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दूध मिले तब तो पिलाएं बच्चों को
अंबुज राय, आजमगढ़
Updated Fri, 03 Jul 2015 12:06 AM IST
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प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की सेहत सुधारने के लिए दूध की जरूरत जिम्मेदारों के लिए गले की फांस साबित हो रही है। 10-20 लीटर दूध नहीं, बलि्क एक लाख से अधिक लीटर दूध आएगा कहां से, इसके लेकर शिक्षक परेशान हैं। सरकार ने बच्चों को हफ्ते में एक दिन बुधवार को दो सौ मिली की दर से प्रत्येक बच्चे को दूध पिलाने का शासनादेश जारी तो कर दिया लेकिन उसमें इस बात का उल्लेख नहीं है कि दूध की व्यवस्था कहां से होगी। कहा जा रहा है कि इसकी व्यवस्था विद्यालय के प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान को स्वत: करनी होगी।
अगर जनपद में विद्यालयों की स्थिति पर नजर डालें तो पूरे जनपद में 3594 विद्यालय हैं। इनमें परिषदीय प्राथमिक विद्यालय 2267, परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय 983, अनुदानित उच्च प्राथमिक विद्यालय 117, समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालय 83, राजकीय विद्यालय आठ, माध्यमिक अनुदानित विद्यालय 97, अनुदानित मदरसा 18 और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की संख्या 21 है। इन विद्यालयों में कुल पांच लाख 14 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
शासन द्वारा इन बच्चों को प्रत्येक सप्ताह में बुधवार को दो सौ मिली उबला हुआ दूध देना है। इसके लिए जनपद में कुल एक लाख दो हजार आठ सौ लीटर की आवश्यकता होगी लेकिन यह दूध कहां से आएगा, इसका शासनादेश में कोई उल्लेख नहीं है। वहीं विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और खंड शिक्षा अधिकारियों केे यह चिंता सताए जा रही है कि वह शासनादेश का पालन किस प्रकार करें। शासन की ओर से जुलाई से मध्याह्न भोजन के मीनू में भी परिवर्तन किया गया है।
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मैं अर्थसंख्या कार्यालय की ओर से जारी की गई पुस्तक की तलाश कर रहा हूं क्योंकि उसमें दिया हुआ है कि जिले में कितने लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसके बाद ही कुछ बता पाना संभव होगा। - गनपत राम, प्रबंधक (जिला दुग्ध संघ)
बच्चों के दूध की व्यवस्था संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान को करनी होगी। जिस प्रकार गांवों में लोग अपने घर पर दूध की व्यवस्था करते हैं, उसी प्रकार विद्यालयों में भी दूध की व्यवस्था करनी होगी क्योंकि जब शासनादेश आया है तो उसका पालन करना ही है। - राकेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
जुलाई से नई व्यवस्था के तहत मिलने वाला भोजन
दिन भोजन
सोमवार रोटी-सब्जी, (सोयाबीन या दाल की बड़ी परोसी जाएगी)
मंगलवार चावल-सब्जी के साथ दाल या चावल सांभर
बुधवार कोफ्ता-चावल, (खीर के स्थान पर उबला हुआ दूध)
गुरुवार रोटी-सब्जी और दाल
शुक्रवार सोयाबीन के साथ तहरी
शनिवार सोयाबीन की सब्जी, चावल
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अगर जनपद में विद्यालयों की स्थिति पर नजर डालें तो पूरे जनपद में 3594 विद्यालय हैं। इनमें परिषदीय प्राथमिक विद्यालय 2267, परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय 983, अनुदानित उच्च प्राथमिक विद्यालय 117, समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालय 83, राजकीय विद्यालय आठ, माध्यमिक अनुदानित विद्यालय 97, अनुदानित मदरसा 18 और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की संख्या 21 है। इन विद्यालयों में कुल पांच लाख 14 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
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शासन द्वारा इन बच्चों को प्रत्येक सप्ताह में बुधवार को दो सौ मिली उबला हुआ दूध देना है। इसके लिए जनपद में कुल एक लाख दो हजार आठ सौ लीटर की आवश्यकता होगी लेकिन यह दूध कहां से आएगा, इसका शासनादेश में कोई उल्लेख नहीं है। वहीं विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और खंड शिक्षा अधिकारियों केे यह चिंता सताए जा रही है कि वह शासनादेश का पालन किस प्रकार करें। शासन की ओर से जुलाई से मध्याह्न भोजन के मीनू में भी परिवर्तन किया गया है।
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मैं अर्थसंख्या कार्यालय की ओर से जारी की गई पुस्तक की तलाश कर रहा हूं क्योंकि उसमें दिया हुआ है कि जिले में कितने लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसके बाद ही कुछ बता पाना संभव होगा। - गनपत राम, प्रबंधक (जिला दुग्ध संघ)
बच्चों के दूध की व्यवस्था संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान को करनी होगी। जिस प्रकार गांवों में लोग अपने घर पर दूध की व्यवस्था करते हैं, उसी प्रकार विद्यालयों में भी दूध की व्यवस्था करनी होगी क्योंकि जब शासनादेश आया है तो उसका पालन करना ही है। - राकेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
जुलाई से नई व्यवस्था के तहत मिलने वाला भोजन
दिन भोजन
सोमवार रोटी-सब्जी, (सोयाबीन या दाल की बड़ी परोसी जाएगी)
मंगलवार चावल-सब्जी के साथ दाल या चावल सांभर
बुधवार कोफ्ता-चावल, (खीर के स्थान पर उबला हुआ दूध)
गुरुवार रोटी-सब्जी और दाल
शुक्रवार सोयाबीन के साथ तहरी
शनिवार सोयाबीन की सब्जी, चावल