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गंदगी पर वार्ड इंचार्ज का रोका वेतन
अमर उजाला ब्यूरो, आजमगढ़
Updated Thu, 18 May 2017 11:43 PM IST
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गंदगी पर वार्ड इंचार्ज का रोका वेतन
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जिला चिकित्सालय का निरीक्षण गुरुवार को जिलाधिकारी ने किया। इस दौरान परिसर में गंदगी और बाहर से दवा लिखे जाने पर नाराजगी जताई। साथ ही वार्ड इंचार्ज का वेतन रोकने तथा दवा वितरण के लिए जिम्मेदार फार्मासिस्ट को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया। चिकित्सालय परिसर में खराब हैंड पंपों को तत्काल बनवाने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी के निरीक्षण से अस्पताल में हड़कंप की स्थिति थी।
गुरुवार को जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के क्रम में जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने मंडलीय जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सबसे पहले चिकित्सालय परिसर में कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा स्थापित आम जनता में मेडिकल स्टोर में दवाइयों की उपलब्धता, आपूर्ति तथा मूल्य आदि का जायजा लेते हुए दवा विक्रेता को मानक के अनुरूप दवाएं बेचने का निर्देश दिया।
इस दौरान दवाइयां खरीदने के लिए लाइन में लगे लोगों ने डीएम से शिकायत की कि अधिकतर दवाएं डाक्टर बाहर की लिखते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने चिकित्सालय दवा आपूर्ति कक्ष का निरीक्षण किया, जिसमें उन्होंने पाया कि जो दवाएं मरीजों को बाहरी मेडिकल स्टोरों से ऊंचे दामों पर खरीदने के लिए लिखी जाती हैं, वे दवाएं भारी मात्रा में आपूर्ति कक्ष में उपलब्ध है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित डाक्टर और फार्मासिस्ट को फटकार लगाई।
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इसके बाद उन्होंने जनरल फिजिशियन कक्ष, आर्थो सर्जन कक्ष तथा इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने सर्जनों को निर्देश दिया कि मरीज का विवरण पंजिका में दर्ज करते समय उसका मोबाइल नंबर तथा दी गई दवाइयों का स्पष्ट उल्लेख करें। इमरजेंसी वार्ड के निरीक्षण के दौरान भर्ती मरीजों ने बाहरी दवाएं लिखने तथा साफ-सफाई न कराने की शिकायत की।
इस पर जिलाधिकारी ने वार्ड इंचार्ज का वेतन रोकने तथा दवा वितरण के लिए जिम्मेदार फार्मासिस्ट को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया। उन्होंनेे चिकित्सालय परिसर में खराब हैंडपंपों को तत्काल बनवाने का निर्देश दिया। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने डीएम को बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दवाओं की निरंतर आपूर्ति नहीं की जा रही है, जिसके चलते डाक्टरों को बाहर की दवाएं लिखनी पड़ रही हैं।
इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल प्रमुख सचिव चिकित्सा को पत्र के माध्यम से अवगत कराने का निर्देश दिया। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके तिवारी तथा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जीएल केशरवानी को निर्देश देते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान मिली कमियों को दूर करें।
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गुरुवार को जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के क्रम में जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने मंडलीय जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सबसे पहले चिकित्सालय परिसर में कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा स्थापित आम जनता में मेडिकल स्टोर में दवाइयों की उपलब्धता, आपूर्ति तथा मूल्य आदि का जायजा लेते हुए दवा विक्रेता को मानक के अनुरूप दवाएं बेचने का निर्देश दिया।
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इस दौरान दवाइयां खरीदने के लिए लाइन में लगे लोगों ने डीएम से शिकायत की कि अधिकतर दवाएं डाक्टर बाहर की लिखते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने चिकित्सालय दवा आपूर्ति कक्ष का निरीक्षण किया, जिसमें उन्होंने पाया कि जो दवाएं मरीजों को बाहरी मेडिकल स्टोरों से ऊंचे दामों पर खरीदने के लिए लिखी जाती हैं, वे दवाएं भारी मात्रा में आपूर्ति कक्ष में उपलब्ध है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित डाक्टर और फार्मासिस्ट को फटकार लगाई।
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इसके बाद उन्होंने जनरल फिजिशियन कक्ष, आर्थो सर्जन कक्ष तथा इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने सर्जनों को निर्देश दिया कि मरीज का विवरण पंजिका में दर्ज करते समय उसका मोबाइल नंबर तथा दी गई दवाइयों का स्पष्ट उल्लेख करें। इमरजेंसी वार्ड के निरीक्षण के दौरान भर्ती मरीजों ने बाहरी दवाएं लिखने तथा साफ-सफाई न कराने की शिकायत की।
इस पर जिलाधिकारी ने वार्ड इंचार्ज का वेतन रोकने तथा दवा वितरण के लिए जिम्मेदार फार्मासिस्ट को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया। उन्होंनेे चिकित्सालय परिसर में खराब हैंडपंपों को तत्काल बनवाने का निर्देश दिया। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने डीएम को बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दवाओं की निरंतर आपूर्ति नहीं की जा रही है, जिसके चलते डाक्टरों को बाहर की दवाएं लिखनी पड़ रही हैं।
इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल प्रमुख सचिव चिकित्सा को पत्र के माध्यम से अवगत कराने का निर्देश दिया। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके तिवारी तथा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जीएल केशरवानी को निर्देश देते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान मिली कमियों को दूर करें।