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Azamgarh News: नहीं था विधायकी का गुरूर, करते थे रिक्शे की सवारी
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आलम बदी आजमी को अंतिम विदाई उमड़ी भीड़। संवाद
आजमगढ़। विधायक आलमबदी आजमी की गिनती ईमानदार नेताओं में होती थी। किसी भी राजनीतिक दल का नेता हो वह आलमबदी का सम्मान करता था। हर कोई उनकी सादगी की तारीफ करता था। इसकी सादगी का परिणाम था निजामाबाद की जनता उनके ऊपर विश्वास करती थी और उन्हें पांच बार अपना प्रतिनिधि चुना। न विधायक बनने का गुरुर और ना ही कोई दिखावा। नील और टीनोपाल से लकलक कुर्ता पायजामा पहने और सिर पर टोपी लगाए आलमबदी को शायद ही जिले का कोई व्यक्ति हो जो जानता और पहचानता न हो।
जहां आज लोग विधायक बनने के बाद अपने समर्थकों और लाव लश्कर के साथ चलना शुरू कर देते हैं। वहीं, सपा विधायक आलमबदी न किसी लाव लश्कर और ना ही किसी दिखावे पर भरोसा करते थे। गाड़ी नहीं है तो वह रिक्शे पर बैठकर ही शहर में घूम लेते थे। वह एक छोटी सी दुकान पर बैठकर चाय पीने से भी गुरेज नहीं करते थे।
अगर उनके क्षेत्र में किसी सड़क का निर्माण हो रहा है तो वह सड़क पर बैठकर उसको खोदकर उसके गुणवत्ता की स्वयं जांच करने लगते थे। अगर कमी मिली तो ठेकेदार को फटकार लगाते थे। इसका परिणाम था कि जिले में जहां अन्य विधायकों के यहां काम करने के लिए ठेकेदारों की लाइन लगी रहती थी। वहीं, आलमबदी आजमी के अंडर में बहुत कम ठेकेदार ही काम कराना चाहते थे। सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव और वर्तमान मुखिया अखिलेश यादव भी उनकी बातों को सुनते और उस पर अमल करते थे।
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जहां आज लोग विधायक बनने के बाद अपने समर्थकों और लाव लश्कर के साथ चलना शुरू कर देते हैं। वहीं, सपा विधायक आलमबदी न किसी लाव लश्कर और ना ही किसी दिखावे पर भरोसा करते थे। गाड़ी नहीं है तो वह रिक्शे पर बैठकर ही शहर में घूम लेते थे। वह एक छोटी सी दुकान पर बैठकर चाय पीने से भी गुरेज नहीं करते थे।
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अगर उनके क्षेत्र में किसी सड़क का निर्माण हो रहा है तो वह सड़क पर बैठकर उसको खोदकर उसके गुणवत्ता की स्वयं जांच करने लगते थे। अगर कमी मिली तो ठेकेदार को फटकार लगाते थे। इसका परिणाम था कि जिले में जहां अन्य विधायकों के यहां काम करने के लिए ठेकेदारों की लाइन लगी रहती थी। वहीं, आलमबदी आजमी के अंडर में बहुत कम ठेकेदार ही काम कराना चाहते थे। सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव और वर्तमान मुखिया अखिलेश यादव भी उनकी बातों को सुनते और उस पर अमल करते थे।
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