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Azamgarh News: पर्यावरण संकट के समाधान के लिए एकजुट हों

Mon, 23 Jun 2025 11:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jun 2025 11:54 PM IST
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Unite to solve the environmental crisis
लाटघाट। प्रकृति और मनुष्य के आपसी संबंधों पर आधारित विमर्श का आयोजन सोमवार को समीर प्रकृति संग्रहालय केशवपुर लाटघाट में शुरुआत समिति के तत्वावधान में किया गया। इस दौरान पर्यावरण संकट के समाधान के लिए एकजुट होने पर जोर दिया गया।
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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. अनिल राय ने कहा, ता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या : वैदिक श्लोक भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति आदर और स्नेह का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी को मां मानने की परंपरा हमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाती है। आज यही पृथ्वी माता पर्यावरण प्रदूषण के कारण संकट में है, जिससे निपटना हम सबकी जिम्मेदारी है।
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मुख्य अतिथि प्रो. हिमांशु शेखर झा ने कहा कि वैदिक काल से आधुनिक युग तक के धर्मग्रंथों और साहित्य में मनुष्य और प्रकृति के सामंजस्य के उदाहरण मिलते हैं, लेकिन वर्तमान समय में वह संतुलन बिगड़ चुका है। इसका दुष्परिणाम मानव और जीव-जंतुओं को भुगतना पड़ रहा है। डाॅ. अमित राय ने लाटघाट क्षेत्र के विकास में युवाओं की भूमिका की सराहना की और संग्रहालय को एक प्रेरणादायी पहल बताया। सामाजिक कार्यकर्ता शेषनाथ राय ने कहा कि पंचायतों में पर्यावरण हितैषी प्रतिनिधियों का चुनाव जरूरी है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हवलदार यादव ने प्रशासन और आमजन दोनों से पर्यावरण संकट के समाधान में एकजुट होने का आह्वान किया। भाजपा नेता मनीष मिश्रा ने एक पेड़ मां के नाम जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। अरविंद जयसवाल और घनश्याम पटेल ने युवाओं को पर्यावरण जागरूकता के लिए मीडिया और लेखन से जुड़ने की प्रेरणा दी। डाॅ. अलाउद्दीन ने पर्यावरणीय संकट को कोरोना से भी गंभीर बताया।
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एक पत्रिका के संपादक रविंद्र राय ने स्कूलों से हर विद्यार्थी से एक पौधा लगाने और उसका संरक्षण करने की अपील की। राजीव रंजन ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए पौधों की रक्षा को पुण्य कर्म और क्षति पहुंचाने को पाप बताया। कार्यक्रम में शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
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