{"_id":"1b56d329de1cd819185fe5a88532411c","slug":"rimjhim-rain-increased-tension-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिमझिम बारिश ने बढ़ाई परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिमझिम बारिश ने बढ़ाई परेशानी
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 02 Dec 2015 11:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंगलवार को अचानक मौसम में बदलाव आया और बुधवार को पूरे दिन रुक रुककर बूंदाबांदी होती रही। बारिश ने आम लोगों के साथ किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। नगर की अधूरी बनी सड़कों पर कीचड़ फैलने से जहां राहगीर परेशान हुए, वहीं धान की मड़ाई भी रुक गई है।
किसान खलिहान में रखे गए धान के बोझ को बचाने की जुगत में पूरे दिन लगे रहे। कई किसानों के बोझ भीग गए हैं। कृषि विभाग की मानें तो बारिश ने गेहूं की बुआई को भी प्रभावित किया है। नवंबर तक जहां 80 फीसदी तक बुआई हो जाती थी, अब तक 50 फीसदी ही यह आंकड़ा जा पाया है। इससे गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ना तय है।
एक बार फिर मौसम ने किसानों के साथ दगा किया है। इस कारण उनकी गेहूं की बुआई पिछड़ने की पूरी संभावना है। क्योंकि धान की फसल बर्बाद होने के बाद किसान गेहूं की जल्दी से जल्दी बुआई की तैयारी में जुटे थे। किसानों ने खेतों में पानी भरकर बुआई के लिए तैयार किया था।
विज्ञापन
मंगलवार रात को चली तेज हवा के साथ आए बादलों को देख किसान उनके ना बरसने की प्रार्थना कर रहे थे। लेकिन बुधवार की बारिश ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। पूरे दिन रिमझिम बारिश होती रही। बारिश से किसानों में मायूसी छा गई। किसान हरिश्चंद्र प्रजापति ने बताया कि यही बारिश 10 से 15 दिन बाद होती तो फसलों के लिए सोना के समान होती। लेकिन इस बारिश से एक तो गेहूं की बुआई पिछड़ेगी, दूसरे तत्काल बोए गए गेहूं के बीजों के सड़ने का भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
जिला कृषि अधिकारी बसंत कुमार दुबे ने बताया कि इस वर्ष मौसम शुरू से ही उतार-चढ़ाव भरा रहा है। खेतों में नमी न होने के कारण किसानों को गेहूं की बुआई के लिए खेतों में पानी भरना पड़ा था।
इस बारिश के होने से अब बुआई देर से होगी। बताया कि हर वर्ष जहां नवंबर माह में 70 से 80 प्रतिशत बुआई पूरी हो जाती थी। इस बार मौसम की बेरुखी के कारण 50 प्रतिशत तक ही हो सकी। जो फसल तत्काल बोई गई होगी उसका अंकुरण प्रभावित होगा। बुआई लेट होने से पैदावार भी प्रभावित होगी।
विज्ञापन
किसान खलिहान में रखे गए धान के बोझ को बचाने की जुगत में पूरे दिन लगे रहे। कई किसानों के बोझ भीग गए हैं। कृषि विभाग की मानें तो बारिश ने गेहूं की बुआई को भी प्रभावित किया है। नवंबर तक जहां 80 फीसदी तक बुआई हो जाती थी, अब तक 50 फीसदी ही यह आंकड़ा जा पाया है। इससे गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ना तय है।
विज्ञापन
एक बार फिर मौसम ने किसानों के साथ दगा किया है। इस कारण उनकी गेहूं की बुआई पिछड़ने की पूरी संभावना है। क्योंकि धान की फसल बर्बाद होने के बाद किसान गेहूं की जल्दी से जल्दी बुआई की तैयारी में जुटे थे। किसानों ने खेतों में पानी भरकर बुआई के लिए तैयार किया था।
विज्ञापन
मंगलवार रात को चली तेज हवा के साथ आए बादलों को देख किसान उनके ना बरसने की प्रार्थना कर रहे थे। लेकिन बुधवार की बारिश ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। पूरे दिन रिमझिम बारिश होती रही। बारिश से किसानों में मायूसी छा गई। किसान हरिश्चंद्र प्रजापति ने बताया कि यही बारिश 10 से 15 दिन बाद होती तो फसलों के लिए सोना के समान होती। लेकिन इस बारिश से एक तो गेहूं की बुआई पिछड़ेगी, दूसरे तत्काल बोए गए गेहूं के बीजों के सड़ने का भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
जिला कृषि अधिकारी बसंत कुमार दुबे ने बताया कि इस वर्ष मौसम शुरू से ही उतार-चढ़ाव भरा रहा है। खेतों में नमी न होने के कारण किसानों को गेहूं की बुआई के लिए खेतों में पानी भरना पड़ा था।
इस बारिश के होने से अब बुआई देर से होगी। बताया कि हर वर्ष जहां नवंबर माह में 70 से 80 प्रतिशत बुआई पूरी हो जाती थी। इस बार मौसम की बेरुखी के कारण 50 प्रतिशत तक ही हो सकी। जो फसल तत्काल बोई गई होगी उसका अंकुरण प्रभावित होगा। बुआई लेट होने से पैदावार भी प्रभावित होगी।