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रक्त भले ही बह जाए सारा ध्वज नहीं झूकने देंगे
Updated Sun, 23 Jul 2017 11:59 PM IST
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रक्त भले ही बह जाए सारा ध्वज नहीं झुकने देंगे
बड़ौत (बागपत)। आजाद नगर में सभासद प्रमेंद्र चौधरी के आवास पर लोक साहित्य संस्कृति समिति बड़ौत के तत्वावधान में कवि स्वर्गीय भानू तपन की स्मृति में श्रद्धांजलि स्वरूप काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें उनकी कविताओं, गजलों, उपन्यास आदि पर विशेष चर्चा की गई।
कवियों ने कविताओं के माध्यम से अपने शब्द-पुष्प अर्पित किए। कवि डॉ. निखिल देव चौहान ने कहा कि वो जुदा ऐसे हुआ कि खुद सा मुझको कर गया, कर रहा हूं काम सब उसकी अदा में आजकल। कवि विनीत मित्तल ने कहा कि सर फक्र से उठ जाए ऐसा मुकाम बना दो मोदी जी, रावण का वध करने के लिए कोई राम बना दो मोदी जी। भूपेंद्र शर्मा एडवोकेट ने कहा कि शीश भले कट जाए धड़ से, धर्म नहीं मिटने देंगे, रक्त भले बह जाए सारा, ध्वज नहीं झुकने देंगे। अनिल धीमान पोपट कामचोर ने कहा कि लेते है जो सांस चैन की, यूं ही नहीं तो आई है, खोया है आजाद को हमने, तब ही आजादी पाई है। संसार सिंह पंवार, प्रदीप मायूस, अनंगपाल दांगी, सुरेंद्र शर्मा, इकबाल कवि, अजय कुमार तोमर आदि कवियों ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत की। गोष्ठी की अध्यक्षता विजयपाल सिंह और संचालन अजय कुमार ने किया। विशिष्ट अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. रामगोपाल वार्ष्णेय रहे। इसमें योगेंद्र सुंदिरयाल, जगवीर शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, भूपेंद्र अनंत, डॉ. महक सिंह, बबीता मेहरा, राजेश मंडार आदि उपस्थित रहे।
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बड़ौत (बागपत)। आजाद नगर में सभासद प्रमेंद्र चौधरी के आवास पर लोक साहित्य संस्कृति समिति बड़ौत के तत्वावधान में कवि स्वर्गीय भानू तपन की स्मृति में श्रद्धांजलि स्वरूप काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें उनकी कविताओं, गजलों, उपन्यास आदि पर विशेष चर्चा की गई।
कवियों ने कविताओं के माध्यम से अपने शब्द-पुष्प अर्पित किए। कवि डॉ. निखिल देव चौहान ने कहा कि वो जुदा ऐसे हुआ कि खुद सा मुझको कर गया, कर रहा हूं काम सब उसकी अदा में आजकल। कवि विनीत मित्तल ने कहा कि सर फक्र से उठ जाए ऐसा मुकाम बना दो मोदी जी, रावण का वध करने के लिए कोई राम बना दो मोदी जी। भूपेंद्र शर्मा एडवोकेट ने कहा कि शीश भले कट जाए धड़ से, धर्म नहीं मिटने देंगे, रक्त भले बह जाए सारा, ध्वज नहीं झुकने देंगे। अनिल धीमान पोपट कामचोर ने कहा कि लेते है जो सांस चैन की, यूं ही नहीं तो आई है, खोया है आजाद को हमने, तब ही आजादी पाई है। संसार सिंह पंवार, प्रदीप मायूस, अनंगपाल दांगी, सुरेंद्र शर्मा, इकबाल कवि, अजय कुमार तोमर आदि कवियों ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत की। गोष्ठी की अध्यक्षता विजयपाल सिंह और संचालन अजय कुमार ने किया। विशिष्ट अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. रामगोपाल वार्ष्णेय रहे। इसमें योगेंद्र सुंदिरयाल, जगवीर शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, भूपेंद्र अनंत, डॉ. महक सिंह, बबीता मेहरा, राजेश मंडार आदि उपस्थित रहे।
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