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जगाई थी सामाजिक न्याय की अलख
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 13 Jan 2017 11:21 PM IST
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चंद्रजीत यादव।
- फोटो : azamgarh
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चंद्रजीत यादव का जन्म एक जनवरी 1930 को सरूपहा गांव में मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही प्राप्त करने के बाद एसकेपी इंटर कालेज से इंटर की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीए और लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए और एलएलबी किया। 12 वर्ष की उम्र से ही चंद्रजीत यादव राजनीति में गहरी रूचि रखने लगे थे।
1946 में दिल्ली के लालकिला में आजाद हिंद फौज के सेनानियों पर अंग्रेजी सरकार ने जब राजद्रोह का मुकदमा चलाया था उसे देखने के लिए यह कालेज से भागकर लालकिला जा रहे थे। ट्रेन में मिले एक अध्यापक के समझाने पर रास्ते से वापस लौटे।
लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्ष 1953 में छात्र आंदोलन के दौरान 10 दिन की भूख हड़ताल की। इनके साथ 10 छात्रों को कालेज से निष्कासित कर दिया गया। बाद में पंडित जवाहर लाल नेहरू के हस्तक्षेप के बाद आंदोलन समाप्त हुआ और निष्कासन समाप्त हुआ।
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वर्ष 1954 से आजमगढ़ में वकालत शुरू की। इसके बाद इन्होंने राजनीति में कदम रखा और कई महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया। 25 मई 2007 को 77 वर्ष की आयु में इनका निधन हो गया।
बता दें पूरी दुनिया में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बेहतर समाज और संसार बनाने के लिए विश्व शांति और नि:शस्त्रीकरण के लिए इनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्यों के लिए मरणोपरांत रसियन सरकार ने 12 जून 2007 को 'स्टार आफ एशिया एंड अफ्रीका अवार्ड' से सम्मानित किया।
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1946 में दिल्ली के लालकिला में आजाद हिंद फौज के सेनानियों पर अंग्रेजी सरकार ने जब राजद्रोह का मुकदमा चलाया था उसे देखने के लिए यह कालेज से भागकर लालकिला जा रहे थे। ट्रेन में मिले एक अध्यापक के समझाने पर रास्ते से वापस लौटे।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्ष 1953 में छात्र आंदोलन के दौरान 10 दिन की भूख हड़ताल की। इनके साथ 10 छात्रों को कालेज से निष्कासित कर दिया गया। बाद में पंडित जवाहर लाल नेहरू के हस्तक्षेप के बाद आंदोलन समाप्त हुआ और निष्कासन समाप्त हुआ।
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वर्ष 1954 से आजमगढ़ में वकालत शुरू की। इसके बाद इन्होंने राजनीति में कदम रखा और कई महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया। 25 मई 2007 को 77 वर्ष की आयु में इनका निधन हो गया।
बता दें पूरी दुनिया में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बेहतर समाज और संसार बनाने के लिए विश्व शांति और नि:शस्त्रीकरण के लिए इनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्यों के लिए मरणोपरांत रसियन सरकार ने 12 जून 2007 को 'स्टार आफ एशिया एंड अफ्रीका अवार्ड' से सम्मानित किया।