UP Chunav 2022: आजमगढ़ में दो और सीटों पर भाजपा प्रत्याशी घोषित, बसपा से आई वंदना को सगड़ी से टिकट, फूलपुर पवई से रामसूरत को मौका
पूर्वांचल की सीटों पर रविवार देर रात भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। आजमगढ़ के फूलपुर पवई से विधायक अरुणकांत यादव का टिकट कट गया है। उनकी जगह रामसूरत राजभर को प्रत्याशी बनाया गया है।
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भारतीय जनता पार्टी द्वारा रविवार रात प्रत्याशियों की सूची जारी की गई। इस सूची में पार्टी ने आजमगढ़ की दो विधानसभा सीटों से अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। सगड़ी विधानसभा सीट से वंदना सिंह और फूलपुर पवई सीट से रामसूरत राजभर को प्रत्याशी बनाया है। वंदना सिंह पूर्व बसपा विधायक रहे स्व. सर्वेश सिंह सीपू की पत्नी हैं।
2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और विधायक बनीं थीं। हाल ही में वह भाजपा में शामिल हुईं थीं। पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं फूलपुर पवई विधानसभा सीट से विधायक अरुणकांत यादव का टिकट कट गया है। इस सीट से भाजपा ने रामसूरत राजभर को प्रत्याशी बनाया है।
निषाद पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं रामसूरत
रामसूरत राजभर 2017 का विधानसभा चुनाव निषाद पार्टी से फूलपुर पवई विधानसभा क्षेत्र से लड़ चुके हैं। वह इसी विधानसभा क्षेत्र के मक्खापुर गांव के निवासी भी है। उन्होंने 1999 में आजमगढ़ सदर लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था।
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सगड़ी में वंदना सिंह को छोड़कर आधी आबादी को नहीं मिला प्रतिनिधित्व का मौका
विधानसभा चुनाव आते ही राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात तेज हो गई है। मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिले के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र सगड़ी में सिर्फ एक बार महिला को विधायक बनने का मौका मिला। 2017 में वंदना सिंह ने बसपा से जीत दर्ज की थी।
सगड़ी विधानसभा से सबसे पहले 1952 में सोशलिस्ट पार्टी के स्वामी सत्यानंद ने चुनाव जीता था। वहीं उसके बाद 1953 में सोशलिस्ट पार्टी के विश्राम राय ने चुनाव जीता। 1957 में इंद्र भूषण गुप्ता निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते और पहली बार 1962 में कांग्रेस ने इंद्रासन सिंह के रूप में सगड़ी से चुनाव जीता था।
1967 में मुंशी नर्वदेश्वर लाल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते इसके बाद 1969 में रामकुमार सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। 1974 में राम सुंदर पांडेय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते और 1977 में रामजन्म यादव जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। सर्वेश सिंह सीपू की हत्या के कारण 2017 के विधानसभा चुनाव में सर्वेश सिंह सीपू की पत्नी वंदना सिंह बसपा के टिकट से चुनाव जीत कर विधायक बनीं। उन्होंने बसपा से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है।