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स्वाइन फ्लू से सावधानी जरूरी

Tue, 22 Aug 2017 01:04 AM IST
Updated Tue, 22 Aug 2017 01:04 AM IST
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स्वाइन फ्लू से सावधानी जरूरी
बागपत।
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जुकाम और बुखार के साथ गले में खराश हो तो ये स्वॉइन फ्लू के शुरुआती लक्षण हैं। हालांकि शुरूआती लक्षणों से कोई चिंता की बात नहीं है, लेकिन ज्यादा दिनों तक फीवर और जुकाम रहे तो यह जानलेवा हो सकता है।
मौसम के बदलने से बीमारियों की जकड़ में लोग आ जाते है। यदि जुकाम के साथ बुखार और गले में खराश हो जाए तो यह लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि यह लक्षण स्वॉइन फ्लू के हैं। यदि यह रोग जल्द से ठीक नहीं हो रहा है तो तुरंत अच्छे चिकित्सक से इलाज कराएं। डॉक्टरों की सलाह के बिना किसी भी दवा का सेवन करना जानलेवा साबित हो सकता है। घर में या आस पड़ोस में इस तरह का रोगी है तो उससे दूरी बनाए रखें, क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति जल्द इसकी चपेट में आ सकता है।
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निवाड़ा में स्वाइन फ्लू का केस मिलने से डॉक्टरों की भी चिंता बढ़ी हुई। सीएचसी बागपत के चिकित्साधिकारी डॉ. विकास कुमार ने बताया स्वॉइन फ्लू की तीन श्रेणी हैं। पहली श्रेणी में गला खराब और हल्का बुखार, दूसरी श्रेणी में गला खराश और बुखार के साथ खराश है। तृतीय श्रेणी जानलेवा है। इसमें तेज बुखार, गले में दर्द, आंख और नाक से पानी आना, बदन दर्द प्रमुख लक्षण हैं। इसमें व्यक्ति की जान जाने का खतरा है। यह बुखार सात से दस दिन तक रहता है। पहली और दूसरी श्रेणी में इस पर काबू पा लिया जाता है। अभी तक जिले में स्वॉइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है।
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टैमी फ्लू दवा है कारगर
डॉ. विकास कुमार ने बताया स्वॉइन फ्लू के लक्षण नजर आने पर टैमी फ्लू की दवा दी जाती है, इसके सेवन करने से मरीज को बीमारी से आराम मिल जाता है। वैसे किसी भी बीमारी में बिना चिकित्सक की सलाह के दवा न ली जाए।


क्या न करें
चिकन-मटन का सेवन न करें।
पक्षियों से भी दूरी बनाए रखें।
आवारा पशुओं से यह रोग फैलता है उनके पास न जाएं।
शरीर की इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) कम न होने दें।
डॉक्टर की सलाह के बना दवा न लें।

बुखार होते ही मरीज में स्वॉइन फ्लू की दहशत
जिले में बुखार के मरीजों में स्वॉइन फ्लू को लेकर दहशत का माहौल है। हल्का बुखार होने पर भी मरीज जिला अस्पताल में या निजी चिकित्सकों के पास स्वॉइन फ्लू की जांच के लिए पहुंच रहे हैं। जांच कराने के बाद स्वॉइन फ्लू की पुष्टि न होने पर ही उन्हें तसल्ली हो रही है।
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