फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   The lowest rain in seven years so far

सात साल में अब तक सबसे कम बारिश

Wed, 11 Jul 2018 11:40 PM IST
संदीप सौरभ सिंह/ Azamgrah
संदीप सौरभ सिंह/ Azamgrah Updated Wed, 11 Jul 2018 11:40 PM IST
विज्ञापन
The lowest rain in seven years so far
सिंचाई के अभाव में पीली पड़ रही धान की नर्सरी
आजमगढ़। बरसात से पहले मौसम विभाग की ओर से इस बार मानसून अच्छा रहने घोषणा की गई थी, लेकिन जनपद में मौसम विभाग की ये भविष्यवाणी फेल होती नजर आ रही है। जुलाई माह का आधा पखवाड़ा निकलने को है, अभी तक एक भी अच्छी बारिश नहीं हुई है।
विज्ञापन


प्री मानसून का भी जनपद में कोई खास नजर नहीं रहा। पिछले सात साल में अब तक सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। ये औसत के 10 फीसदी के भी करीब नहीं है। इससे पहले 2014 में भी कम बारिश दर्ज की गई थी, जिसे सूखा मान लिया गया था। धान की नर्सरी पिछड़ चुकी है, किसान रोपाई से किनारा करने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो 10 दिन और यही स्थिति रही तो सूखा पड़ना तय है।
विज्ञापन


बदलता परिवेश मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणी पर भी भारी पड़ रहा है। जनपद में मानसून की स्थिति ने किसानों की नींद उड़ा रखी है। प्री मानसून के साथ ही इस बार मानसून भी किसानों के साथ छलावा कर निकलता जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जुलाई माह का आधा पखवाड़ा निकलने की ओर है, बारिश के नाम पर किसानों के हिस्से में अभी तक सिर्फ छींटे ही आए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार पिछले सात सालों में अब तक की सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। 10 जुलाई तक मानक के अनुसार औसत रूप में 140.10 एमएम बारिश होनी चाहिए।

इस वर्ष अभी तक मात्र 11.30 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। पिछले सात साल में इससे पहले वर्ष 2014 में इस समय तक सबसे कम 66.6 एमएम बारिश रिकार्ड की गई थी। इस वर्ष पर जनपद सूखे की चपेट में था। बारिश न होने से किसानों की नर्सरी भी पिछड़ चुकी है।

यदि 10 दिन तक यही स्थिति बनी रहती है तो फिर स्थिति और भी गंभीर होगी। मौसम की हालत को देखते हुए किसानों रोपाई से भी किनारा कर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश गुप्ता ने भी स्थिति को गंभीर बताया है।



बारिश न होने से धान की रोपाई और नर्सरी भी पिछड़ चुकी है। यदि कुछ दिन और स्थिति रही तो सूखे जैसी स्थिति हो जाएगी। यदि बारिश होती है तो किसानों को सीधी बुआई करनी चाहिए। देर होने पर किसानों को अन्य फसलों पर ध्यान देना चाहिए।
डॉ. उमेश गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी


पिछले सात साल में 10 जुलाई तक दर्ज की गई बारिश
वर्ष 2018-11.3 एमएम
वर्ष 2017-132.8 एमएम
वर्ष 2016-70.3 एमएम
वर्ष 2015-208.2 एमएम
वर्ष 2014-66.6 एमएम
वर्ष 2013-183.89 एमएम
वर्ष 2012-76.3 एमएम


सीधी बुआई करें किसान
जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश गुप्ता ने बताया कि इस बार बारिश कम होने से किसानों की नर्सरी भी पिछड़ गई है। अब यदि बारिश होती है तो किसानों की सीधी बुआई करनी चाहिए। जनपद में 2.18 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती होती है।

अभी तक मात्र 20 से 25 फीसदी रोपाई ही हो पाई है। बारिश को देख किसान रोपाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसके बाद भी बारिश न होने पर किसान तोरिया, उड़द, मूंग, ज्वार, बाजरा, तिल आदि की खेती कर सकते हैं।

बारिश के साथ रुला रही बिजली
लाटघाट। किसान शशिभूषण मिश्रा निवासी ग्राम बेलकुंडा ने बताया कि गर्मी और बारिश न होने के कारण धान की रोपाई बाधित है। बिजली भी नहीं मिल रही है। किसान परेशान हैं। शिवबालक यादव निवासी ग्राम जमशर नरईपुर ने बताया कि बरसात तो हो ही नहीं रही है।


बिजली भी दो-तीन घंटे मिल रही है। पल्टन यादव ग्राम प्रधान देवारा खास राजा ने कहा कि बिजली की उपलब्धता 24 घंटे में 3-4 घंटे हो रही है। इस कारण रोपाई की हिम्मत नहीं हो रही है। राम अवध मौर्य निवासी ग्राम मोहम्मदपुर विकास खंड अजमतगढ़ ने कहाकि क्षेत्र और जनपद को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। ताकि किसानों को राहत मिल सके।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed