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करेंट लगने से खेल रहे दो बच्चों की गई जान
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Sat, 27 Aug 2016 12:00 AM IST
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तो करंट लगने से हुई थी मौत
- फोटो : अमर उजाला
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बरदह थाना क्षेत्र के सोनहरा गांव में शुक्रवार की शाम करेंट लगने से चार वर्ष के दो बच्चों की मौत हो गई। दोनों बच्चे शाम को घर के पास खेल रहे थे। वहां, मौजूद बिजली पोल में लपेटे गए अिर्थंग के तार को पकड़ लिए। इस दौरान करेंट लगने से दोनों झुलस गए थे। मासूम बच्चों की मौत से दो घरों में कोहराम मचा है। वहीं गांव के लोगों में विद्युत कर्मचारियों के प्रति आक्रोश है।
सोनहरा गांव निवासी शिवकुमार का चार वर्षीय बेटा शानू और पड़ोसी प्रमोद का चार साल का बेटा आदर्श दोनों शुक्रवार की शाम घर के पास खेल रहे थे। इनके दरवाजे के सामने बिजली का पोल गड़ा है। इस पोल में लगे अर्थिंग का तार काफी दिन पहले टूटकर गिर गया था। लोगों ने बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को तार ठीक करने की शिकायत किए। लेकिन उनके कानों में जू तक नहीं रेंगी। तार नहीं जोड़ा सका।
इस पर गांव के लोग उक्त तार को पोल से लपेटकर छोड़ दिए। शुक्रवार की शाम घर के पास मौजूद पोल के पास शानू और आदर्श खेल रहे थे। इस दौरान तार को पकड़ लिए और करेंट लगने से दोनों बच्चे झुलस गए। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया। आननफानन में दोनों बच्चों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन हालत गंभीर देख डाक्टर ने उन्हें रेफर कर दिया। घर के लोग बच्चों को जौनपुर शहर ले जा रहे थे कि रास्ते में दोनों की मौत हो गई। शानू दो बड़ी बहनों का इकलौता भाई था। जबकि आदर्श दो भाई एक बहन में छोटा था।
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सोनहरा गांव निवासी शिवकुमार का चार वर्षीय बेटा शानू और पड़ोसी प्रमोद का चार साल का बेटा आदर्श दोनों शुक्रवार की शाम घर के पास खेल रहे थे। इनके दरवाजे के सामने बिजली का पोल गड़ा है। इस पोल में लगे अर्थिंग का तार काफी दिन पहले टूटकर गिर गया था। लोगों ने बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को तार ठीक करने की शिकायत किए। लेकिन उनके कानों में जू तक नहीं रेंगी। तार नहीं जोड़ा सका।
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इस पर गांव के लोग उक्त तार को पोल से लपेटकर छोड़ दिए। शुक्रवार की शाम घर के पास मौजूद पोल के पास शानू और आदर्श खेल रहे थे। इस दौरान तार को पकड़ लिए और करेंट लगने से दोनों बच्चे झुलस गए। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया। आननफानन में दोनों बच्चों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन हालत गंभीर देख डाक्टर ने उन्हें रेफर कर दिया। घर के लोग बच्चों को जौनपुर शहर ले जा रहे थे कि रास्ते में दोनों की मौत हो गई। शानू दो बड़ी बहनों का इकलौता भाई था। जबकि आदर्श दो भाई एक बहन में छोटा था।
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