{"_id":"667de9af478b50c5d8048a74","slug":"there-is-a-school-where-a-board-of-no-admission-is-put-up-and-in-the-other-only-two-children-study-azamgarh-news-c-258-1-svns1002-117151-2024-06-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: एक स्कूल ऐसा जहां लगा नो एडमिशन का बोर्ड तो दूसरे में सिर्फ दो बच्चे पढ़ते हैं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: एक स्कूल ऐसा जहां लगा नो एडमिशन का बोर्ड तो दूसरे में सिर्फ दो बच्चे पढ़ते हैं
विज्ञापन
आजमगढ़। आजमगढ़। जिले में सरायमीर के मिर्जापुर विद्यालय सरायमीर में बेहतर सुविधाओं के कारण यहां 500 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। यहां नो एडमिशन का बोर्ड लगा है। वहीं अहरौला के उच्च प्राथमिक विद्यालय फरीदपुर में अव्यवस्था के कारण सिर्फ दो बच्चे ही पढ़ते हैं।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की दशा और दिशा सुधारने के लिए शासन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कहीं परिषदीय विद्यालय कान्वेंट को टक्कर दे रहें तो कहीं अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। जहां स्मार्ट क्लास, खेलने का परिसर, वाचनालय और पुस्तकालय की सुविधा है वहां तो दाखिले की होड़ मची रहती है, लेकिन जहां कोई सुविधा नहीं वहां दाखिले के लिए बच्चे ही नहीं आते हैं। ऐसे में 28 जून से विद्यालय खुलने पर दाखिले में बढ़ोतरी होगी या कमी आएगी, यह भविष्य के गर्भ में है।
जिले में कुल 2706 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। जिसमें 1724 प्राथमिक, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय हैं। उक्त विद्यालयों में सुधार लाने के लिए शासन ने कायाकल्प योजना लाई। जिससे कि स्कूल को और विकसित किया जा सके।
विज्ञापन
वहीं, जिले में कुछ ऐसे भी शिक्षक हैं, जिन्होंने निजी स्तर पर सरकारी स्कूल की दशा और दिशा बदल दी है। नतीजा यह है कि अब इन परिषदीय स्कूलों में अच्छे घरों के बच्चे भी पढ़ने लगे हैं। यह स्कूल परिषदीय स्कूल के शिक्षकों के लिए नजीर बन गए हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों ने निजी खर्च पर स्मार्ट क्लास, खेलने का परिसर, वाचनालय और पुस्तकालय तक का निर्माण कराया है।
इन स्कूलों के सभी बच्चों के लिए बेंच और कुर्सी भी है। यह स्कूल अब कान्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे विद्यालय हैं जहां अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला नहीं करा रहे हैं। जिससे विद्यालयों में कहीं दो तो कहीं एक दर्जन ही बच्चों का दाखिला है।
0000
केस-1
यहां तो सिर्फ दो बच्चे पंजीकृत
अहरौला। शिक्षा क्षेत्र अहरौला के उच्च प्राथमिक विद्यालय फरीदपुर में अव्यवस्था है। यहां मात्र दो बच्चे ही पंजीकृत हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए एक शिक्षक की तैनाती की गई है। वह भी इन दिनों मेडिकल लीव पर हैं।
00
केस-2
यहां चलती स्मार्ट क्लास
अहरौला। शिक्षा क्षेत्र अहरौला प्राथमिक विद्यालय भेदौरा में अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई होती है। यह पूरा विद्यालय हाईटेक है। यहां बच्चे स्क्रीन पर स्मार्ट क्लास में पढ़ाई करते हैं। प्रधानाध्यापक सोमनाथ गुप्ता ने बताया छात्रों की संख्या 208 है। यहां कुल शिक्षकों संख्या 10 है। यहां एडमिशन के लिए बच्चे आते हैं।
00
केस-3
यहां बच्चों को मिल रही सभी सुविधाएं
मेंहनगर। गौरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय द्वितीय (इंग्लिश मीडियम) कान्वेंट स्कूलों को भी को टक्कर दे रहा है। यहां तैनात प्रधानाध्यापक अनिल शर्मा ने बताया कि 167 बच्चों को उच्च और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए सबसे बेहतर प्रयास किया गया था। यहां बच्चों को हर वो सुविधा मिलती है जो कान्वेंट के विद्यालयों में दी जाती है। यहां नामांकन के लिए बच्चों की संख्या बढ़ती ही जाती है।
00
केस-4
यहां लगता नो एडमिशन का बोर्ड
सरायमीर। शिक्षा क्षेत्र मिर्जापुर के कंपोजिट विद्यालय सरायमीर में बेहतर सुविधा मिलती है। यहां करीब 500 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। प्रभारी प्रधानाध्यापक भवानी शंकर सिंह ने बताया कि यहां बच्चों को कान्वेंट विद्यालयों जैसी सुविधाएं मिलती है। यहां कक्ष में सीसीटीवी कैमरे, साउंड सिस्टम, लाइब्रेरी, इंग्लिश कार्नर, एजुकेशनल पार्क, शैक्षणिक भ्रमण होता है। इसके साथ ही अन्य सुविधा दी जाती है।
00
367 स्कूलों के जर्जर भवनों से विद्यार्थियों को खतरा :
परिषदीय स्कूलों में जर्जर और निष्प्रयोज्य भवनों का ध्वस्तीकरण न होने से बच्चों के लिए जान माल का खतरा बना हुआ है। क्योंकि बारिश के सीजन में ये जर्जर भवन कभी भी ढह सकते हैं। जिले में अगले दो से तीन दिनों में मानसून भी आ जाएगा। उधर 28 जून से बच्चे भी स्कूल आने लगेंगे। ऐसे में 367 स्कूलों के जर्जर भवन विद्यार्थियों के लिए खतरा बने हुए हैं।
00
शासन की ओर से विद्यालयों की दशा में सुधार के लिए कायाकल्प योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत ज्यादातर विद्यालयों की दशा और दिशा दोनों में सुधार हुआ है। स्मार्ट क्लास का भी संचालन किया जा रहा है। आगे और बेहतर होगा इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है।- समीर, बीएसए आजमगढ़।
विज्ञापन
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की दशा और दिशा सुधारने के लिए शासन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कहीं परिषदीय विद्यालय कान्वेंट को टक्कर दे रहें तो कहीं अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। जहां स्मार्ट क्लास, खेलने का परिसर, वाचनालय और पुस्तकालय की सुविधा है वहां तो दाखिले की होड़ मची रहती है, लेकिन जहां कोई सुविधा नहीं वहां दाखिले के लिए बच्चे ही नहीं आते हैं। ऐसे में 28 जून से विद्यालय खुलने पर दाखिले में बढ़ोतरी होगी या कमी आएगी, यह भविष्य के गर्भ में है।
विज्ञापन
जिले में कुल 2706 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। जिसमें 1724 प्राथमिक, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय हैं। उक्त विद्यालयों में सुधार लाने के लिए शासन ने कायाकल्प योजना लाई। जिससे कि स्कूल को और विकसित किया जा सके।
विज्ञापन
वहीं, जिले में कुछ ऐसे भी शिक्षक हैं, जिन्होंने निजी स्तर पर सरकारी स्कूल की दशा और दिशा बदल दी है। नतीजा यह है कि अब इन परिषदीय स्कूलों में अच्छे घरों के बच्चे भी पढ़ने लगे हैं। यह स्कूल परिषदीय स्कूल के शिक्षकों के लिए नजीर बन गए हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों ने निजी खर्च पर स्मार्ट क्लास, खेलने का परिसर, वाचनालय और पुस्तकालय तक का निर्माण कराया है।
इन स्कूलों के सभी बच्चों के लिए बेंच और कुर्सी भी है। यह स्कूल अब कान्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे विद्यालय हैं जहां अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला नहीं करा रहे हैं। जिससे विद्यालयों में कहीं दो तो कहीं एक दर्जन ही बच्चों का दाखिला है।
0000
केस-1
यहां तो सिर्फ दो बच्चे पंजीकृत
अहरौला। शिक्षा क्षेत्र अहरौला के उच्च प्राथमिक विद्यालय फरीदपुर में अव्यवस्था है। यहां मात्र दो बच्चे ही पंजीकृत हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए एक शिक्षक की तैनाती की गई है। वह भी इन दिनों मेडिकल लीव पर हैं।
00
केस-2
यहां चलती स्मार्ट क्लास
अहरौला। शिक्षा क्षेत्र अहरौला प्राथमिक विद्यालय भेदौरा में अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई होती है। यह पूरा विद्यालय हाईटेक है। यहां बच्चे स्क्रीन पर स्मार्ट क्लास में पढ़ाई करते हैं। प्रधानाध्यापक सोमनाथ गुप्ता ने बताया छात्रों की संख्या 208 है। यहां कुल शिक्षकों संख्या 10 है। यहां एडमिशन के लिए बच्चे आते हैं।
00
केस-3
यहां बच्चों को मिल रही सभी सुविधाएं
मेंहनगर। गौरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय द्वितीय (इंग्लिश मीडियम) कान्वेंट स्कूलों को भी को टक्कर दे रहा है। यहां तैनात प्रधानाध्यापक अनिल शर्मा ने बताया कि 167 बच्चों को उच्च और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए सबसे बेहतर प्रयास किया गया था। यहां बच्चों को हर वो सुविधा मिलती है जो कान्वेंट के विद्यालयों में दी जाती है। यहां नामांकन के लिए बच्चों की संख्या बढ़ती ही जाती है।
00
केस-4
यहां लगता नो एडमिशन का बोर्ड
सरायमीर। शिक्षा क्षेत्र मिर्जापुर के कंपोजिट विद्यालय सरायमीर में बेहतर सुविधा मिलती है। यहां करीब 500 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। प्रभारी प्रधानाध्यापक भवानी शंकर सिंह ने बताया कि यहां बच्चों को कान्वेंट विद्यालयों जैसी सुविधाएं मिलती है। यहां कक्ष में सीसीटीवी कैमरे, साउंड सिस्टम, लाइब्रेरी, इंग्लिश कार्नर, एजुकेशनल पार्क, शैक्षणिक भ्रमण होता है। इसके साथ ही अन्य सुविधा दी जाती है।
00
367 स्कूलों के जर्जर भवनों से विद्यार्थियों को खतरा :
परिषदीय स्कूलों में जर्जर और निष्प्रयोज्य भवनों का ध्वस्तीकरण न होने से बच्चों के लिए जान माल का खतरा बना हुआ है। क्योंकि बारिश के सीजन में ये जर्जर भवन कभी भी ढह सकते हैं। जिले में अगले दो से तीन दिनों में मानसून भी आ जाएगा। उधर 28 जून से बच्चे भी स्कूल आने लगेंगे। ऐसे में 367 स्कूलों के जर्जर भवन विद्यार्थियों के लिए खतरा बने हुए हैं।
00
शासन की ओर से विद्यालयों की दशा में सुधार के लिए कायाकल्प योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत ज्यादातर विद्यालयों की दशा और दिशा दोनों में सुधार हुआ है। स्मार्ट क्लास का भी संचालन किया जा रहा है। आगे और बेहतर होगा इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है।- समीर, बीएसए आजमगढ़।