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शिक्षा से ही मानव चरित्रवान बन सकता है
Updated Tue, 02 Jan 2018 01:09 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर एसोसिएशन, आर्य समाज और एस्रो बड़ौत ने संयुक्त रूप से गांधी विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, बूढ़पुर में नवयुवकों के चरित्र निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके आयोजित प्रश्नोत्तरी में अंकुर प्रथम रहा।
इस मौके पर सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव प्रीतम सिंह वर्मा ने कहा कि शिक्षा द्वारा ही आदमी अपने आप को चरित्रवान एवं विद्वान बना सकता है। विद्या से ही सभ्यता, धर्म तथा जितेंद्रीय का विकास होता है शिक्षा के बिना मनुष्य पशु समान होता है। शिक्षा को चोर नहीं चुरा सकता, राजा नहीं छीन सकता, बंधु बांट नहीं सकते। उन्होंने छात्र-छात्राओं से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अच्छी शिक्षा ग्रहण करने की अपील की। आर्य समाज के डॉ. ओमवीर सिंह ने कहा कि पूर्व में भारत की वैदिक संस्कृति रही है। वैदिक संस्कृति के ह्रास होने पर समाज में पुन: अंधविश्वास एवं कुरीतियों में वृद्धि हुई है। एस्रो बड़ौत के संजय राणा ने कहा कि जीवन को सुखमय बनाने के लिए शुद्ध वातावरण की अति आवश्यकता है। यह तभी संभव है, जब मानव अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाए। पर्यावरण को मानव के साथ नैतिक व सामाजिक रूप से जोड़ा जाए। इस मौके पर प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया। इसमें अंकुर प्रथम, नीशू द्वितीय और आरिफ तृतीय रहे। इसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. महेश पाल सिंह ने की। संचालन सत्यप्रकाश चौहान ने किया। इसमें जगपाल सिंह, ऋषिपाल सिंह, देवेंद्र सिंह, जोगेंद्र प्रसाद, कृष्णपाल, सोनू आदि रहे।
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सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर एसोसिएशन, आर्य समाज और एस्रो बड़ौत ने संयुक्त रूप से गांधी विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, बूढ़पुर में नवयुवकों के चरित्र निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके आयोजित प्रश्नोत्तरी में अंकुर प्रथम रहा।
इस मौके पर सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव प्रीतम सिंह वर्मा ने कहा कि शिक्षा द्वारा ही आदमी अपने आप को चरित्रवान एवं विद्वान बना सकता है। विद्या से ही सभ्यता, धर्म तथा जितेंद्रीय का विकास होता है शिक्षा के बिना मनुष्य पशु समान होता है। शिक्षा को चोर नहीं चुरा सकता, राजा नहीं छीन सकता, बंधु बांट नहीं सकते। उन्होंने छात्र-छात्राओं से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अच्छी शिक्षा ग्रहण करने की अपील की। आर्य समाज के डॉ. ओमवीर सिंह ने कहा कि पूर्व में भारत की वैदिक संस्कृति रही है। वैदिक संस्कृति के ह्रास होने पर समाज में पुन: अंधविश्वास एवं कुरीतियों में वृद्धि हुई है। एस्रो बड़ौत के संजय राणा ने कहा कि जीवन को सुखमय बनाने के लिए शुद्ध वातावरण की अति आवश्यकता है। यह तभी संभव है, जब मानव अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाए। पर्यावरण को मानव के साथ नैतिक व सामाजिक रूप से जोड़ा जाए। इस मौके पर प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया। इसमें अंकुर प्रथम, नीशू द्वितीय और आरिफ तृतीय रहे। इसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. महेश पाल सिंह ने की। संचालन सत्यप्रकाश चौहान ने किया। इसमें जगपाल सिंह, ऋषिपाल सिंह, देवेंद्र सिंह, जोगेंद्र प्रसाद, कृष्णपाल, सोनू आदि रहे।
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