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Azamgarh News: अल्लाह और रसूल की मुहब्बत से मिलेगी बुलंदी
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फोटो
जिस मोमिन के दिल में अल्लाह और उसके रसूल की मुहब्बत जितनी ज्यादा होगी, उसे उतना ही कमाल और बुलंदी अता होगी। इबादत में लज्जत मिलेगी, दीन पर चलना आसान होगा। उक्त बातें जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के सचिव मौलाना अज़हर मदनी ने शेरवां ईदगाह स्थित जामिया शरिया फैजुल ओलूम के मस्जिद सहाबा में शुक्रवार को जुमा की नमाज से पहले लोगों को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल से मुहब्बत सबसे अधिक सहाबा-ए-क्राम को थी। उन्होंने मोहब्बत के जो नमूने पेश किए वह दुनिया के बड़े से बड़े बादशाहों के दरबार में भी नहीं मिल सकते हैं। इसी सच्ची मोहब्बत के नतीजा में सहाबा-ए-क्राम को मुकाम व मर्तबा हासिल हुआ। रसूल से मोहब्बत का आसान रास्ता कसरत से दुरुद शरीफ पढ़ना है। जो शख्स जितना दुरुद पढ़ेगा, उसे अल्लाह के रसूल की मोहब्बत हासिल होगी। उन्होंने कसरत से प्रतिदिन 100 बार दुरुद पढ़ने का मामूल बनाने की अपील की। कहा दुरुद शरीफ ऐसी इबादत है जो हर हाल में कबूल होती है। अल्लाह तआला ईमान वालों से मुतालबा करता है कि वह दरूद शरीफ पढ़े और अल्लाह और उसके रसूल के महबूब बने।
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जिस मोमिन के दिल में अल्लाह और उसके रसूल की मुहब्बत जितनी ज्यादा होगी, उसे उतना ही कमाल और बुलंदी अता होगी। इबादत में लज्जत मिलेगी, दीन पर चलना आसान होगा। उक्त बातें जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के सचिव मौलाना अज़हर मदनी ने शेरवां ईदगाह स्थित जामिया शरिया फैजुल ओलूम के मस्जिद सहाबा में शुक्रवार को जुमा की नमाज से पहले लोगों को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल से मुहब्बत सबसे अधिक सहाबा-ए-क्राम को थी। उन्होंने मोहब्बत के जो नमूने पेश किए वह दुनिया के बड़े से बड़े बादशाहों के दरबार में भी नहीं मिल सकते हैं। इसी सच्ची मोहब्बत के नतीजा में सहाबा-ए-क्राम को मुकाम व मर्तबा हासिल हुआ। रसूल से मोहब्बत का आसान रास्ता कसरत से दुरुद शरीफ पढ़ना है। जो शख्स जितना दुरुद पढ़ेगा, उसे अल्लाह के रसूल की मोहब्बत हासिल होगी। उन्होंने कसरत से प्रतिदिन 100 बार दुरुद पढ़ने का मामूल बनाने की अपील की। कहा दुरुद शरीफ ऐसी इबादत है जो हर हाल में कबूल होती है। अल्लाह तआला ईमान वालों से मुतालबा करता है कि वह दरूद शरीफ पढ़े और अल्लाह और उसके रसूल के महबूब बने।
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