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हौंसले और हिम्मत से खुशहाल होती है जिंदगी
Updated Fri, 23 Nov 2018 01:20 AM IST
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अमीनगर सराय (बागपत)। अमर उजाला फाउंडेशन एवं बाल चित्र समिति ने कस्बे के आचार्य जय सागर कन्या इंटर कॉलेज और नानक चंद सरस्वती विद्या मंदिर में बाल फिल्म महोत्सव का आयोजन किया। इस दौरान बच्चों की जागरूक करने के लिए फिल्म भी दिखाई गई। इसमें करामाती कोट और अभय फिल्म ने बच्चों को जागरूक किया।
बृहस्पतिवार को आचार्य जय सागर कन्या इंटर कॉलेज में कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य अरुण बाला जैन ने फीता काटकर किया। यहां करीब 400 छात्राओं ने अभय फिल्म देखी। इसमें दिखाया गया कि संयम और प्रेम के जरिये किस तरह एक छोटी बच्ची 150 साल से भटकती हुई आत्मा को भी मुक्त करा देती है। साहस, दृढ़ता और आत्मविश्वास का भरपूर संगम फिल्म में दिखाया गया। छोटी सी बच्ची प्रियंका किस तरह बिना डरें मुश्किलों का सामना करती है और प्रेम से आत्मा के लिए मोक्ष के द्वार खोल देती है। शिक्षकों ने फिल्म को सराहा। अनीता जैन, कमलेश जैन और दिनेश जैन मौजूद रहे।
लालच के लिए कभी न छोड़ें दोस्ताना
अमीनगर सराय (बागपत)। बाल फिल्म महोत्सव के अंतर्गत सराय स्थित नानक चंद सरस्वती विद्या मंदिर में करामाती कोट फिल्म दिखाई। विद्यालय के 500 छात्र-छात्राओं ने फिल्म को देखा। फिल्म से बच्चों ने सीखा कि मुसीबत में अपने मित्रों का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। कभी भी लालच के वशीभूत नहीं होना चाहिए। फिल्म में दिखाया कि बच्चे को मारपीट कर घर से निकाल दिया जाता है। जब बच्चा ठंड से सिकुड़ता है तो एक वृद्ध उसे एक करामाती कोट देता है। कोट से एक बार में एक रुपये का सिक्का निकलता है, इससे बच्चा अपने सभी शोक पूरे करता है और जरूरत मंद अपने साथियों की भी मदद करता है, लेकिन कुछ लालची लोग उसके करामाती कोट को चुराकर अपने लालच को पूरा करने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते है। बाद में बच्चा इस कोट को समुद्र में फेंक देता है। प्रधानाचार्य हरिहर शर्मा, योगेश, अरुण मौजूद रहे।
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निडर रहने की सीख मिली
डरकर किसी का भी सामना नही किया जा सकता है, अभय फिल्म मनोरंजन करती है और निडर रहने की सीख देती है।
असना इलाही, छात्रा
शिक्षा प्रद रही मूवी
जीवन के किसी भी विपत्ति के समय हौसला नहीं खोना चाहिए। अमर उजाला का प्रयास सराहनीय है। बच्चों को सीख मिली।
अनन्या जैन, छात्रा
अच्छी सोच ही जीवन का आधार
फिल्म के माध्यम से भूत प्रेत से न डरकर बल्कि समस्या का समाधान निकालने एक प्रयास करना चाहिए।
सना अंसारी, छात्रा
रोचक और रचनात्मक रही फिल्म
करामाती कोट में किस तरह एक बच्चा अपने सपनों को पंख लगाने का प्रयास करता है। दोस्तों से मिल जुल कर रहना सिखाता है।
प्रिया त्यागी, छात्रा।
मनोरंजक रही फिल्म
फिल्म में छोटे बच्चो की जरूरतों एवं दोस्ती में छोटी छोटी शैतानियों को बड़े ही अच्छे ढंग से दिखाया गया है। बेहद अच्छी फिल्म है।
अंजलि यादव
बचपन दिला दी याद
अभय फिल्म में जिस प्रकार आत्मा व भूत की बाते दिखाई गई है वैसे ही बचपन मे हमे भी किसी सुनसान जगह जाने से रोकते थे मम्मी पापा।
स्नेहा
भय को कभी नही पालना चाहिए
बिना सत्यता को जाने कभी भी अनर्गल बातो पर विस्वास न करे और न ही डरे, डर आपको अंदर व बाहर दोनो से कमजोर कर देता है।
चंचल उज्जवल
आत्म विश्वास को बनाती है मजबूत
फिल्म हमें दृढ़ता आत्मविस्वास एवं निडरता की सीख देती है।
अंशिका यादव
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बृहस्पतिवार को आचार्य जय सागर कन्या इंटर कॉलेज में कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य अरुण बाला जैन ने फीता काटकर किया। यहां करीब 400 छात्राओं ने अभय फिल्म देखी। इसमें दिखाया गया कि संयम और प्रेम के जरिये किस तरह एक छोटी बच्ची 150 साल से भटकती हुई आत्मा को भी मुक्त करा देती है। साहस, दृढ़ता और आत्मविश्वास का भरपूर संगम फिल्म में दिखाया गया। छोटी सी बच्ची प्रियंका किस तरह बिना डरें मुश्किलों का सामना करती है और प्रेम से आत्मा के लिए मोक्ष के द्वार खोल देती है। शिक्षकों ने फिल्म को सराहा। अनीता जैन, कमलेश जैन और दिनेश जैन मौजूद रहे।
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लालच के लिए कभी न छोड़ें दोस्ताना
अमीनगर सराय (बागपत)। बाल फिल्म महोत्सव के अंतर्गत सराय स्थित नानक चंद सरस्वती विद्या मंदिर में करामाती कोट फिल्म दिखाई। विद्यालय के 500 छात्र-छात्राओं ने फिल्म को देखा। फिल्म से बच्चों ने सीखा कि मुसीबत में अपने मित्रों का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। कभी भी लालच के वशीभूत नहीं होना चाहिए। फिल्म में दिखाया कि बच्चे को मारपीट कर घर से निकाल दिया जाता है। जब बच्चा ठंड से सिकुड़ता है तो एक वृद्ध उसे एक करामाती कोट देता है। कोट से एक बार में एक रुपये का सिक्का निकलता है, इससे बच्चा अपने सभी शोक पूरे करता है और जरूरत मंद अपने साथियों की भी मदद करता है, लेकिन कुछ लालची लोग उसके करामाती कोट को चुराकर अपने लालच को पूरा करने का प्रयास करते हैं, लेकिन असफल रहते है। बाद में बच्चा इस कोट को समुद्र में फेंक देता है। प्रधानाचार्य हरिहर शर्मा, योगेश, अरुण मौजूद रहे।
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निडर रहने की सीख मिली
डरकर किसी का भी सामना नही किया जा सकता है, अभय फिल्म मनोरंजन करती है और निडर रहने की सीख देती है।
असना इलाही, छात्रा
शिक्षा प्रद रही मूवी
जीवन के किसी भी विपत्ति के समय हौसला नहीं खोना चाहिए। अमर उजाला का प्रयास सराहनीय है। बच्चों को सीख मिली।
अनन्या जैन, छात्रा
अच्छी सोच ही जीवन का आधार
फिल्म के माध्यम से भूत प्रेत से न डरकर बल्कि समस्या का समाधान निकालने एक प्रयास करना चाहिए।
सना अंसारी, छात्रा
रोचक और रचनात्मक रही फिल्म
करामाती कोट में किस तरह एक बच्चा अपने सपनों को पंख लगाने का प्रयास करता है। दोस्तों से मिल जुल कर रहना सिखाता है।
प्रिया त्यागी, छात्रा।
मनोरंजक रही फिल्म
फिल्म में छोटे बच्चो की जरूरतों एवं दोस्ती में छोटी छोटी शैतानियों को बड़े ही अच्छे ढंग से दिखाया गया है। बेहद अच्छी फिल्म है।
अंजलि यादव
बचपन दिला दी याद
अभय फिल्म में जिस प्रकार आत्मा व भूत की बाते दिखाई गई है वैसे ही बचपन मे हमे भी किसी सुनसान जगह जाने से रोकते थे मम्मी पापा।
स्नेहा
भय को कभी नही पालना चाहिए
बिना सत्यता को जाने कभी भी अनर्गल बातो पर विस्वास न करे और न ही डरे, डर आपको अंदर व बाहर दोनो से कमजोर कर देता है।
चंचल उज्जवल
आत्म विश्वास को बनाती है मजबूत
फिल्म हमें दृढ़ता आत्मविस्वास एवं निडरता की सीख देती है।
अंशिका यादव