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जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी रहेगी अन्य पिछड़ा वर्ग के पास
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आजमगढ़। सरकार की ओर से जनपद की एकमात्र जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट को पूर्व में हुए आरक्षण में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। हाईकोई के निर्देश के बाद फिर हुए आरक्षण में इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए ही आरक्षित हुई है। आरक्षण की घोषणा के बाद सपा के सामने इस कुर्सी पर अपने कब्जे केे बरकरार रखने की चुनौती होगी।
आज का जिला पंचायत पहले जिला परिषद हुआ करता था। 1995 में यह जिला परिषद से 73वें संशोधन के बाद जिला पंचायत बन गया। इसके बाद हुए चुनाव में इस सीट पर सपा के रामजनम यादव ने बाजी मारी। इसके बाद 2000 में हुए चुनाव में सपा कामेश्वरी देवी को अध्यक्ष बनवाने में कामयाब रही। लेकिन कामेश्वरी देवी के निधन के बाद हुए चुनाव में बसपा की मीरा आजाद 2003 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। 2005 में जब चुनाव हुए तो सपा के हवलदार यादव जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। 2010 में एकबार फिर बसपा की मीरा आजाद जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। लेकिन दो साल बाद ही सपा अविश्वास प्रस्ताव लाई और मीरा यादव 2012 में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुई। फिर 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में मीरा यादव दोबारा जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। अब चूंकि शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट को अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया है। अब देखना है कि सपा अपनी इस सीट को बचाने के लिए क्या करती है। इस कुर्सी केे पाने के लिए कई दावेदार सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है। इस बार सपा में भी इस सीट के लिए कई दावेदारों के सामने आने की बात कही जा रही है। अब सपा से इस सीट पर कौन दावेदारी करेगा इसका फैसला सपा सुप्रीमो करें। वैसे देश और प्रदेश में सत्तारूढ़ दल भाजपा भी इस सीट पर अपने सूखे को खत्म करने का पूरा प्रयास करेगी।
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आज का जिला पंचायत पहले जिला परिषद हुआ करता था। 1995 में यह जिला परिषद से 73वें संशोधन के बाद जिला पंचायत बन गया। इसके बाद हुए चुनाव में इस सीट पर सपा के रामजनम यादव ने बाजी मारी। इसके बाद 2000 में हुए चुनाव में सपा कामेश्वरी देवी को अध्यक्ष बनवाने में कामयाब रही। लेकिन कामेश्वरी देवी के निधन के बाद हुए चुनाव में बसपा की मीरा आजाद 2003 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। 2005 में जब चुनाव हुए तो सपा के हवलदार यादव जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। 2010 में एकबार फिर बसपा की मीरा आजाद जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। लेकिन दो साल बाद ही सपा अविश्वास प्रस्ताव लाई और मीरा यादव 2012 में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुई। फिर 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में मीरा यादव दोबारा जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। अब चूंकि शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट को अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया है। अब देखना है कि सपा अपनी इस सीट को बचाने के लिए क्या करती है। इस कुर्सी केे पाने के लिए कई दावेदार सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है। इस बार सपा में भी इस सीट के लिए कई दावेदारों के सामने आने की बात कही जा रही है। अब सपा से इस सीट पर कौन दावेदारी करेगा इसका फैसला सपा सुप्रीमो करें। वैसे देश और प्रदेश में सत्तारूढ़ दल भाजपा भी इस सीट पर अपने सूखे को खत्म करने का पूरा प्रयास करेगी।
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