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बिना शिव के राम कृपा असंभव
अमर उजाला ब्यूराो, अाजमगढ़
Updated Mon, 29 Jun 2015 12:42 AM IST
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नगर के बाबा भवरनाथ मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा और ज्ञान यज्ञ का शनिवार की देर शाम शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डा. जेएन सिंह ने किया।
कथा के प्रथम दिन अयोध्या से पधारे प्रेममूर्ति संत सर्वेश जी महाराज ने कहा कि बिना शिव के प्रभु श्रीराम जी की कृपा प्राप्त करना असंभव है।
श्रीराम चरित मानस को बाबा तुलसी दास जी ने सात कांडों में विभक्त किया है, जैसे हमारे देश में सात पुरी, सात नदियां, सात तारे, सप्ताह के सात दिन, संगीत में सात सुर होते हैं, उसी प्रकार बाबा तुलसी दास ने रामायण को सात कांडों में विभक्त किया है, जो भी व्यक्ति इन सात कांडों को अपने जीवन में उतारता है,
उसे प्रभु श्रीराम की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। इसके लिए मनुष्य को सत्संग जहां कहीं भी हो उसे पहुंचकर श्रवण अवश्य करना चाहिए। श्रीराम कथा के श्रवण मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है।
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संत और साधु का संग तभी प्राप्त होता है, जब उस व्यक्ति पर ईश्वर की कृपा होती है। बोले आज बाबा भवरनाथ कृपा से ही इस वर्ष भी मुझे प्रभु श्रीराम की कथा कहने का अवसर प्राप्त हुआ है। कथा के समापन पर उपस्थित श्रद्घालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।
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कथा के प्रथम दिन अयोध्या से पधारे प्रेममूर्ति संत सर्वेश जी महाराज ने कहा कि बिना शिव के प्रभु श्रीराम जी की कृपा प्राप्त करना असंभव है।
श्रीराम चरित मानस को बाबा तुलसी दास जी ने सात कांडों में विभक्त किया है, जैसे हमारे देश में सात पुरी, सात नदियां, सात तारे, सप्ताह के सात दिन, संगीत में सात सुर होते हैं, उसी प्रकार बाबा तुलसी दास ने रामायण को सात कांडों में विभक्त किया है, जो भी व्यक्ति इन सात कांडों को अपने जीवन में उतारता है,
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उसे प्रभु श्रीराम की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। इसके लिए मनुष्य को सत्संग जहां कहीं भी हो उसे पहुंचकर श्रवण अवश्य करना चाहिए। श्रीराम कथा के श्रवण मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है।
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संत और साधु का संग तभी प्राप्त होता है, जब उस व्यक्ति पर ईश्वर की कृपा होती है। बोले आज बाबा भवरनाथ कृपा से ही इस वर्ष भी मुझे प्रभु श्रीराम की कथा कहने का अवसर प्राप्त हुआ है। कथा के समापन पर उपस्थित श्रद्घालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।