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Azamgarh News: पिछली पशुगणना से आधी रह गईं गायें, 1,72,649 भैंसें भी हुईं कम

Mon, 05 Jan 2026 10:49 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 Jan 2026 10:49 PM IST
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The number of cows has been halved since the last livestock census, and the number of buffaloes has also decreased by 1,72,649.
आजमगढ़। जिले में हुई 21वीं पशुगणना में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। मुख्य दुधारू पशु गाय, भैंस और बकरी की संख्या में कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट बता रही है कि लोगों का पशुपालन से मोह भंग हो रहा है। पशुओं की संख्या कम होने से दूध का उत्पादन भी जिले में कम हुआ है इसके बाद भी जिले में धड़ाधड़ मिठाई और दूध से बने उत्पादों की दुकानें खुल रही हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है इन दुकानों पर दूध की कोई कमी नहीं होती है। आखिर यह दूध कहां से आता है यह बताने वाला कोई नहीं है। पांच साल में 2,04,490 गायें कम हो गईं। जोकि पिछली पशुगणना से लगभग आधी हैं। 1,72,649 भैंसें और 11,944 बकरियां कम हुईं हैं।
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जिले में दुधारू पशुओं की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जो पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से चिंताजनक है। 21वीं पशुगणना के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में जिले में भैंसों की संख्या में 172649 की कमी आई है, जबकि गायों की संख्या में 2,14,498 की कमी दर्ज की गई है। 21वीं पशुगणना 25 अक्तूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक चली थी, जिसके आंकड़े अब सामने आए हैं। इससे पहले वर्ष 2019 में 20वीं पशुगणना हुई थी। 21वीं पशुगणना में जिले में 2,55,960 लाख गाएंं, 304914 लाख भैंसें और 10033 भेड़ें, 287709 बकरियां शामिल थीं। वहीं 20वीं पशुगणना में 4,60,450 गाएं, 4,77,563 भैंस, 10885 भेंड़, 299653 बकरियों की संख्या थी।
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भैंस पालन में आई गिरावट
पशुपालकों के अनुसार भैंस पालन मुख्य रूप से दूध की बिक्री के लिए किया जाता है, क्योंकि भैंस का दूध गाढ़ा होता है और उसमें घी अधिक निकलता है। डेयरियों और घरों में इसकी मांग ज्यादा रहती है। इसके बावजूद भैंसों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पशुपालन विभाग के अनुसार इसका प्रमुख कारण चारे की बढ़ती कीमत, चारागाह की भूमि में कमी, पशुपालन का बढ़ता खर्च और स्थिर आय है। इसके अलावा पशु चोरी और मीट के लिए कटान भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। एक भैंस की कीमत एक लाख रुपये से अधिक होने के कारण मवेशी चोर इन्हें निशाना बना रहे हैं।
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पशुपालकों की पीड़ा
- फोटो संख्या- अब घरों में पशु रखने की जगह नहीं बची है। खेत खाली नहीं रहते, जिससे पशुओं को चराने की समस्या बढ़ गई है। चारा बेहद महंगा हो गया है और मजबूरी में बाहर से मंगाना पड़ता है, जिससे पशुपालन घाटे का सौदा बनता जा रहा है।-शकर वर्मा, पशुपालक।
- फोटो संख्या- पहले फसल कटने के बाद खेत खाली रहते थे, जिससे पशुओं को चराने में आसानी होती थी और दूध उत्पादन भी बेहतर होता था। अब हर जमीन पर फसल होने से यह सुविधा खत्म हो गई है।-मुन्ना, पशु पालक।

21वीं पशुगणना पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जिले में पशुओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। यह सिर्फ हमारे यहां नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में 44 प्रतिशत पशुओं की संख्या में कमी आई है। जो यह बताता है लोेगों का पशुपालन से मोह भंग हो रहा है।-डॉ. मुकेश गुप्ता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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