{"_id":"60c103f98ebc3e01963b6a73","slug":"soil-health-in-lalganj-found-worst-in-soil-test-azamgarh-news-vns593958424","type":"story","status":"publish","title_hn":"मृदा परीक्षण में सबसे खराब मिली लालगंज में मिट्टी की सेहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मृदा परीक्षण में सबसे खराब मिली लालगंज में मिट्टी की सेहत
विज्ञापन
आजमगढ़। सरकार के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा पूरे जनपद में मृदा परीक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके बाद जो रिपोर्ट तैयार हुई उसमें पाया गया कि लालगंज विकास खंड में मिट्टी की हालत सबसे ज्यादा खराब मिली थी। जबकि मार्टीनगंज ब्लाक में नाइट्रोजन की मात्रा अति न्यून पाई गई थी। विभाग की ओर से गोष्ठियों आदि का आयोजन कर इन ब्लाकों के मिट्टी सेहत सुधारने का प्रयास कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। जबकि आज भी क्षेत्र के बहुत से किसानों को नहीं मालूम कि उनके खेत की मिट्टी में किस तत्व की कमी है।
किसानों द्वारा फसलों के उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर उर्वरक का प्रयोग किया जाता है। जिसके कारण उन्हें अपनी फसलों में ज्यादा लागत लगानी पड़ती है। इसे देखते हुए सरकार की ओर से मृदा परीक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की गई। ताकि किसान अपनी खेत की मिट्टी के बारे में जाने और जरूरी पोषक तत्वों का प्रयोग कर कम लागत में अच्छी उपज प्राप्त करें। लेकिन वर्तमान में सरकार की यह योजना पूर्ण रूप से सफल होती नहीं दिख रही है। क्योंकि किसानों मृदा हेल्थ कार्ड जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है। किसानों ने भी इस हेल्थ कार्ड को कोने में रख दिया और आज भी उसी तरह से उर्वरक का इश्तेमाल कर रहे हैं। विभाग की मानें तो किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से उनके खेत और मिट्टी के संबंध में जानकारी दी गई है। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कृषि विभाग की ओर से इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
जनपद में मृदा परीक्षण होने के बाद गांव में कृषक गोष्ठियों का आयोजन किया गया। किसानों को उनके खेत की कमियों को दूर करने के उपाय बताए गए। साथ ही अनुदान पर उन्हें ढ़ैंचा का बीज भी उपलब्ध कराया गया। आज भी इसको लेकर हमारी ओर से प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
संगम सिंह, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी।
विज्ञापन
किसानों द्वारा फसलों के उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर उर्वरक का प्रयोग किया जाता है। जिसके कारण उन्हें अपनी फसलों में ज्यादा लागत लगानी पड़ती है। इसे देखते हुए सरकार की ओर से मृदा परीक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की गई। ताकि किसान अपनी खेत की मिट्टी के बारे में जाने और जरूरी पोषक तत्वों का प्रयोग कर कम लागत में अच्छी उपज प्राप्त करें। लेकिन वर्तमान में सरकार की यह योजना पूर्ण रूप से सफल होती नहीं दिख रही है। क्योंकि किसानों मृदा हेल्थ कार्ड जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है। किसानों ने भी इस हेल्थ कार्ड को कोने में रख दिया और आज भी उसी तरह से उर्वरक का इश्तेमाल कर रहे हैं। विभाग की मानें तो किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से उनके खेत और मिट्टी के संबंध में जानकारी दी गई है। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कृषि विभाग की ओर से इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
विज्ञापन
जनपद में मृदा परीक्षण होने के बाद गांव में कृषक गोष्ठियों का आयोजन किया गया। किसानों को उनके खेत की कमियों को दूर करने के उपाय बताए गए। साथ ही अनुदान पर उन्हें ढ़ैंचा का बीज भी उपलब्ध कराया गया। आज भी इसको लेकर हमारी ओर से प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
संगम सिंह, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी।