साइबर ठगी का जाल: हर दिन 30 लोगों को शातिरों ने किए फोन, 15 तरीकों से की ओटीपी चोरी; डार्कवेब पर लीक हुए डेटा
वाराणसी में साइबर ठग रोजाना करीब 30 लोगों को फोन कर ठगी का प्रयास कर रहे हैं। कॉल फॉरवर्डिंग, मालवेयर, फिशिंग वेबसाइट और लिंक, सिम स्वैपिंग समेत 15 तरीकों से ओटीपी चोरी की जा रही है। डार्कवेब पर डेटा लीक होने से भी खतरा बढ़ा है। जिले में रोजाना करीब 23 साइबर अपराध संबंधी शिकायतें पहुंच रही हैं।
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साइबर ठगी का जाल अब सिर्फ फोन कॉल और फर्जी लिंक तक सीमित नहीं रह गया है। ठग रोजाना औसतन 30 लोगों के मोबाइल पर फोन कर ठगी या ठगी का प्रयास करते हैं। ऐसे नंबरों को साइबर सेल ने चिह्नित किया। इनमें ज्यादातर नंबरों से 20-25 बार कॉल आए।
साइबर ठगों ने 15 तरीकों से ओटीपी चोरी किया, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों के कोड नंबर डायल कराकर मोबाइल हैक करना, कॉल फॉरवर्डिंग, मालवेयर भेजना, फिशिंग वेबसाइट और लिंक, सिम स्वैपिंग, डार्कवेब पर लीक हुए डेटा समेत अन्य तरीके शामिल हैं।
पुलिस की साइबर टीम ने एक साल में ऐसे करीब 10 हजार मोबाइल नंबर चिह्नित किए हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया गया या जिनसे ठगी के लिए संपर्क किया गया। इन नंबरों को बंद करा दिया गया है। खास बात यह है कि अलग-अलग राज्यों में बैठे पीड़ितों से ठगी के बाद रकम वाराणसी के म्यूल खातों व अन्य माध्यमों से खातों में भेजी गई। ऐसे 17 हजार शिकायतें एनसीआरपी पर दर्ज हुईं।
इस लिहाज से रोजाना 23 मामले बैंकों की जांच तक पहुंचे। पुलिस की जांच में सामने आया है कि साइबर ठग ठगी की रकम सीधे अपने खाते में लेने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। इन खातों को कमीशन के लालच में उपलब्ध कराया जाता है। ठगी की रकम पहुंचते ही उसे कई खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता है, जिससे असली ठग तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है।
अलवर, नासिक, चंडीगढ़ और बंगाल बॉर्डर तक पहुंचा साइबर ठगी का नेटवर्क
पुलिस, साइबर सेल और साइबर थाने की जांच में साइबर ठगी के नेटवर्क के कई राज्यों से जुड़े होने का पता चला है। जांच में राजस्थान के अलवर, महाराष्ट्र के नासिक, चंडीगढ़, बंगाल बॉर्डर और ओडिशा के अति पिछड़े जिलों का कनेक्शन सामने आया है। साइबर ठगी के बाद रकम जिन म्यूल खातों में भेजी गई, उनमें इन क्षेत्रों से जुड़े लेनदेन मिले हैं। पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसका स्रोत छिपाने की कोशिश की गई। अब पुलिस इन खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है। जांच में सामने आए संदिग्ध खातों और नंबरों के आधार पर अन्य आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
25 करोड़ होल्ड, लेकिन रिलीज में देरी
पुलिस ने साइबर ठगी के अलग-अलग मामलों में कुल 25 करोड़ रुपये होल्ड कराए हैं। लेकिन ठगी की रकम तुरंत पीड़ितों को नहीं मिलेगी। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इस प्रक्रिया में समय लगेगा। पुलिस ने करीब 4.50 करोड़ रुपये पीड़ितों को दिलाए हैं।
साइबर ठगी ही नहीं, बल्कि ठगी के प्रयास जैसे मामले अगर सामने आएं तो तुरंत पुलिस या साइबर सेल में जानकारी दें। साइबर पुलिस ऐसे नंबरों को चिह्नित कर कार्रवाई करेगी। अनजान नंबर से कॉल आए तो पहले सोचें, समझें और शक होते ही शिकायत दर्ज कराएं। - राजेश कुमार पांडेय, डीसीपी