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Azamgarh News: मार्ग डूबे छह गावों का संपर्क टूटा
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लाटघाट। तीन बैराजों से छोड़े गए 358159 क्यूसेक पानी ने सरयू नदी को उफान पर ला दिया है। बदरहुआं नाला और डिघिया नाला पर जलस्तर 50 सेमी और 97 सेमी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
जहां एक ओर चक्की, लाला का पुरा, झंडी का पुरा, शिवलोचन का पुरा, फूलबदन का पुरा और जागबल का पुरा जैसे गांव पानी से घिर गए हैं। वहीं दूसरी ओर शाहडीह, बांका, बूढ़नपट्टी, मानिकपुर, सोनौरा और अभनपट्टी का संपर्क पूरी तरह कट चुका है। इन गांवों के संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भर गया है। इन गांवों के लिए निजी नाव अब एकमात्र आवागमन का साधन बन गई है।
सबसे ज्यादा मार झेली है परवल के किसानों ने। जिन खेतों में अभी कुछ दिन पहले तक हरी-भरी बेलें लहराती थीं, आज वहां सिर्फ पानी की परतें हैं। जोखन सिंह पटेल, गया सिंह पटेल और श्रीराम पटेल जैसे किसानों की लगभग 50 बीघा फसल पूरी तरह डूब गई है। किसान बताते हैं कि फसल अभी निकलने वाली थी, लेकिन अब लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। जो किसान पहले मंडी की ओर रुख करते थे, अब नाव से अपने घर तक ही पहुंच पाना चुनौती बन गया है।
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नदी का जलस्तर
बदरहुआं नाले पर नदी का जलस्तर शुक्रवार शाम 4 बजे 71.80 मीटर था, जो शनिवार को 38 सेमी बढ़कर 72.18 मीटर हो गया। वहीं डिघिया नाले पर जलस्तर शुक्रवार को 71.10 मीटर था जो शनिवार को बढ़कर 71.37 मीटर हो गया। बदरहुंआ पर नदी का खतरा बिंदु 71.68 मीटर और डिघिया पर 70.40 मीटर है। नदी में गिरिजा बैराज से 170505, शारदा बैराज से 164702 और सरयू बैराज से 22952 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
महुला गढ़वल बांध पर प्रशासन द्वारा 10 बाढ़ चौकियों और 14 आश्रय स्थलों की स्थापना की गई है। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि एक भी बाढ़ चौकी फिलहाल सक्रिय नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिलाधिकारी निरीक्षण पर आए थे, तब सभी विभागों की सक्रियता दिखी, लेकिन अब जरूरत के समय कोई मौजूद नहीं दिखता। बाढ़ चौकियों पर अभी तक बैनर तक नहीं लगे हैं। इतना ही नहीं पानी से घिर चुके हो चुके गांवों में अब तक क्लोरिन की गोली का वितरण भी नहीं हुआ है।
अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जलस्तर में अभी दो दिन और वृद्धि की संभावना है, उन्होंने कहा कि बंधा पूरी तरह सुरक्षित है।
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जहां एक ओर चक्की, लाला का पुरा, झंडी का पुरा, शिवलोचन का पुरा, फूलबदन का पुरा और जागबल का पुरा जैसे गांव पानी से घिर गए हैं। वहीं दूसरी ओर शाहडीह, बांका, बूढ़नपट्टी, मानिकपुर, सोनौरा और अभनपट्टी का संपर्क पूरी तरह कट चुका है। इन गांवों के संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भर गया है। इन गांवों के लिए निजी नाव अब एकमात्र आवागमन का साधन बन गई है।
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सबसे ज्यादा मार झेली है परवल के किसानों ने। जिन खेतों में अभी कुछ दिन पहले तक हरी-भरी बेलें लहराती थीं, आज वहां सिर्फ पानी की परतें हैं। जोखन सिंह पटेल, गया सिंह पटेल और श्रीराम पटेल जैसे किसानों की लगभग 50 बीघा फसल पूरी तरह डूब गई है। किसान बताते हैं कि फसल अभी निकलने वाली थी, लेकिन अब लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। जो किसान पहले मंडी की ओर रुख करते थे, अब नाव से अपने घर तक ही पहुंच पाना चुनौती बन गया है।
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नदी का जलस्तर
बदरहुआं नाले पर नदी का जलस्तर शुक्रवार शाम 4 बजे 71.80 मीटर था, जो शनिवार को 38 सेमी बढ़कर 72.18 मीटर हो गया। वहीं डिघिया नाले पर जलस्तर शुक्रवार को 71.10 मीटर था जो शनिवार को बढ़कर 71.37 मीटर हो गया। बदरहुंआ पर नदी का खतरा बिंदु 71.68 मीटर और डिघिया पर 70.40 मीटर है। नदी में गिरिजा बैराज से 170505, शारदा बैराज से 164702 और सरयू बैराज से 22952 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
महुला गढ़वल बांध पर प्रशासन द्वारा 10 बाढ़ चौकियों और 14 आश्रय स्थलों की स्थापना की गई है। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि एक भी बाढ़ चौकी फिलहाल सक्रिय नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिलाधिकारी निरीक्षण पर आए थे, तब सभी विभागों की सक्रियता दिखी, लेकिन अब जरूरत के समय कोई मौजूद नहीं दिखता। बाढ़ चौकियों पर अभी तक बैनर तक नहीं लगे हैं। इतना ही नहीं पानी से घिर चुके हो चुके गांवों में अब तक क्लोरिन की गोली का वितरण भी नहीं हुआ है।
अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जलस्तर में अभी दो दिन और वृद्धि की संभावना है, उन्होंने कहा कि बंधा पूरी तरह सुरक्षित है।