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गांव में नहीं हैं शौचालय के पात्र, वापस ले लें धन
Azamgrah
Updated Wed, 09 May 2018 11:42 PM IST
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शौचालय
आजमगढ़। जनपद को ओडीएफ करने की दिशा में आजमगढ़ अन्य जनपदों की अपेक्षा काफी पिछड़ा हुआ है। ऐसे में सचिवों द्वारा जिला पंचायत राज कार्यालय की मुश्किलें और बढ़ाई जा रही है। ग्राम पंचायतों को भेजे गए धन को उनके द्वारा लौटाया जा रहा है। उनके द्वारा कहा जा रहा है गांव में कोई पात्र लाभार्थी ऐसा नहीं है जिसे शौचालय दिया जा सके।
इस पर जिला पंचायत राज अधिकारी के निर्देश पर ऐसे सचिवों को नोटिस जारी कर प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। बाद में इन प्रमाण पत्रों के आधार पर गांव में शौचालयों की स्थिति की जांच कराकर गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
जनपद में जब 2012 में बेस लाइन सर्वे हुआ था तो उसके छह लाख 38 हजार 881 परिवार ऐसे मिले थे जिनके पास शौचालय नहीं थे। इसके अलावा एक लाख 29 हजार 224 परिवार ऐसे थे जिनके पास शौचालय थे। विगत चार साल में जनपद में हुए शौचालय निर्माण की स्थिति देखें तो वर्ष 2014 में कुल 10710, 2015 में 10092, 2016 में 16154 और 2017 में 93564 शौचालयों का निर्माण हुआ। वहीं 2018 में अब तक 10452 शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है।
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इस प्रकार अगर देखें तो इन चार सालों में अब तक कुल एक लाख 40 हजार 972 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। लेकिन अभी चार लाख 97 हजार 909 परिवार ऐसे हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। जिला प्रशासन इन परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है।
लेकिन सचिवों की कार्यशैली ने प्रशासन को मुश्किलें बढ़ा दी है। सचिवों ने गांव में पात्र व्यक्ति न होने का हवाला देते हुए अब तक लगभग 25 लाख रुपये से अधिक के चेक को वापस कर दिया है। लेकिन जिन गांवों से यह चेक वापस लौटे हैं उन गांवों को अब तक ओडीएफ घोषित नहीं किया गया है।
ठेकमा विकास खंड के अहिरौली ग्राम पंचायत में शौचालय निर्माण के लिए भेजा गया एक लाख आठ हजार रुपये वापस करने के लिए चेक जिला पंचायत राज कार्यालय भेजा गया है। लेकिन एडीओ पंचायत अखिलेश कुमार राय की मानें तो अभी इस गांव को ओडीएफ घोषित नहीं किया गया है। कुछ ऐसा ही हाल तहबरपुर विकास खंड के अभिलाई में तीन लाख रुपये शौचालय के पैसे को वापस किया गया है।
जबकि एडीओ पंचायत तहबरपुर टीपी सिंह की मानें तो तहबरपुर विकास खंड की कोई ग्राम पंचायत अभी ओडीएफ नहीं हुई। अजमतगढ़ विकास खंड के खतीबपुर ग्राम पंचायत का डेढ़ लाख रुपये का चेक वापस किया गया है। एडीओ पंचायत टीपी सिंह की मानें तो ग्राम सभा के खाते में दूसरे गांव का पैसा पहुंच गया था जिसे वापस किया गया है।
शौचालय निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों को पैसा भेजा गया है। लेकिन शौचालय के पात्र व्यक्ति न होने का हवाला देकर सचिवों द्वारा इस धन को वापस लौटाया जा रहा है। फिलहाल उन्हें प्रमाण पत्र देने के लिए नोटिस जारी किया गया है कि वह गांव के संतृप्त होने का प्रमाणपत्र दें। इस प्रमाण पत्र के आने के बाद गांव की जांच कराई जाएगी। अगर इनके द्वारा गलत प्रमाण पत्र दिया गया होगा तो कार्रवाई की जाएगी।
आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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इस पर जिला पंचायत राज अधिकारी के निर्देश पर ऐसे सचिवों को नोटिस जारी कर प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। बाद में इन प्रमाण पत्रों के आधार पर गांव में शौचालयों की स्थिति की जांच कराकर गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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जनपद में जब 2012 में बेस लाइन सर्वे हुआ था तो उसके छह लाख 38 हजार 881 परिवार ऐसे मिले थे जिनके पास शौचालय नहीं थे। इसके अलावा एक लाख 29 हजार 224 परिवार ऐसे थे जिनके पास शौचालय थे। विगत चार साल में जनपद में हुए शौचालय निर्माण की स्थिति देखें तो वर्ष 2014 में कुल 10710, 2015 में 10092, 2016 में 16154 और 2017 में 93564 शौचालयों का निर्माण हुआ। वहीं 2018 में अब तक 10452 शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है।
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इस प्रकार अगर देखें तो इन चार सालों में अब तक कुल एक लाख 40 हजार 972 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। लेकिन अभी चार लाख 97 हजार 909 परिवार ऐसे हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। जिला प्रशासन इन परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है।
लेकिन सचिवों की कार्यशैली ने प्रशासन को मुश्किलें बढ़ा दी है। सचिवों ने गांव में पात्र व्यक्ति न होने का हवाला देते हुए अब तक लगभग 25 लाख रुपये से अधिक के चेक को वापस कर दिया है। लेकिन जिन गांवों से यह चेक वापस लौटे हैं उन गांवों को अब तक ओडीएफ घोषित नहीं किया गया है।
ठेकमा विकास खंड के अहिरौली ग्राम पंचायत में शौचालय निर्माण के लिए भेजा गया एक लाख आठ हजार रुपये वापस करने के लिए चेक जिला पंचायत राज कार्यालय भेजा गया है। लेकिन एडीओ पंचायत अखिलेश कुमार राय की मानें तो अभी इस गांव को ओडीएफ घोषित नहीं किया गया है। कुछ ऐसा ही हाल तहबरपुर विकास खंड के अभिलाई में तीन लाख रुपये शौचालय के पैसे को वापस किया गया है।
जबकि एडीओ पंचायत तहबरपुर टीपी सिंह की मानें तो तहबरपुर विकास खंड की कोई ग्राम पंचायत अभी ओडीएफ नहीं हुई। अजमतगढ़ विकास खंड के खतीबपुर ग्राम पंचायत का डेढ़ लाख रुपये का चेक वापस किया गया है। एडीओ पंचायत टीपी सिंह की मानें तो ग्राम सभा के खाते में दूसरे गांव का पैसा पहुंच गया था जिसे वापस किया गया है।
शौचालय निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों को पैसा भेजा गया है। लेकिन शौचालय के पात्र व्यक्ति न होने का हवाला देकर सचिवों द्वारा इस धन को वापस लौटाया जा रहा है। फिलहाल उन्हें प्रमाण पत्र देने के लिए नोटिस जारी किया गया है कि वह गांव के संतृप्त होने का प्रमाणपत्र दें। इस प्रमाण पत्र के आने के बाद गांव की जांच कराई जाएगी। अगर इनके द्वारा गलत प्रमाण पत्र दिया गया होगा तो कार्रवाई की जाएगी।
आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, जिला पंचायत राज अधिकारी।