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रमजान में ही नाजिल हुई थी कुरआन
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आजमगढ़। रमजान का महीना इबादत का महीना है। इसी रमजान में कुरआन पाक दुनिया में हजरत मोहम्मद सलल्लाहो सल्लम पर नाजिल हुई थी। मौलाना अब्दुल रहीम ने बताया कि रमजान तीन अशरों में बंटा हुआ है। पहला अशरा अल्लाह की रहमत का है। दूसरा असरा मगफिरत व तीसरा असरा आग से निजात का है।
मौलाना अब्दुल रहीम के अनुसार हुजूर साहब से अल्लाह ने कहा कि नबी तुम अपने बंदों को रोजा, नमाज के लिए पाबंद करो और बालिगों के लिए पांच वक्त की नमाज फर्ज करो। इसके साथ ही एक साल का रोजा सुन्नत करार दो। जब हुजूर साहब ने अल्लाह से अरदास किया कि ऐ खुदा मेरे बंदे इतने लंबे समय का रोजा नहीं रख पायेंगे। इस पर अल्लाह ने छह माह का रोजा रखने को कहा। इस पर भी हुजूर साहब ने अल्लाह से मिन्नत किया तो एक माह का रोजा रखना हर मुसलमान के लिए फर्ज करार दिया गया। उन्होंने बताया कि नमाज अल्लाह के करीब लाता है। अल्लाह ने रमजान को फर्ज कर के इंसान के रूहानी और जिस्मानी ताकतों को मजबूत करने का मौका दिया है। यह महीना ऐसा महीना है, जिसका पहला असरा रहमत का, दूसरा असरा मगफिरत का और तीसरा असरा आग से निजात का है। नबी ए करीम ने फरमाया है कि एक खजूर से इफ्तार कराने अथवा एक घूंट पानी रोजेदार को पिला देने से भी अल्लाह उस बंदे पर अपनी रहमत फरमा देता है।
इस माह में रखे अजमत का विशेष ख्याल
सरायमीर। विश्व विख्यात मदरसा इस्लाह सरायमीर के प्रधानाध्यापक मुफ्ती इस्लाम साहब ने कह कि अल्लाह ने रमजान माह अता करके मुसलमानों के लिए रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात का विशेष इंतजाम किया है। मुसलमानों को चाहिए कि इस माह में अजमत का विशेष ख्याल रखे। रोजा, तरावीह व नफली इबादतों में वक्त लगाएं। लॉक डाउन ने हमें यह मौका दिया है कि घर में रह कर इबादत को अधिक से अधिक समय दे। मस्जिदों के बजाए घरों पर ही नमाज अदा करें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हर हाल में करें।
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मौलाना अब्दुल रहीम के अनुसार हुजूर साहब से अल्लाह ने कहा कि नबी तुम अपने बंदों को रोजा, नमाज के लिए पाबंद करो और बालिगों के लिए पांच वक्त की नमाज फर्ज करो। इसके साथ ही एक साल का रोजा सुन्नत करार दो। जब हुजूर साहब ने अल्लाह से अरदास किया कि ऐ खुदा मेरे बंदे इतने लंबे समय का रोजा नहीं रख पायेंगे। इस पर अल्लाह ने छह माह का रोजा रखने को कहा। इस पर भी हुजूर साहब ने अल्लाह से मिन्नत किया तो एक माह का रोजा रखना हर मुसलमान के लिए फर्ज करार दिया गया। उन्होंने बताया कि नमाज अल्लाह के करीब लाता है। अल्लाह ने रमजान को फर्ज कर के इंसान के रूहानी और जिस्मानी ताकतों को मजबूत करने का मौका दिया है। यह महीना ऐसा महीना है, जिसका पहला असरा रहमत का, दूसरा असरा मगफिरत का और तीसरा असरा आग से निजात का है। नबी ए करीम ने फरमाया है कि एक खजूर से इफ्तार कराने अथवा एक घूंट पानी रोजेदार को पिला देने से भी अल्लाह उस बंदे पर अपनी रहमत फरमा देता है।
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इस माह में रखे अजमत का विशेष ख्याल
सरायमीर। विश्व विख्यात मदरसा इस्लाह सरायमीर के प्रधानाध्यापक मुफ्ती इस्लाम साहब ने कह कि अल्लाह ने रमजान माह अता करके मुसलमानों के लिए रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात का विशेष इंतजाम किया है। मुसलमानों को चाहिए कि इस माह में अजमत का विशेष ख्याल रखे। रोजा, तरावीह व नफली इबादतों में वक्त लगाएं। लॉक डाउन ने हमें यह मौका दिया है कि घर में रह कर इबादत को अधिक से अधिक समय दे। मस्जिदों के बजाए घरों पर ही नमाज अदा करें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हर हाल में करें।
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