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Azamgarh News: महिलाएं बनेंगी ‘आपदा मित्र’, गांव-गांव जाकर फैलाएंगी जागरूकता
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आजमगढ़। आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अब महिलाओं को ‘आपदा मित्र’ के रूप में तैयार किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से चयनित महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें गांव स्तर पर जागरूकता फैलाने और आपदा के समय सहयोग करने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
पहले चरण में महाराजगंज, हरैया और बिलरियागंज क्षेत्रों की कुल 32 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान आग लगने की स्थिति में नियंत्रण के उपाय, सुरक्षित रसोई संचालन, बिजली उपकरणों के सावधानीपूर्वक उपयोग और प्राथमिक उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई।
इसके अलावा सर्पदंश की स्थिति में सावधानियां, बाढ़ के दौरान सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने और आवश्यक वस्तुओं को सुरक्षित रखने के तरीके भी समझाए गए। प्रशिक्षित महिलाएं अब गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी। विशेष रूप से गैस सिलिंडर, चूल्हा और बिजली से जुड़ी सावधानियों पर जोर दिया जाएगा, ताकि आगजनी जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
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साथ ही ये महिलाएं आपदा के समय सूचना देने, राहत कार्य में सहयोग करने और जरूरतमंदों को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने में भी भूमिका निभाएंगी। डीसी एनआरएलएम डॉ. आराधना त्रिपाठी ने बताया कि महिलाओं की भागीदारी से गांव स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी। उन्होंने कहा कि चयनित महिलाएं स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर रही हैं और आगे और भी गांवों में ऐसे स्वयंसेवकों का चयन किया जाएगा, जिससे आपदा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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पहले चरण में महाराजगंज, हरैया और बिलरियागंज क्षेत्रों की कुल 32 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान आग लगने की स्थिति में नियंत्रण के उपाय, सुरक्षित रसोई संचालन, बिजली उपकरणों के सावधानीपूर्वक उपयोग और प्राथमिक उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई।
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इसके अलावा सर्पदंश की स्थिति में सावधानियां, बाढ़ के दौरान सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने और आवश्यक वस्तुओं को सुरक्षित रखने के तरीके भी समझाए गए। प्रशिक्षित महिलाएं अब गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी। विशेष रूप से गैस सिलिंडर, चूल्हा और बिजली से जुड़ी सावधानियों पर जोर दिया जाएगा, ताकि आगजनी जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
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साथ ही ये महिलाएं आपदा के समय सूचना देने, राहत कार्य में सहयोग करने और जरूरतमंदों को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने में भी भूमिका निभाएंगी। डीसी एनआरएलएम डॉ. आराधना त्रिपाठी ने बताया कि महिलाओं की भागीदारी से गांव स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी। उन्होंने कहा कि चयनित महिलाएं स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर रही हैं और आगे और भी गांवों में ऐसे स्वयंसेवकों का चयन किया जाएगा, जिससे आपदा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।