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अजितनाथ भगवान की रथ यात्रा धूमधाम से निकाली
Updated Thu, 07 Sep 2017 01:27 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
अजित नाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सहसंघ सानिध्य में अजित नाथ भगवान की विशाल स्वर्ण गज रथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई।
स्वर्ण गज रथ यात्रा अजित नाथ मंदिर से शुरू होकर कैनाल रोड, गांधी रोड, अतिथि भवन, महावीर मार्ग होते हुए दिगंबर जैन इंटर कॉलेज पांडुकशिला मैदान पहुंची। रथ यात्रा में दर्जनों बैंड धार्मिक धुन बजाते चले। वहीं सुंदर धार्मिक झांकियां, नफीरी, ताशा पार्टी, भजन मंडली आदि भी शोभा बढ़ा रहे । रास्ते में जगह-जगह धार्मिक संस्थाओं, जैन मिल, विमर्श जागृति मंच, जैन वीर हर्ष ग्रुप, स्याद्वाद संगीत मंडल आदि ने प्रभावना वितरित की । शोभायात्रा के साथ आचार्य सुंदर सागर महाराज और श्रद्धालु जय-जयकार करते चले। सबसे पीछे स्वर्ण गज रथ पर अजित नाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान रही। इनकी जगह-जगह पूजा अर्चना की । पांडुकशिला मैदान में पीत वस्त्र धारी इंद्रों द्वारा अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का गरम प्राक्षुक जल से अभिषेक किया और पांडुकशिला मैदान में भव्य मेले का भी आयोजन किया । यात्रा से पूर्व बोलियों का कार्यक्रम हुआ। इसमें सारथी बनने का सौभाग्य शशि जैन, अमित जैन, खलासी का सौभाग्य भोपाल सिंह जैन, कुबेर का सौभाग्य महेंद्र कुमार, प्रदीप जैन, सतीश चंद, प्रिंस जैन, चंवर ढुलावन का सौभाग्य राय चंद, राज कुमार जैन, नाहर सिंह, प्रवीन जैन को प्राप्त हुआ। धर्म ध्वजा लेकर चलने का सौभाग्य सुधीर जैन को प्राप्त हुआ। रथयात्रा महोत्सव में आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा भगवान की रथयात्रा में जो भी बंधु अपना सहयोग देते हैं, वास्तव में वे अत्यंत पुण्यशाली है। इसमें मदन लाल जैन, प्रमोद जैन, अशोक जैन, अरिदमन जैन, आशीष जैन, मुकेश जैन, संदीप जैन, संजय जैन, वरदान जैन, नीरज जैन, आदीश जैन, अखिलेश जैन, बालकिशन जैन, अतुल जैन आदि रहे।
क्षमा वाणी पर्व पर जुलूस निकाला
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के समापन पर जैन मुनि अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में जैन बड़ा मंदिर में चल रहे 13 दीप महामंडल विधान में भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक किया । इसके बाद श्रद्धालुओं ने नित्य नियम की पूजा की। इनमें सोलहकरण पूजा, क्षमा वाणी पर्व की पूजा भक्ति भाव से की। विधानाचार्य पंडित अमर चंद जैन शास्त्री तथा प्रेम प्रकाश एंड पार्टी के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने नृत्य किए। विधान के समापन के बाद विश्व शांति एवं समाज की खुशहाली तथा अपने कर्मों का क्षय करने के लिए शांति यज्ञ किया। वहीं नगर में क्षमा वाणी पर्व बड़े उल्लास व श्रद्धा के साथ जैन अनुयायियों ने मनाया। इस दिन उन्होंने एक-दूसरे से वर्ष भर में की गई गलतियों के लिए क्षमा याचना की। इसके बाद क्षमा वाणी पर्व का जुलूस नगर के छोटा जैन मंदिर से शुरू होकर मुख्य मार्गों से होता हुआ बड़ा जैन मंदिर पहुंचा। वहां भगवान का अभिषेक किया। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, शील चंद जैन, पवन जैन, सुभाषचंद जैन, अतुल कुमार, प्रदीप जैन, विपुल जैन, सतीश जैन, सुरेंद्र जैन, सुशील जैन, रमेश जैन, आनंद जैन आदि रहे।
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क्षमा कहीं भी मांगी जा सकती है
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के समापन पर क्षमा वाणी पर्व पर बोलते हुए अनुमान सागर महाराज ने कहा क्षमा किसी से कहीं भी मांगी जा सकती है। यदि हमने क्रोध किया है, या किसी का दिल दुखाया है तो उसे दूसरों के प्रति तुरंत क्षमा मांग लेनी चाहिए। क्षमा मांगना बहुत आसान है, लेकिन किसी को क्षमा कर देना बहुत ही कठिन है। जब हमारे अंतर मन में पीड़ा होती है तो उसको दूर करने के लिए क्षमा मांगते हैं।
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अजित नाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सहसंघ सानिध्य में अजित नाथ भगवान की विशाल स्वर्ण गज रथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई।
स्वर्ण गज रथ यात्रा अजित नाथ मंदिर से शुरू होकर कैनाल रोड, गांधी रोड, अतिथि भवन, महावीर मार्ग होते हुए दिगंबर जैन इंटर कॉलेज पांडुकशिला मैदान पहुंची। रथ यात्रा में दर्जनों बैंड धार्मिक धुन बजाते चले। वहीं सुंदर धार्मिक झांकियां, नफीरी, ताशा पार्टी, भजन मंडली आदि भी शोभा बढ़ा रहे । रास्ते में जगह-जगह धार्मिक संस्थाओं, जैन मिल, विमर्श जागृति मंच, जैन वीर हर्ष ग्रुप, स्याद्वाद संगीत मंडल आदि ने प्रभावना वितरित की । शोभायात्रा के साथ आचार्य सुंदर सागर महाराज और श्रद्धालु जय-जयकार करते चले। सबसे पीछे स्वर्ण गज रथ पर अजित नाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान रही। इनकी जगह-जगह पूजा अर्चना की । पांडुकशिला मैदान में पीत वस्त्र धारी इंद्रों द्वारा अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का गरम प्राक्षुक जल से अभिषेक किया और पांडुकशिला मैदान में भव्य मेले का भी आयोजन किया । यात्रा से पूर्व बोलियों का कार्यक्रम हुआ। इसमें सारथी बनने का सौभाग्य शशि जैन, अमित जैन, खलासी का सौभाग्य भोपाल सिंह जैन, कुबेर का सौभाग्य महेंद्र कुमार, प्रदीप जैन, सतीश चंद, प्रिंस जैन, चंवर ढुलावन का सौभाग्य राय चंद, राज कुमार जैन, नाहर सिंह, प्रवीन जैन को प्राप्त हुआ। धर्म ध्वजा लेकर चलने का सौभाग्य सुधीर जैन को प्राप्त हुआ। रथयात्रा महोत्सव में आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा भगवान की रथयात्रा में जो भी बंधु अपना सहयोग देते हैं, वास्तव में वे अत्यंत पुण्यशाली है। इसमें मदन लाल जैन, प्रमोद जैन, अशोक जैन, अरिदमन जैन, आशीष जैन, मुकेश जैन, संदीप जैन, संजय जैन, वरदान जैन, नीरज जैन, आदीश जैन, अखिलेश जैन, बालकिशन जैन, अतुल जैन आदि रहे।
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क्षमा वाणी पर्व पर जुलूस निकाला
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के समापन पर जैन मुनि अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में जैन बड़ा मंदिर में चल रहे 13 दीप महामंडल विधान में भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक किया । इसके बाद श्रद्धालुओं ने नित्य नियम की पूजा की। इनमें सोलहकरण पूजा, क्षमा वाणी पर्व की पूजा भक्ति भाव से की। विधानाचार्य पंडित अमर चंद जैन शास्त्री तथा प्रेम प्रकाश एंड पार्टी के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने नृत्य किए। विधान के समापन के बाद विश्व शांति एवं समाज की खुशहाली तथा अपने कर्मों का क्षय करने के लिए शांति यज्ञ किया। वहीं नगर में क्षमा वाणी पर्व बड़े उल्लास व श्रद्धा के साथ जैन अनुयायियों ने मनाया। इस दिन उन्होंने एक-दूसरे से वर्ष भर में की गई गलतियों के लिए क्षमा याचना की। इसके बाद क्षमा वाणी पर्व का जुलूस नगर के छोटा जैन मंदिर से शुरू होकर मुख्य मार्गों से होता हुआ बड़ा जैन मंदिर पहुंचा। वहां भगवान का अभिषेक किया। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, शील चंद जैन, पवन जैन, सुभाषचंद जैन, अतुल कुमार, प्रदीप जैन, विपुल जैन, सतीश जैन, सुरेंद्र जैन, सुशील जैन, रमेश जैन, आनंद जैन आदि रहे।
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क्षमा कहीं भी मांगी जा सकती है
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के समापन पर क्षमा वाणी पर्व पर बोलते हुए अनुमान सागर महाराज ने कहा क्षमा किसी से कहीं भी मांगी जा सकती है। यदि हमने क्रोध किया है, या किसी का दिल दुखाया है तो उसे दूसरों के प्रति तुरंत क्षमा मांग लेनी चाहिए। क्षमा मांगना बहुत आसान है, लेकिन किसी को क्षमा कर देना बहुत ही कठिन है। जब हमारे अंतर मन में पीड़ा होती है तो उसको दूर करने के लिए क्षमा मांगते हैं।