आजमगढ़। सुहागिनें दिन भर निर्जला व्रत रहीं। शाम को सोलह शृंगार करके पार्वती और गणेश का पूजन किया। चलनी से चांद का दीदार करके पति के सलामती की कामना की। उसके बाद व्रत का पारण किया।
सूर्योदय से पहले उठकर सुहागिनों ने स्नान किया। जल ग्रहण किया और उसके बाद करवा चौथ व्रत की शुरुआत हो गई। पूरे दिन न अन्न ग्रहण किया और न पानी की एक बूंद गले के नीचे उतारा। करवा माता और गौरी-गणेश के पूजन किया गया। धूप-दीप, मिष्ठान, रोली, दूब, अक्षत, फूल व पंचामृत अर्पित किया। हलवा-पूड़ी का भोग लगाया। करवा माता को शृंगार सामाग्री अर्पित की। व्रत की कथा सुनी। रात आठ बजे के करीब जैसे ही चंद्रमा उदित हुआ। चलनी की ओट से उसे देखा और अर्घ्य दिया। जल, दूध, सफेद चंदन, सफेद फूल, इत्र एवं मिश्री, पान का अर्पण किया। उसके बाद जीवनसाथी के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया। सुहागिनें कई दिनों से व्रत की तैयारी कर रही थीं।