बुखार का प्रकोप जारी, कब मिलेगी डेंगू किट
Updated Thu, 09 Nov 2017 12:58 AM IST
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बागपत। बुखार का प्रकोप रुकने का नाम नहीं ले रहा है। देहात और शहरी क्षेत्र में बुखार फैल रहा है। अभी तक एक दर्जन से अधिक लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में पिछले छह दिन से डेंगू की जांच किट खत्म है, लेकिन जांच किट नहीं पहुंची है। वहीं स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि बुखार से कोई मौत नहीं हुई है।
जनपद में बुखार कहर बनकर टूट रहा है। गांव, कस्बा और शहरी क्षेत्र में महिला, पुरुष और बच्चे बुखार से ग्रस्त हो रहे हैं। इस कारण सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल में मरीजों की लाइन लगी रहती है। डेंगू से ग्रस्त मरीजों के इलाज की व्यवस्था न होने के कारण उनको जिला अस्पताल से तुरंत रेफर कर दिया जाता है। काफी संख्या में मरीज दिल्ली और मेरठ के अस्पतालों में भर्ती हो रहे है। पिछले छह दिनों से डेंगू की जांच किट जिला अस्पताल में खत्म हो रही है। इस कारण अब यहां पर डेंगू की जांच भी नहीं हो पा रही है। बुखार से एक दर्जन से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। अकेले रटौल गांव में पांच की जान जा चुकी है। इसके अलावा तेड़ा, फौलादनगर, निरपुड़ा, तमेला गढ़ी और दाहा में बुखार से मौत हो चुकी है। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा का कहना है कि वायरल फीवर के अस्पताल में मरीज आ रहे हैं। इक्का-दुक्का मरीज डेंगू से ग्रस्त आ रहा है। अभी तक किसी की भी बुखार से मौत नहीं हुई है।
स्वास्थ्य कैंप न लगने पर रटौल में लोगों का प्रदर्शन
चांदीनगर। रटौल के ग्रामीणों ने गांव में स्वास्थ्य कैंप न लगने पर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा गांव में बुखार से पांच लोगों की जान जा चुकी है। अभी भी काफी मरीज बुखार से ग्रस्त है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूटी है। मच्छरों के प्रकोप को खत्म करने के लिए नालियों में कीटनाशक दवाई का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। मरीज झोलाछाप चिकित्सक से अपना इलाज कराने को मजबूर हैं। प्रदर्शन करने वालों में साजिद, पंकज, वकील संजय, नोशाद, सुहैब, नन्हे, अनीस, यूसुफ, इकरामुद्दीन, सुनील, साहिल, राजकुमार, तंजीम, पवन, नूर हसन, राजू आदि रहे।
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जनपद में बुखार कहर बनकर टूट रहा है। गांव, कस्बा और शहरी क्षेत्र में महिला, पुरुष और बच्चे बुखार से ग्रस्त हो रहे हैं। इस कारण सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल में मरीजों की लाइन लगी रहती है। डेंगू से ग्रस्त मरीजों के इलाज की व्यवस्था न होने के कारण उनको जिला अस्पताल से तुरंत रेफर कर दिया जाता है। काफी संख्या में मरीज दिल्ली और मेरठ के अस्पतालों में भर्ती हो रहे है। पिछले छह दिनों से डेंगू की जांच किट जिला अस्पताल में खत्म हो रही है। इस कारण अब यहां पर डेंगू की जांच भी नहीं हो पा रही है। बुखार से एक दर्जन से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। अकेले रटौल गांव में पांच की जान जा चुकी है। इसके अलावा तेड़ा, फौलादनगर, निरपुड़ा, तमेला गढ़ी और दाहा में बुखार से मौत हो चुकी है। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा का कहना है कि वायरल फीवर के अस्पताल में मरीज आ रहे हैं। इक्का-दुक्का मरीज डेंगू से ग्रस्त आ रहा है। अभी तक किसी की भी बुखार से मौत नहीं हुई है।
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स्वास्थ्य कैंप न लगने पर रटौल में लोगों का प्रदर्शन
चांदीनगर। रटौल के ग्रामीणों ने गांव में स्वास्थ्य कैंप न लगने पर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा गांव में बुखार से पांच लोगों की जान जा चुकी है। अभी भी काफी मरीज बुखार से ग्रस्त है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूटी है। मच्छरों के प्रकोप को खत्म करने के लिए नालियों में कीटनाशक दवाई का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। मरीज झोलाछाप चिकित्सक से अपना इलाज कराने को मजबूर हैं। प्रदर्शन करने वालों में साजिद, पंकज, वकील संजय, नोशाद, सुहैब, नन्हे, अनीस, यूसुफ, इकरामुद्दीन, सुनील, साहिल, राजकुमार, तंजीम, पवन, नूर हसन, राजू आदि रहे।
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