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1.90 लाख मवेशियों को नहीं लग गलाघोटू का टीका, बीमारी फैलने की आशंका
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बड़ौत। पशुओं में फैलने वाली बीमारी गलघोंटू घातक है। इससे बचाव के लिए जिले के 3.80 लाख मवेशियों का टीकाकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन पशुपालन विभाग की लचर व्यवस्था के चलते अभी तक 1.90 लाख पशुओं को टीकाकरण नहीं हो सका है। टीकाकरण नहीं होने से पशुपालक बीमारी को लेकर चिंतित हैं।
जनपद में गलघोंटू टीकाकरण की स्थिति बेहद खराब है। यहां पर 3.80 लाख मवेशियों को जुलाई माह तक टीकाकरण होना था, लेकिन अगस्त माह के भी 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी जनपद में 1.90 लाख मवेशियों को टीकाकरण नहीं हुआ है। इसके पीछे पशुपालन विभाग की बदहाल व्यवस्था को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का दावा है कि जल्द ही बचे हुए मवेशियों को टीकाकरण किया जाएगा।
फतेहपुर पुटठी गांव के रहने वाले पशु पालक सुनील का कहना है कि अब तक उनके मवेशियों को टीका नहीं लग सका है। इससे पशुओं की बीमारी फैलने की चिंता सता रही है। विभाग इसकी प्रमुख वजह संसाधनों का अभाव और टीका आवंटन में देरी बता रहा है। धनौरा गांव के पशु पालक दीपक का कहना है कि टीकाकरण में पशु पालन विभाग हर साल लापरवाही बरता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। यदि पशु पालन विभाग ने अपना रवैया नहीं अपनाया तो पशु पालक विभाग की शिकायत मुख्यमंत्री तक करेंगे।
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ऐसे फैलता है रोग
बड़ौत। यह रोग बीमार पशु के सीधे संपर्क में आने, पानी, घास, दाना, बर्तन, दूध निकलने वाले व्यक्ति के हाथों से फैलता है। रोग के विषाणु बीमार पशु की लार, मुंह, खुर व थनों में पड़े फफोलों में पाए जाते हैं। ये खुले में घास, चारा, तथा फर्श पर चार महीनों तक जीवित रह सकते हैं। गर्मीं के मौसम में यह बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं। विषाणु जीभ, मुंह, आंत, खुरों के बीच की जगह, थनों तथा घाव आदि के जरिये स्वस्थ पशु के रक्त में पहुंचते हैं।
रोग के प्रमुख लक्षण
- रोग ग्रस्त पशु को 104-106 डिग्री तक बुखार हो जाता है।
- वह खाना-पीना व जुगाली करना बंद कर देता है।
- मुंह से लार बह ने के साथ ही मुंह हिलाने पर चप-चप की आवाज आती है।
कोट...
बीमारी से बचाव के उपाय
- बीमार पशु को अलग कर देना चाहिए। देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी स्वस्थ पशुओं के बाड़े से दूर रहना चाहिए। पशुशाला को साफ-सुथरा रखना चाहिए। इस बीमारी से मरे पशु के शव को खुला छोड़ने के बजाय जमीन में दफना देना चाहिए। पहले बाढ़ प्रभावित जिलों को टीका आवंटित हुआ था। इसलिए जनपद में देर से टीके की खेप आ रही है। कर्मचारियों की टीम लगाकर जल्द से जल्द टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। डॉ. रमेश चंद्रा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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जनपद में गलघोंटू टीकाकरण की स्थिति बेहद खराब है। यहां पर 3.80 लाख मवेशियों को जुलाई माह तक टीकाकरण होना था, लेकिन अगस्त माह के भी 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी जनपद में 1.90 लाख मवेशियों को टीकाकरण नहीं हुआ है। इसके पीछे पशुपालन विभाग की बदहाल व्यवस्था को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का दावा है कि जल्द ही बचे हुए मवेशियों को टीकाकरण किया जाएगा।
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फतेहपुर पुटठी गांव के रहने वाले पशु पालक सुनील का कहना है कि अब तक उनके मवेशियों को टीका नहीं लग सका है। इससे पशुओं की बीमारी फैलने की चिंता सता रही है। विभाग इसकी प्रमुख वजह संसाधनों का अभाव और टीका आवंटन में देरी बता रहा है। धनौरा गांव के पशु पालक दीपक का कहना है कि टीकाकरण में पशु पालन विभाग हर साल लापरवाही बरता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। यदि पशु पालन विभाग ने अपना रवैया नहीं अपनाया तो पशु पालक विभाग की शिकायत मुख्यमंत्री तक करेंगे।
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ऐसे फैलता है रोग
बड़ौत। यह रोग बीमार पशु के सीधे संपर्क में आने, पानी, घास, दाना, बर्तन, दूध निकलने वाले व्यक्ति के हाथों से फैलता है। रोग के विषाणु बीमार पशु की लार, मुंह, खुर व थनों में पड़े फफोलों में पाए जाते हैं। ये खुले में घास, चारा, तथा फर्श पर चार महीनों तक जीवित रह सकते हैं। गर्मीं के मौसम में यह बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं। विषाणु जीभ, मुंह, आंत, खुरों के बीच की जगह, थनों तथा घाव आदि के जरिये स्वस्थ पशु के रक्त में पहुंचते हैं।
रोग के प्रमुख लक्षण
- रोग ग्रस्त पशु को 104-106 डिग्री तक बुखार हो जाता है।
- वह खाना-पीना व जुगाली करना बंद कर देता है।
- मुंह से लार बह ने के साथ ही मुंह हिलाने पर चप-चप की आवाज आती है।
कोट...
बीमारी से बचाव के उपाय
- बीमार पशु को अलग कर देना चाहिए। देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी स्वस्थ पशुओं के बाड़े से दूर रहना चाहिए। पशुशाला को साफ-सुथरा रखना चाहिए। इस बीमारी से मरे पशु के शव को खुला छोड़ने के बजाय जमीन में दफना देना चाहिए। पहले बाढ़ प्रभावित जिलों को टीका आवंटित हुआ था। इसलिए जनपद में देर से टीके की खेप आ रही है। कर्मचारियों की टीम लगाकर जल्द से जल्द टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। डॉ. रमेश चंद्रा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी