श्रद्धफूलपुर। प्रगतिशील शायर कैफी आजमी की पत्नी शौकत कैफी की याद में गुरुवार को उनके पैतृक आवास मेजवां स्थिति फते हमंजिल पर शोकसभा का आयोजन किया। इसमे लोगों ने शौकत कैफी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनकों याद किया।
शुरुआत स्व. शौकत कैफी के चित्र पर सेवक गोपाल और जितेन्द्र पांडेय, संयोगिता, हिना देसाई ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। गोपाल ने कहा कि मैं बचपन से ही कैफी आजमी और शौकत के साथ रहा। उनके निधन से हम लोगों ने मां को खो दिया है। अब इसकी भरपाई होना मुश्किल है। जितेन्द्र पांडेय ने कहा कि शौकत कैफी ने 1951 में पृथ्वी थियेटर से जुड़कर कई नाटक और फिल्मों में काम किया। फिल्मो में काम करने का तरीका ही कुछ अलग था। उनसे लोग सीख लिया करते थे। शौकत से कैफी आजमी की मुलाकात 1941 में हैदराबाद के एक मुशायरे में हुई थी। उसी दिन से शौकत ने कैफी आजमी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने का संकल्प लिया था। रामानंद सरस्वती पुस्तकालय की डायरेक्टर हिना देसाई ने कहा कि शौकत कैफी के निधन से फिल्मी और सामाजिक दुनिया दोनों का काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने जब कैफी आजमी की लिखी नज्म औरत उठ मेरी जां मेरे साथ ही चलना है सुनाया तो सभी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान शौकत कैफी की ओर से लिखी याद की राह गुजर, हम और कैफी नामक डॉक्युमेंट्री दिखाई गई। जयराम प्रजापति, सीताराम, घनश्याम, सोनू ठाकुर, रामाज्ञा यादव, पीआर गौतम, रामनेत, सियाराम, अनिरुद्ध रामफेर, मनीषा, दीपक, सुरेंद, प्रकाश, नैयर रजा मनोज, समर आदि थे।