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दस माह बाद खुले स्कूल, पढ़ाई शुरू होने के साथ ही स्कूलों में लौटी रौनक
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प्रतिभा निकेतन स्कूल में पढ़ाई करते बच्चें।-प्लान बर की फोटो
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। शासन के निर्देश पर करीब दस माह के इंतजार के बाद से अब कोरोना संक्रमण काल के बाद स्कूलों में रौनक की वापसी होने लगी है। इसकी वजह से अब स्कूलों में रौनक तो लौट ही रही है साथ ही पढ़ाई भी अपने ट्रैक पर लौट आई है। पहले दिन गाइडलाइन के अनुसार 50 फीसद कक्षा-8वीं के बच्चों को बुलाया गया था। जूनियर हाईस्कूल स्तर के विद्यालय खुलने के बाद प्राथमिक स्तर के विद्यालय भी अब मार्च माह के साथ ही खुल जाएंगे।
मेजवां प्रतिनिधि के अनुसार शासनादेश के पहले दिन सिर्फ कक्षा आठ के बच्चों को स्कूल बुलाया गया था। न्यू कैम्ब्रिज सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति ठीक रही। बच्चे काफी उत्साहित दिखे। फिलहाल कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को सप्ताह में दो दिन विद्यालय बुलाने का निर्णय लिया गया है। वहीं क्लास रूम में भी काफी खुला-खुला नजर आ रहा था। पहले जहां एक डेस्क-बेंच पर चार-चार बच्चे बैठे नजर आ रहे थे। वहीं बदली हुई परिस्थियों में एक बेंच पर एक या दो ही बच्चे बैठे हुए थे। क्लास रूम में प्रवेश करते हुए पढ़ाई शुरू हो गई। प्रबंधक नय्यर आजम खान ने बताया कि पहले दिन बच्चों को कोविड-19 के बचाव संबंधी जानकारी दी गई। लंबे समय बाद स्कूल का घंटा बजा और पढ़ाई होने बच्चों भी काफी खुश दिखे।
परिषदीय विद्यालयों में नहीं रही कोई व्यवस्था
लाटघाट। शासन ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए स्कूल खोलने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके पहले ही दिन नियमों का पालन नहीं किया गया। स्कूल में न तो थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था थी और न ही कोई चिकित्सकीय सुविधा। इसकी बानगी शिक्षा क्षेत्र हरैया के पूर्व माध्यमिक विद्यालय हाजीपुर में देखने को मिला। जहां पर कुल 170 नामांकित बच्चे हैं। जिसमें 40 बच्चे आज उपस्थित हुए थे। प्रधानाध्यापक मुन्नीलाल ने बताया कि बच्चों के लिए जो व्यवस्था थर्मल स्क्रीनिंग पल्स मीटर और चिकित्सा की सुविधा नहीं उपलब्ध है। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय खेतापुर पर कुल 204 नामांकित बच्चे हैं। जहां 20 बच्चे उपस्थित हुए। प्रधानाध्यापक विश्राम ने बताया कि अपने स्तर से सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था की गई है।
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शासन के निर्देश पर 10 फरवरी से विद्यालय खोल दिए गए हैं। विद्यालयों में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराया जा रहा है। बच्चों क हाथ धुलाया जा रहा है। कोविड-19 के नियमों का विशेष रूप से पालन करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।
अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।
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मेजवां प्रतिनिधि के अनुसार शासनादेश के पहले दिन सिर्फ कक्षा आठ के बच्चों को स्कूल बुलाया गया था। न्यू कैम्ब्रिज सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति ठीक रही। बच्चे काफी उत्साहित दिखे। फिलहाल कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को सप्ताह में दो दिन विद्यालय बुलाने का निर्णय लिया गया है। वहीं क्लास रूम में भी काफी खुला-खुला नजर आ रहा था। पहले जहां एक डेस्क-बेंच पर चार-चार बच्चे बैठे नजर आ रहे थे। वहीं बदली हुई परिस्थियों में एक बेंच पर एक या दो ही बच्चे बैठे हुए थे। क्लास रूम में प्रवेश करते हुए पढ़ाई शुरू हो गई। प्रबंधक नय्यर आजम खान ने बताया कि पहले दिन बच्चों को कोविड-19 के बचाव संबंधी जानकारी दी गई। लंबे समय बाद स्कूल का घंटा बजा और पढ़ाई होने बच्चों भी काफी खुश दिखे।
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परिषदीय विद्यालयों में नहीं रही कोई व्यवस्था
लाटघाट। शासन ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए स्कूल खोलने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके पहले ही दिन नियमों का पालन नहीं किया गया। स्कूल में न तो थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था थी और न ही कोई चिकित्सकीय सुविधा। इसकी बानगी शिक्षा क्षेत्र हरैया के पूर्व माध्यमिक विद्यालय हाजीपुर में देखने को मिला। जहां पर कुल 170 नामांकित बच्चे हैं। जिसमें 40 बच्चे आज उपस्थित हुए थे। प्रधानाध्यापक मुन्नीलाल ने बताया कि बच्चों के लिए जो व्यवस्था थर्मल स्क्रीनिंग पल्स मीटर और चिकित्सा की सुविधा नहीं उपलब्ध है। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय खेतापुर पर कुल 204 नामांकित बच्चे हैं। जहां 20 बच्चे उपस्थित हुए। प्रधानाध्यापक विश्राम ने बताया कि अपने स्तर से सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था की गई है।
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शासन के निर्देश पर 10 फरवरी से विद्यालय खोल दिए गए हैं। विद्यालयों में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराया जा रहा है। बच्चों क हाथ धुलाया जा रहा है। कोविड-19 के नियमों का विशेष रूप से पालन करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।
अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।