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जीवन में शांति होना आवश्यक है- अरूण मुनि
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:59 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
अरुण मुनि ने कहा कि जीवन में शांति होना आवश्यक है। जिस समाज में घर में परिवार में शांति नहीं है वह घर नहीं श्मशान घाट होता है।
रविवार को जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा कि मुनि शांत स्वभाव वाले होते हैं। क्रोध से बहुत दूर रहते हैं। शांति बहुत बड़ी चीज है। इस संसार में जो व्यक्ति मरता है। परिवार वाले उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को पार करना जीवन की गिरावट होती है। आजकल परिवारों में पहनावे को लेकर मर्यादा का उल्लंघन किया जाता है। जिन वस्त्रों को पहले शरीर को ढकने में काम लेते है आज उन्हीं वस्त्रों का विकट रूप अंग प्रदर्शन का कार्य किया जाने लगा है। मंदिरों में स्थानकों में औरतें ऐसे वस्त्र पहनकर आती है उन्हें शर्म महसूस नहीं होती। जबकि साधु-संतों को शर्म लगती है। मनुष्य जन्म बड़े पुण्य कर्मों के कारण मिलता है जिसे पाने के लिए देवता भी तरसते है और एक आज का युवा वर्ग है जो मिले हुए मनुष्य जीवन को व्यर्थ गंवा रहा है। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, सोहनपाल, राजीव जैन, हंसकुमार जैन, दीपक जैन, मनीष जैन, त्रिलोक, भारत भूषण, शैलबाला, इंद्राणी, कमलेश, सविता आदि उपस्थित रहे।
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अरुण मुनि ने कहा कि जीवन में शांति होना आवश्यक है। जिस समाज में घर में परिवार में शांति नहीं है वह घर नहीं श्मशान घाट होता है।
रविवार को जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा कि मुनि शांत स्वभाव वाले होते हैं। क्रोध से बहुत दूर रहते हैं। शांति बहुत बड़ी चीज है। इस संसार में जो व्यक्ति मरता है। परिवार वाले उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को पार करना जीवन की गिरावट होती है। आजकल परिवारों में पहनावे को लेकर मर्यादा का उल्लंघन किया जाता है। जिन वस्त्रों को पहले शरीर को ढकने में काम लेते है आज उन्हीं वस्त्रों का विकट रूप अंग प्रदर्शन का कार्य किया जाने लगा है। मंदिरों में स्थानकों में औरतें ऐसे वस्त्र पहनकर आती है उन्हें शर्म महसूस नहीं होती। जबकि साधु-संतों को शर्म लगती है। मनुष्य जन्म बड़े पुण्य कर्मों के कारण मिलता है जिसे पाने के लिए देवता भी तरसते है और एक आज का युवा वर्ग है जो मिले हुए मनुष्य जीवन को व्यर्थ गंवा रहा है। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, सोहनपाल, राजीव जैन, हंसकुमार जैन, दीपक जैन, मनीष जैन, त्रिलोक, भारत भूषण, शैलबाला, इंद्राणी, कमलेश, सविता आदि उपस्थित रहे।