Azamgarh News: शहर से लेकर गांव तक लोगों के लिए नासूर बनी सड़कें, गुहार के बाद भी नहीं कोई कवायद
एक तरफ सरकार की ओर से पूर्वाचल के विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए नई सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ पुरानी सड़कों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
विस्तार
सरकार की ओर से भले ही सफर को आसान बनाने के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और फोरलेन का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। लेकिन आजमगढ़ जनपद में अधिकारियों की लापरवाही से जिले की सड़कें लोगों के लिए नासूर बन गई है। इन सड़कों पर वर्षों से हिचकोले खा रहे लोग कमर दर्द का शिकार हो रहे हैं।
सड़कों को गड्ढ़ामुक्त करने के लिए भी उनकी ओर से कोई कवायद नहीं की जा रही है। एक तरफ सरकार की ओर से पूर्वाचल के विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए नई सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ पुरानी सड़कों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सड़कें गड्ढ़ामुक्त नहीं हो सकीं
जिसका परिणाम है जनपद की कई सड़कें ऐसी हैं जिन वाहन तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। किसी जनपद की पहचान उसके शहर के रास्तों, गलियों और साफ-सफाई की व्यवस्था को देखकर लगाई जाती है। लेकिन जनपद में नगर क्षेत्र की शायद ही कोई सड़क हो जो चलने लायक बची हो।
अनियमित विकास के नाम पर सड़कों तोड़ दिया गया। फिर जैसे-तैसे इन गडढ़ों को भर दिया गया। आज यह गड्ढ़े लोगों को कई शारीरिक दर्द दे रहे हैं। शासन की ओर से कई बार सड़कों को गड्ढ़ामुक्त करने का निर्देश दिया गया लेकिन नगर क्षेत्र की सड़कें गड्ढ़ामुक्त नहीं हो सकीं। कहीं सीवर लाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को तोड़ दिया गया और सालों बीतने के बाद भी उनकी मरम्मत नहीं की गई।
नपा के पास नहीं है बजट
नगर क्षेत्र के कई गलियों की हालत ऐसी है कि इनमें रहने वाले लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में लोगों की समस्या बढ़ गई है। वहीं नगर पालिका के ईओ मनोज कुमार की मानें तो उनके पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं है तो वह गलियों की मरम्मत किस प्रकार कराएं। उनका कहना है कि बजट की व्यवस्था होने पर ही गलियों की मरम्मत कराई जाएगी।
मंडलायुक्त के निर्देश के बाद भी नहीं बदली सूरत
आजमगढ़-वाराणसी फोरलेन का निर्माण होने के कारण बिंद्राबाजार के रास्ते होते हुए वाराणसी तक जाने वाले मार्ग की सुधि नहीं ली गई। पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई द्वारा इसे अपनी सड़क नहीं बताया जा रहा था। लगभग दो साल पूर्व तत्कालीन मंडलायुक्त वीवी पंत ने इस मार्ग की दशा में सुधार के लिए दोनों से दस्तावेज मंगाकर देखा तो यह सड़क एनएचएआई के अधीन पाई गई।
उन्होंने बजट मंगाकर इसके निर्माण का निर्देश दिया लेकिन लगभग दो साल का समय बीत गया। लेकिन एनएचएआई न तो बजट मंगा सकी और ना ही इसका निर्माण किया जा सका। वर्तमान में इस मार्ग पर घुटने भर पानी लगा है, जिस में लोगों को आवागमन करना पड़ रहा है।
सात साल से आश्वासन की घुट्टी पर हो रहा निर्माण
कप्तानगंज से अहरौला को जाने वाला मार्ग सात साल से खराब है। इस सड़क पर पीडब्ल्यूडी द्वारा लगाया गया डामर तक सड़क से गायब है। जिसके कारण यह गांव के चकरोड में तब्दील हो गई है। कई बार लोग इसे लेकर धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। इस पर लोगों केे ऊपर केस दर्ज हो चुका है।
विभाग द्वारा कई बार लोगों को इसके निर्माण को जल्द शुरू कराने का आश्वासन दिया गया लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन की घुट्टी ही पिलाई गई। जबकि भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने अधिशासी अभियंता को इस मार्ग के निर्माण के लिए पत्र भी लिख चुके हैं। प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार का कहना है कि अहरौला कप्तानगंज मार्ग के चौड़ीकरण की प्रक्रिया शासन को भेजी गई है। स्वीकृति प्रदान होते ही इस पर चौड़ीकरण का काम शुरू होगा।