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आजमगढ़: शिब्ली प्राचार्य के खिलाफ भ्रष्टाचार की हुई एक और शिकायत

Tue, 14 Feb 2023 05:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Feb 2023 05:00 AM IST
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Registrar will investigate the allegations of corruption on the principal
शिब्ली नेशनल कालेज के प्राचार्य पर नगर के राहुल नगर मड़या निवासी रवि प्रताप सिंह ने भी भ्रष्टाचार और कालेज में होने वाली नियुक्ति में पहले से ही नियुक्ति पाने वालों का नाम फिक्स होने का आरोप लगाते हुए अपर आयुक्त प्रशासन से इसकी शिकायत की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अपर आयुक्त प्रशासन हंसराज ने महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार वीपी कौशल को जांच सौंपी है। उन्होंने 15 दिन के अंदर जांच कर आख्या उपलब्ध कराने को कहा है।
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रवि प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि उक्त प्राचार्य द्वारा 17 अगस्त 2013 से 28 जुलाई 2015 तक प्राचार्य रहते हुए कालेज फीस की धनराशि के विभिन्न अंशों को व वेतन संदाय खाते एवं अन्य खातों में नहीं जमा कराया गया। शासन द्वारा वर्ष 2014 से ऑनलाइन छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों से प्राप्त क्षतिपूर्ति की राशि का कोई हिसाब नहीं रखा गया है। उनसे नकद में धनराशि प्राप्त कर उसका दुरुपयोग किया गया। उक्त अवधि में विकास कोष के लगभग 42 लाख रुपये का गबन किया गया। जिसका संज्ञान शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा, उप्र. इलाहाबाद द्वारा अपनी आडिट रिपोर्ट में लिया गया। फिर भी मामला लंबित है। अभी तक धनराशि वापस नहीं की गई। राज्यपाल व कुलाधिपति द्वारा नियुक्तियों पर रोक के आदेश बावजूद तृतीय श्रेणी में तीन नियुक्तियां की गई। उनका अनुमोदन एवं ज्वाइनिंग नहीं हो सकी। वर्तमान प्रबंधक ने उन तीनों व्यक्तियों को जून 2021 से कालेज में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन कर दिया। प्राचार्य ने उनके नाम कालेज के स्टाफ स्टेटमेंट में शामिल कर दिया जो अवैधानिक है। इतना ही नहीं प्राचार्य ने 17 अगस्त 2013 से 28 जुलाई 2015 तक की अवधि के लिए किसी प्रकार की कोई छुट्टी नहीं ली गई और न ही अपने प्रवक्ता पद से त्याग पत्र दिया गया। विधिपूर्ण तरीके से नियुक्त वरिष्ठतम प्राध्यापक एवं कार्यरत कार्यवाहक प्राचार्य डा. मुहम्मद हारुन से सात दिसंबर 2021 को प्रबंध समिति के कुछ पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने अनुचित दबाव बनाकर त्यागपत्र ले लिया और दूसरे ही दिन आठ दिसंबर 2021 को वरिष्ठता सूची में सोलहवें प्राध्यापक को कार्यवाहक प्राचार्य का पदभार ग्रहण करा दिया गया जो नियम के विरुद्घ है। मामले जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
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